सरहुल के माध्यम से संस्कृति बचाने की जरूरत

Updated at : 27 Mar 2017 7:28 AM (IST)
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सरहुल के माध्यम से संस्कृति बचाने की जरूरत

कुड़ू (लोहरदगा) : केंद्रीय सरहुल संचालन समिति कुड़ू एंव राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को सरहुल पूर्व संध्या के मौके पर बहुउद्देशीय भवन कुड़ू में रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया. मौके पर प्रखंड क्षेत्र से पहुंचे आदिवासी खोड़हा दल ने रंगारंग कार्यक्रम पेश किया. सफल खोड़हा को प्रतीक चिह्न […]

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कुड़ू (लोहरदगा) : केंद्रीय सरहुल संचालन समिति कुड़ू एंव राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को सरहुल पूर्व संध्या के मौके पर बहुउद्देशीय भवन कुड़ू में रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया. मौके पर प्रखंड क्षेत्र से पहुंचे आदिवासी खोड़हा दल ने रंगारंग कार्यक्रम पेश किया.
सफल खोड़हा को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया. मुख्य अतिथि आदिवासी धर्मगुरु जयपाल उरांव ने कहा कि आदिवासी प्रकृति के पुजारी हैं. सरहुल प्रकृति पर्व है. सरहुल के माध्यम से अपनी संस्कृति बचाने की जरूरत है. विशुनपुर विधायक चमरा लिंडा ने कहा कि आदिवासी समाज जागरूक नहीं है लिहाजा उनका समुचित विकास नहीं हो पा रहा है .
रंगारंग कार्यक्रम में प्रखंड के कोलसिमरी, सुकुरहुटू, गितिलगढ़, टाकू, जिंगी, लावागाई समेत अन्य कई गांव के खोड़हा दल शामिल हुए. मौके पर अभिनव सिद्धार्थ, रंथू उरांव, सोमे उरांव, जतरू उरांव, अवधेश उरांव, मंगलदेव उरांव, रूपनरायण उरांव, अर्जुन उरांव, राजकिशोर उरांव, झालो उरांव, रायमुनी उरांव, चामू उरांव, विष्णु दयाल उरांव, सरस्वती उरांव, शनि भगत, सुनील उरांव व अन्य मौजूद थे.
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