पढ़ना चाहते हैं, अच्छी जिंदगी की इच्छा है

Updated at : 24 Apr 2017 8:32 AM (IST)
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पढ़ना चाहते हैं, अच्छी जिंदगी की इच्छा है

परिवार से एक आदमी नहीं मिलने पर मिली जान मारने की धमकी सारंडा के जंगल में दी गयी इन बच्चों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग गोपी/विनोद लोहरदगा : पुलिस द्वारा उग्रवादियों के चंगुल से मुक्त कराये गये बच्चों ने पुलिस को कई चौंकाने वाली जानकारी दी. मुक्त कराये गये छह में से पांच बच्चे नाबालिग […]

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परिवार से एक आदमी नहीं मिलने पर मिली जान मारने की धमकी
सारंडा के जंगल में दी गयी इन बच्चों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग
गोपी/विनोद
लोहरदगा : पुलिस द्वारा उग्रवादियों के चंगुल से मुक्त कराये गये बच्चों ने पुलिस को कई चौंकाने वाली जानकारी दी. मुक्त कराये गये छह में से पांच बच्चे नाबालिग हैं. इसलिए पुलिस ने इन बच्चों को मीडिया के सामने लाने और उनके नाम बताने से परहेज किया है. बच्चों द्वारा पुलिस को सुनायी गयी अापबीती में बच्चों ने कहा कि वह लोग पढ़ना चाहते हैं. और अच्छी जिंदगी की इच्छा रखते हैं.
पुलिस के अनुसार 13 वर्षीय एक पीड़ित ने बताया कि वह अपने गांव के स्कूल से पढ़ कर लौट रहा था. लगभग 45-50 की संख्या में माओवादियों का एक दस्ता पीड़ित के गांव माह अक्तूबर 2013 में उसे पकड़ कर ले गया. उस समय माओवादियों ने गांव के लोगों को जबरदस्ती पकड़ कर पहाड़ी क्षेत्रों में घुमाते रहे.
पीड़ित को जयगीर जंगल से सटे खुले मैदान में संगठन द्वारा पीटी, लाठी एवं हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी गयी. पीड़ित को कई घटनाओं में दस्ता सदस्यों के साथ रखा गया लेकिन उसके द्वारा कोई विध्वंसक कार्य नहीं किया गया. तुरियाडीह घटना के बाद संगठन के कई सदस्य धीरे धीरे पार्टी छोड़ कर भागने लगे. एक दिन मौका मिलते ही वह भी दस्ता छोड़ कर भाग निकला तथा छिप कर केरार के पास जंगल में पहुंचा जहां से पुलिस ने उसे बरामद किया. 14 वर्षीय एक अन्य पीड़ित ने बताया कि 28 दिसंबर 2014 को भाकपा माओवादी के 25 सदस्यों वाले एक दस्ता ने हरेक गांव से पांच पांच लोगों को दस्ते में शामिल करने का फरमान जारी किया. अन्यथा जंगल क्षेत्र में देखे जाने पर मार दिये जाने की धमकी दी.
संगठन के दस्ता के साथ दो महीने तक रहने के बाद सारंडा जंगल में ट्रेनिंग दी गयी. ट्रेनिंग पाने वालों में 25 अन्य भी शामिल थे. तीन महीने की ट्रेनिंग के बाद दस्ता के साथ उसे वापस भेज दिया गया. ट्रेनिंग समाप्त होने के बाद उसे बनालात क्षेत्र भेज दिया गया. बच्चों ने बताया कि दस्ता में रहने के दौरान भागने का प्रयास किया लेकिन डर से नहीं भाग पाये. एक अन्य 15 वर्षीय पीड़ित ने बताया कि 2015 में वह अन्य लोगों के साथ गुलेल से चिड़िया मारने जंगल गया था. उस दिन शाम में माओवादी संगठन के सदस्य उसे डरा धमका कर जंगल ले गये. वहां संगठन द्वारा सामान ढ़ोने का काम करवाया जाता रहा. दस्ता से भागने का प्रयास किये जाने के बावजूद नहीं भाग सका.
एक अन्य 14 वर्षीय पीड़ित ने बताया कि 2015 में माओवादी संगठन द्वारा मां बाप को डरा धमका कर जबरदस्ती पार्टी में शामिल किया गया. शुरू में बिना हथियार के दस्ता में घुमाया गया. कई घटनाओं में उसे साथ ले जाया गया. लगभग 16 वर्षीय पीड़िता ने बताया कि 50-60 की संख्या में एक दस्ता उसके गांव पहुंच. संगठन के लोगों ने कहा प्रत्येक घर से एक लड़का मिलने पर परिवार के सदस्यों को जंगल में जाने दिया जायेगा.
2015 में डरा धमका व मारपीट कर जबरदस्ती उसे दस्ता में शामिल किया गया. 16 वर्षीय एक अन्य पीड़ित ने बताया कि वर्ष 2013 में उसे संगठन में शामिल किया गया. शामिल नहीं होने पर परिवार से 10 लाख रुपये की मांग की गयी. डर कर वह पार्टी में चला गया. दस्ता में वह सामान ढ़ोने का काम करता था. वर्ष 2014 में पार्टी से भाग कर वह अपने घर आ गया. पुन: 2015 में संगठन ने उसे डरा धमका कर ले गये. उसने बताया कि उसे कोई ट्रेनिंग नहीं मिली है.
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