बदहाली पर आंसू बहा रहा बलदेव साहू कॉलेज, 12 हजार विद्यार्थियों का भविष्य अधर में

Updated at : 10 Mar 2026 9:38 PM (IST)
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बदहाली पर आंसू बहा रहा बलदेव साहू कॉलेज, 12 हजार विद्यार्थियों का भविष्य अधर में

बदहाली पर आंसू बहा रहा बलदेव साहू कॉलेज, 12 हजार विद्यार्थियों का भविष्य अधर में

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लोहरदगा़ लोहरदगा, गुमला और लातेहार जिले की शैक्षणिक धरोहर माना जाने वाला बलदेव साहू महाविद्यालय आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. 28 एकड़ में फैले इस विशाल परिसर और शानदार स्टेडियम के बावजूद यहां का शैक्षणिक माहौल पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है. महाविद्यालय में स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) मिलाकर कुल 12 हजार विद्यार्थी नामांकित हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षक ही उपलब्ध नहीं हैं. विशेषकर हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, भौतिकी, उर्दू और वाणिज्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों में एक भी नियमित शिक्षक नहीं हैं. छह बार पत्राचार, पर विवि प्रशासन मौन : महाविद्यालय प्रशासन ने शिक्षकों की कमी को लेकर रांची विश्वविद्यालय के कुलसचिव को कई बार पत्र भेजा है. प्रभारी प्राचार्य डॉ शशि गुप्ता ने बताया कि 24 नवंबर 2022 से लेकर 11 जुलाई 2025 तक आधा दर्जन बार पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला. शिक्षकों के अभाव में कक्षाएं संचालित करना असंभव हो रहा है, जिससे विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय है. पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज साहू उठायेंगे मामला : पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जतायी है. उन्होंने कहा कि यह कॉलेज कभी इस क्षेत्र की शान हुआ करता था. मैं दिल्ली से लौटते ही झारखंड के राज्यपाल से मिलकर उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराऊंगा और अविलंब शिक्षकों की नियुक्ति का अनुरोध करूंगा. अतिक्रमण और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा : कॉलेज परिसर की चहारदीवारी अधूरी रहने के कारण पूर्वी हिस्सा खुला हुआ है. इससे न केवल कॉलेज की जमीन पर अतिक्रमण हो रहा है, बल्कि शाम होते ही यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है. प्राचार्य ने इसे लेकर सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर चिंता व्यक्त की है. विद्यार्थी भी आक्रोशित : शिक्षकों की कमी को लेकर विद्यार्थी भी आक्रोशित हैं और कई दिनों से कॉलेज परिसर में प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे महाविद्यालय का माहौल प्रभावित हो रहा है. उल्लेखनीय है कि यहां हिंदी और इतिहास विषय में स्नातक के साथ-साथ स्नातकोत्तर की भी पढ़ाई होती है, लेकिन शिक्षकों के अभाव में पढ़ाई सुचारू रूप से नहीं चल पा रही है. लाइब्रेरी भी वीरान : बलदेव साहू महाविद्यालय में एक सुसज्जित लाइब्रेरी भी है जहां किताबों की भरमार है. लेकिन विद्यार्थी जब महाविद्यालय में पढ़ाई नहीं होती है तो महाविद्यालय आते ही नहीं है. जिसके कारण यह लाइब्रेरी भी वीरान रहता है. महाविद्यालय में शिक्षक नहीं रहने के कारण विद्यार्थियों की उपस्थिति भी नगण्य होती है.

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SHAILESH AMBASHTHA

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