पहाड़िया ने करायी आर्थिक नाकेबंदी

कोयला व पत्थर ढुलाई रोका, अधिकारों की मांग को लेकर अमड़ापाड़ा : वन अधिनियम 2006 को रद्द करने सहित अन्य मांगों को लेकर मंगलवार को पहाड़िया मुक्ति सेना के बैनर तले पहाड़िया ग्रामीणों ने आर्थिक नाकेबंदी की. आर्थिक नाकेबंदी का नेतृत्व मोरचा अध्यक्ष वीरेंद्र पहाड़िया एवं सचिव गयालाल देहरी ने की. आर्थिक नाकेबंदी के तहत […]
कोयला व पत्थर ढुलाई रोका, अधिकारों की मांग को लेकर
अमड़ापाड़ा : वन अधिनियम 2006 को रद्द करने सहित अन्य मांगों को लेकर मंगलवार को पहाड़िया मुक्ति सेना के बैनर तले पहाड़िया ग्रामीणों ने आर्थिक नाकेबंदी की. आर्थिक नाकेबंदी का नेतृत्व मोरचा अध्यक्ष वीरेंद्र पहाड़िया एवं सचिव गयालाल देहरी ने की. आर्थिक नाकेबंदी के तहत सेना के सैकड़ों कार्यकर्ता प्रखंड के पीपीएल मोड़ पर पहुंचे और अमड़ापाड़ा पाकुड़ लिंकरोड को जाम कर दिया. आर्थिक नाकेबंदी के कारण कोयला एवं पत्थर की ढुलाई ठप रही.
कार्यक्रम के मौके पर अपने संबोधन में सेना के सचिव श्री देहरी ने कहा कि सरकार की उदासीनता के कारण आदिम जनजाति पहाड़िया ग्रामीणों को उनका अधिकार नहीं मिल रहा. उन्होंने कहा कि सरकारी उपेक्षा की वजह से पहाड़िया ग्रामीण विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं से आज भी वंचित है. उन्होंने अपने अधिकार के लिए पहाड़िया ग्रामीणों से एकजुट रहने की अपील की. आर्थिक नाकेबंदी को सफल बनाने में जैसन मालतो, सुलेमान मालतो, देवा पहाड़िया आदि सक्रिय दिखे.
ये हैं मांगें
पहाड़िया मुक्ति सेना ने वर्ष 1894 में वन विभाग द्वारा ली गयी सावरिया देश की पहाड़िया जमीन को वापस करने, पहाड़िया ग्राम सभा के माध्यम से पहाड़िया गांवों में विकास करने, पहाड़िया बटालियन का गठन करने, वन अधिनियम 2006 को रद्द करने, लब्दा मिशन सामूहिक दुष्कर्म की घटना की पुनरावृति न हो इसकी व्यवस्था करने की मांग को लेकर आर्थिक नाकेबंदी की.
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