फसल बरबाद होने के कगार पर

Updated at : 21 Apr 2017 7:42 AM (IST)
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फसल बरबाद होने के कगार पर

कैरो-लोहरदगा : कैरो प्रखंड क्षेत्र के सढ़ाबे गांव के लोग काफी मेहनती हैं. इस गांव के किसान सालों भर खेती में लगे रहते हैं. सब्जियों की खेती कर सभी आत्मनिर्भर हैं. सढ़ाबे के किसानों द्वारा उत्पादित फसल कुडू, भंडरा, सोंस, मखमंदरो सहित अन्य बड़े बाजारों के माध्यम से बाहर भेजा जाता है. कई बार तो […]

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कैरो-लोहरदगा : कैरो प्रखंड क्षेत्र के सढ़ाबे गांव के लोग काफी मेहनती हैं. इस गांव के किसान सालों भर खेती में लगे रहते हैं. सब्जियों की खेती कर सभी आत्मनिर्भर हैं. सढ़ाबे के किसानों द्वारा उत्पादित फसल कुडू, भंडरा, सोंस, मखमंदरो सहित अन्य बड़े बाजारों के माध्यम से बाहर भेजा जाता है. कई बार तो अच्छी फसल होने के कारण किसानों का फसल खेत से ही बिक जाती हैं. बाहरी व्यापारी आकर खेतों में ही मोल भाव कर खेत में लगे सब्जी की खरीदारी कर लेते हैं.
फिर इन्हें काट कर व्यापारियों द्वारा ही ले लिया जाता है. किसानों को फसल बेचने की चिंता नहीं रहती. यहां के अधिकतर लोग अपने खेतों में सिंचाई कूप बनाकर इसी के माध्यम से सिंचाई करते हैं. खेती ही गांववालों का मुख्य सहारा भी है. किसान बताते हैं कि नदी में खोदे गये गड्डे से लगभग 200 मीटर स्थित दूर खेतों में भी हमलोग पानी ले जाकर खेती करते हैं, लेकिन जब पानी ही नहीं मिल रहा है तब फसलों को बचाने की चिंता हो रही है.
ठगा महसूस कर रहे हैं िकसान
किसान इस बार भी काफी संख्या में किसान फसल लगाये हुए हैं, लेकिन इस बार किसान अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं. कारण है कि जल स्तर नीचे जाने के कारण सभी किसानों का कुआं सूख गया है. खेती सूखने के कगार पर है. किसानों को अपना फसल बचाने की चिंता सता रही है.
इधर किसानों द्वारा सामूहिक रूप से जेसीबी लगा कर कंदिनी नदी पर 8-10 स्थानों पर गड्ढा खोद कर खेती बचाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन किसानों को इसमें सफलता नहीं मिल रही है. नदी में खोदे गये गड्डे का पानी सूखता जा रहा है. सैकड़ों एकड़ भूमि में लगे फसल को पानी देने में नदी में खोदा गया गड्ढा पर्याप्त नहीं हो रहा है. किसानों ने बताया कि सामूहिक चंदा कर जेसीबी से लगभग 60-70 हजार रुपये लगा कर नदी में गड्ढा खुदवाया, लेकिन यह भी बेकार साबित हो रहा है.
किसानों का यह भी कहना है कि महंगे खाद एवं बीज लगाकर खेती लगायी गयी है. यदि खेती मारी गयी, तो सढ़ाबे के किसानों की कमर ही टूट जायेगी. चूंकि यहां के किसानों के जीविका का मुख्य साधन खेती ही है. सब्जी की खेती बड़े पैमाने पर नकदी फसल के रूप में किया गया है ताकि लोगों को आर्थिक मुनाफा हो सके. यदि खेती बरबाद होती है, तो रखा पूंजी भी बरबाद हो जायेगा.
पानी की किल्लत एेसी होगी सोचा न था : इस संबंध किसान एकरामूल अंसारी का कहना है कि यदि सिंचाई की व्यवस्था हो जाये, तो यहां के किसान आत्मनिर्भर ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत हो सकते हैं. किसान कृष्णा साहू का कहना है कि सढ़ाबे के लोग काफी मेहनती हैं. खेती किसानी के बल ही जीविकोपार्जन करते हैं लेकिन दुर्भाग्य है कि कभी कभी अति वृष्टि तो कभी अल्प वृष्टि के कारण किसानों को प्रकृति की मार झेलनी पड़ती है. किसान संदीप साहू का कहना है कि सढ़ाबे गांव के बगल से कंदिनी नदी बहती है.
बरसात के दिनों में यहां भरपूर पानी रहता है. यदि नदी में चार- पांच स्थानों पर चेक डैम बना दिया जाये, तो हमलोगों को पानी की दिक्कत नहीं होगी और हमलोग गरमी के मौसम में भी बेहतर तरीके से सब्जी की खेती कर सकते हैं. रबीना खातून का कहना है कि हमलोग अपने बाल बच्चों को पालने के लिए हाड़तोड़ मेहनत तो करते हैं, खेती भी लगाते हैं लेकिन कभी-कभी बिन सोची परेशानी आ जाती है जिससे हमलोग परेशान हो जाते हैं. इस वर्ष पानी की किल्लत इस कदर होगी. हमलोग सोच नहीं पाये थे.
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