सरना प्रार्थना सभा को पड़हा पुनर्गठन करने का अधिकार नहीं : जतरू उरांव

सरना प्रार्थना सभा को पड़हा पुनर्गठन करने का अधिकार नहीं : जतरू उरांव
कुड़ू़ तीन सीमानी पड़हा बेल की महत्वपूर्ण बैठक जरियो स्थित केंद्र में हुई. इसमें वर्तमान समय में गांवों के पहान, पुजार, महतो और पड़हा राजा के नाम पर किये जा रहे पड़हा पुनर्गठन पर गहन विचार-विमर्श हुआ. पड़हा बेल के उपदीवान जतरू उरांव ने सरना प्रार्थना सभा जिला समिति द्वारा बांटे जा रहे पत्रों पर कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरना प्रार्थना सभा केवल एक संस्था है, जबकि पड़हा एक पारंपरिक व्यवस्था है. रूढ़िवादी प्रथा के अनुसार, पड़हा पुनर्गठन का अधिकार केवल पारंपरिक पड़हा समितियों के पास सुरक्षित है, न कि किसी बाहरी संस्था के पास. लोहरदगा की पारंपरिक स्वशासन पड़हा व्यवस्था इस हस्तक्षेप का कड़ा विरोध करती है. रूढ़ि प्रथा की अवहेलना का आरोप : बैठक में वक्ताओं ने कहा कि प्रार्थना सभा जिला समिति द्वारा की जा रही कार्रवाई रूढ़ि प्रथा की सीधी अवहेलना है. सभी पड़हा राजा, बेल, दीवान, कोटवार और ग्रामीण पदाधिकारियों ने एकजुट होकर इस प्रक्रिया का विरोध करने का निर्णय लिया है. बैठक में गोपाल उरांव, गोविंद उरांव, रामजी उरांव, मंगेश्वर भगत, शिव शंकर टाना भगत, नंदलाल भगत और रमीणा उरांव सहित दर्जनों लोग शामिल थे. वक्ताओं ने समाज से अपनी पारंपरिक जड़ों और स्वशासन व्यवस्था को अक्षुण्ण रखने की अपील की. इस दौरान नरेश उरांव, रविंद्र उरांव, हरदेव भगत और संजीव भगत समेत कई अन्य सदस्य मौजूद थे.
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