जेठ जतरा जनजातीय जीवन की आत्मा व प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक : नीरू शांति भगत

जेठ जतरा जनजातीय जीवन की आत्मा व प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक : नीरू शांति भगत
कुड़ू़ प्रखंड के जिंगी में जेठ मास के आगमन पर पारंपरिक जेठ जतरा का भव्य आयोजन किया गया. इसमें सात पड़हा जिंगी, हुरहद, तान, जोंजरों, बारीडीह, मेरले और ऐड़ादोन सहित अन्य क्षेत्रों के खोड़हा दल शामिल हुए. सभी दलों को आयोजन समिति ने सम्मानित किया. प्रकृति और ग्राम देवताओं के प्रति कृतज्ञता : मुख्य अतिथि झामुमो नेत्री नीरू शांति भगत ने कहा कि जेठ जतरा केवल मेला नहीं, बल्कि जनजातीय जीवन की आत्मा और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है. यह पर्व खेती-किसानी शुरू होने से पहले अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और शांति की कामना के लिए मनाया जाता है. पाहन द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना कर ग्राम देवताओं को प्रसन्न किया गया. सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत प्रदर्शन : जतरा में पारंपरिक वेशभूषा में सजे ग्रामीण मांदर, नगाड़ा और ढोल की थाप पर जमकर थिरके. नीरू शांति भगत ने जोर दिया कि आधुनिकता के दौर में भी यह परंपरा आदिवासी समाज की स्वतंत्र पहचान को जीवित रखे हुए है. इस अवसर पर आध्यात्मिकता और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला. मौके पर संतोषी उरांव,रवि उरांव, रामा उरांव, चंद्रेश उरांव, मंगरा उरांव, शनिचरवा टाना भगत, बिनोद उरांव, पाहन फूलचंद उरांव, बिफई उरांव, पाहन जतरू उरांव, विजय नाथ शहदेव, प्रवीण नाथ शाहदेव,राजेश गुप्ता, मुमताज़ अंसारी, कंचन राम, लालदेव टाना भगत, योगेंद्र टाना भगत सहित अन्य शामिल थे.
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