जिस लाहौर नई देखिया, ओ जनमिया नई नाटक का मंचन

Updated at : 15 May 2017 9:28 AM (IST)
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जिस लाहौर नई देखिया, ओ जनमिया नई नाटक का मंचन

लोहरदगा : ग्रेटर त्रिवेणी पब्लिक स्कूल में जिस लाहौर नई देखिया ओ जनमिया नई नाटक का मंचन किया गया. कार्यक्रम का उदघाटन उपायुक्त विनोद कुमार , पूर्व मंत्री सघनू भगत, पूर्व विधान पार्षद प्रवीण कुमार सिंह, भाजपा नेता ओम प्रकाश सिंह, उप प्राचार्य एस चितौड़ा ने संयुक्त रूप से किया. प्रसिद्व नाटककार असगर बजात द्वारा […]

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लोहरदगा : ग्रेटर त्रिवेणी पब्लिक स्कूल में जिस लाहौर नई देखिया ओ जनमिया नई नाटक का मंचन किया गया. कार्यक्रम का उदघाटन उपायुक्त विनोद कुमार , पूर्व मंत्री सघनू भगत, पूर्व विधान पार्षद प्रवीण कुमार सिंह, भाजपा नेता ओम प्रकाश सिंह, उप प्राचार्य एस चितौड़ा ने संयुक्त रूप से किया.
प्रसिद्व नाटककार असगर बजात द्वारा लिखित इस नाटक का निर्देशन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के संजय लाल द्वारा किया गया, जिसे खूबसूरत बनाने में 35 कलाकारों ने यादगार भूमिका निभायी. नाटक को कर्णप्रिय संगीत एवं अपनी मधुर आवाज से जीटीपीएस के संगीत शिक्षक रथीन मुखर्जी ने सजाया और संवारा था. नाटक को दर्शकों द्वारा खूब सराहा गया. पंजाबी एवं उर्दू भाषा से सजे इस नाटक में अंग्रेजी सरकार की गुलामी से मुक्त हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच के उस दर्द भरे बंटवारे और आपसी वैमन्स्यता को बखूबी दिया गया है.
लाहौर से लगभग सभी हिंदुओं को भारत भगा दिया है और उनकी हवेली तथा कारोबारों पर वहां के मुसलमानों ने कब्जा कर लिया है. एक हिंदू परिवार की हवेली मिर्जा साहब के नाम कर दिया गया है. वे अपने परिवार के साथ वहां रहने आते हैं, किंतु उस हवेली में उस घर की मालकिन बुढ़िया को वहां देख उन्हें बहुत बुरा लगता है.
वह बंटवारे के बाद हिंदुस्तान न जा सकी थी. पहले तो मिर्जा साहब और उनके परिवार के लोग हरहाल में उस बुढ़िया को वहां से निकालना चाहते थे, किंतु उसके अच्छे और स्नेहभरी व्यवहार को देख धीरे धीरे सभी उसे प्यार करने लगे और माई कहकर पुकारने लगे. एक बार वह हिंदुस्तान जाने को तैयार भी हुई, लेकिन उन्हें मिर्जा साहब के परिवार के लोग जाने नहीं दिये. हालांकि वहां के असामाजिक एवं गुंडा किस्म के लोगों को यह मंजूर नहीं थी कि अब लाहौर में कोई हिंदू रहे. वे मिर्जा साहब को उस बुढ़िया को भगाने के लिए धमकाने लगे. कुछ दिन के बाद उस बुढ़िया की मौत हो गयी, किंतु वहां के नेकदिल मौलवी और रहमदिल मुसलमानों ने हिंदू रीति रिवाज से उस बुढ़िया का अंतिम संस्कार कर दिया. नाटक में यह दर्शाया गया है कि जाति धर्म से ऊंचा मानव धर्म है और इसे अपनाकर ही सुख शांति एवं समृद्धि की कल्पना की जा सकती है.
नाटक के प्रमुख कलाकारों के रूप में सन्नी कुमार, अशोक गोप, अभिषेक, रोहित मिश्रा, स्वास्तिक शर्मा, कृतिका, शमिष्ठा, अंकिता, आंचल, नीतु, अंजली, सुनिता, अमरनाथ, हर्षित , अवनीश, हर्ष, अनुप, हिमांशु, निमेश, विशाल, रौशन, सुदीप, शरद, मुकेश, रोहित और दीपक ने यादगार भूमिका निभायी है. मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष राजमोहन राम, सीताराम शर्मा, ब्रज बिहारी प्रसाद,अफसर कुरैशी, हाजी सज्जाद खान, बीके बालाजिनप्पा सहित बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं एवं अभिभावक मौजूद थे.
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