ePaper

जीवनयापन के लिए दिया जाता है वन पट्टा

Updated at : 14 Feb 2019 3:14 AM (IST)
विज्ञापन
जीवनयापन के लिए दिया जाता है वन पट्टा

वन अधिकार कानून लागू करने में वन समिति की भूमिका अहम : डीएफओ लोहरदगा : समाहरणालय परिसर स्थित मेसो भवन में वन अधिकार अधिनियम 2006 को लेकर कार्यशाला आयोजित की गयी़ कार्यशाला का उद्घाटन लोहरदगा जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी विकास कुमार उज्ज्वल, जिला कल्याण पदाधिकारी मधुमती कुमारी, झारखंड वनाधिकार मंच के सुधीर पाल एवं संयोजक […]

विज्ञापन

वन अधिकार कानून लागू करने में वन समिति की भूमिका अहम : डीएफओ

लोहरदगा : समाहरणालय परिसर स्थित मेसो भवन में वन अधिकार अधिनियम 2006 को लेकर कार्यशाला आयोजित की गयी़ कार्यशाला का उद्घाटन लोहरदगा जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी विकास कुमार उज्ज्वल, जिला कल्याण पदाधिकारी मधुमती कुमारी, झारखंड वनाधिकार मंच के सुधीर पाल एवं संयोजक फादर मोनो पल्ली ने संयुक्त रूप से इसका उद्घाटन किया. इसमें सेन्हा, किस्को, पेशरार सहित कई प्रखंडों के वन क्षेत्र में रहनेवाले लगभग 150 ग्रामीण शामिल थे.
मौके पर जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी विकास कुमार उज्ज्वल ने कहा कि हम लोगों ने वन अधिकार अधिनियम के तहत लगभग 750 व्यक्तिगत एवं 30 सामुदायिक पट्टों का वितरण किया है. वन अधिकार कानून को लागू करने में वन समिति की भूमिका बहुत अहम है. ग्राम समिति प्रयास करे कि किसी तरह का गलत दावा ग्राम सभा में ना पहुंच सके.
इस कानून को अच्छी तरह समझ लें. इस कानून का अर्थ यह नहीं कि आप उस वन क्षेत्र के मालिक हो जायेंगे. बल्कि सिर्फ आपको वनोपज का अधिकार मिलेगा. एक बार इस वन पट्टे का अधिकार मिल जाने के बाद आप वनों का संरक्षण भी करें और क्षेत्र में गैर वानिकी कार्य ना करें. अक्सर ग्रामीणों को बहका दिया जाता है कि जमीन बंट रही है.
यह अधिकार उस क्षेत्र में आश्रित रहनेवालों को उनके जीवनयापन के लिए दिया जाता है. जिला कल्याण पदाधिकारी मधुमती कुमारी ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य वनाधिकार कानून -2006 की जानकारी देना है. यह अधिकार सिर्फ उस वन क्षेत्र में रहने वाले आश्रित को ही मिलता है.झारखंड वनाधिकार मंच के सुधीर पाल ने कहा कि यह कानून अधिकार के साथ-साथ कर्तव्य भी है. यह नया अधिकार नहीं है इसका उद्देश्य जंगलों पर आश्रित रहनेवाले और परंपरागत रूप से किसी ना किसी रूप में जंगल से उनका नाता रहा है, उन्हें वनोपज का अधिकार प्रदान करना है.
यह अधिकार किन्हें मिलेगा यह ग्राम वनाधिकार समिति को तय करनी है. झारखंड वनाधिकार मंच के संयोजक फादर मोनो पल्ली ने कहा कि इस अधिकार का फायदा यह है कि जिन्हें उस वन क्षेत्र का अधिकार प्राप्त नहीं था वह उन्हें मिल रहा है. वनाधिकार मिलने के बाद आपकी जिम्मेवारी है कि जंगल को बचायें. जंगल सुरक्षित रहेगा, तो आप सुरक्षित रहेंगे. कार्यशाला में सभी मौजूद लोगों को ग्राम समिति गठित करने की जानकारी दी गयी.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola