घने बीहड़ जंगलों के बीच देखते ही बनती है पीटीआर के बागेचंपा की खूबसूरती

घने बीहड़ जंगलों के बीच देखते ही बनती है पीटीआर के बागेचंपा की खूबसूरती
बेतला़ पीटीआर की परिधि में घने जंगलों के बीचों-बीच स्थित बागेचंपा (बाग-ए-चंपा) प्रकृति की अद्भुत मिसाल है. यही वह स्थल है जहां पर मशहूर बूढ़ा नदी पर बना लोध फॉल से गिरने वाला पानी बहते हुए यहां तक पहुंच कर उतरी कोयल नदी में मिल जाती है. जिस तरह से केचकी में उत्तरी कोयल और औरंगा नदी का संगम होता है उसी तरह से यहां बूढ़ा नदी और उत्तरी कोयल नदी का मिलन होता है. यहां बूढ़ा नदी का उत्तरी कोयल नदी से मिलते हुए देखना पर्यटकों को घंटों बांधे रखता है. यहां पर चंपा के फूल गर्मियों में काफी देखा जाता है. उस समय चंपा फूल के सुगंध और ठंडी-ठंडी हवा लोगों को मदमस्त कर देती है. बागेचंपा भी पीटीआर के घने जंगलों के बीच स्थित है और इस खूबसूरत जगह को अंग्रेज के समय बसाया गया था. चंपा का फूल से भरा होने के कारण इसका नाम बागे चंपा दिया गया था. बागे चंपा आने के बाद कोई जाना नहीं चाहता है यहां की ऊंची-ऊंची पहाड़ियां व हरे-भरे जंगल मन को प्रसन्न चित्त कर देते हैं. यहां की आबोहवा इतनी मदमस्त है कि लोग सभी परेशानियों को भूल जाते हैं. तरह-तरह के वनस्पतियों की भीनी- भीनी खुशबू तो जैसे जान ही डाल देती है. प्रकृति के सानिध्य में रहने वाले लोगों के लिए यह स्थल तो इतना भाता है कि वह यहीं पर अपना घर बसा लेना चाहते हैं. नेतरहाट के बाद बागेचंपा में गर्मियों में आते थे अंग्रेज : अंग्रेजों ने जब नेतरहाट में रहना शुरू किया था तब से वे लोग आसपास के इलाके में भी भ्रमण किया करते थे. घने जंगलों में शिकार करने के दौरान वे लोग नदियों के सहारे यहां तक पहुंचे. जब उन लोगों ने बागेचंपा में दो नदियों के मिलन को दिखा तो इस जगह को भी आराम करने के नियत से चुन लिया. शिकार करने के बाद घंटों यहां समय बिताते थे. हालांकि बाद में जब टाइगर रिजर्व का गठन हो गया तब प्रतिबंध लगा दिया गया. पहले की तरह अब पर्यटकों को वहां जाने की आजादी नहीं रही. पर्यटकों का आना-जाना रूक गया लेकिन इसकी खूबसूरती आज भी बरकरार है. आने वाले पर्यटक स्थलों में बागेचंपा की खूबसूरती बरबस ही खींच लेती है. इसकी सुंदरता देखते ही बनती है. कुजरूम से पहुंचा जा सकता है बागेचंपा : बागेचंपा पहुंचने के लिए कुजरूम होते दुर्गम रास्तों से चलकर यहां आना होता है. यहां से बूढ़ापहाड़ का नजारा स्पष्ट दिखायी देता है. इसके आसपास तो कोई गांव नहीं है लेकिन थोड़ी दूर पर कुछ जंगल में बसे गांव हैं. वन विभाग के पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा विशेष अनुमति के बाद यहां पहुंचा जा सकता है. कोर एरिया में होने के कारण यहां कई बंदिशें हैं.
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