सरहुल पर्व प्रकृति और पर्यावरण के अटूट संबंध का प्रतीक है : विधायक

Updated at : 21 Mar 2026 10:12 PM (IST)
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सरहुल पर्व प्रकृति और पर्यावरण के अटूट संबंध का प्रतीक है : विधायक

सरहुल पर्व प्रकृति और पर्यावरण के अटूट संबंध का प्रतीक है : विधायक

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बालूमाथ ़ प्रखंड मुख्यालय में प्रकृति पर्व सरहुल शनिवार को अकीदत और उल्लास के साथ मनाया गया. इस मौके पर निकाली गयी भव्य शोभायात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा. डीजे, ढोल और मांदर की थाप पर थिरकते श्रद्धालुओं की यात्रा दिवाकर नगर से प्रारंभ होकर मोरपा मोड़, थाना चौक और बस स्टैंड होते हुए दुर्गा मंडप स्थित सरना स्थल पहुंची. पर्यावरण संरक्षण का संकल्प : कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक प्रकाश राम ने क्षेत्रवासियों को सरहुल की शुभकामना देते हुए कहा कि यह पर्व प्रकृति और पर्यावरण के अटूट संबंध का प्रतीक है. उन्होंने आने वाली पीढ़ी की सुरक्षा के लिए पेड़ों की कटाई नहीं करने का संकल्प दिलाया. विधायक ने घोषणा की कि आगामी अप्रैल माह में उनकी ओर से सभी खोड़हा समितियों को ढोल और मांदर भेंट किये जायेंगे. एसडीपीओ विनोद रवानी ने भी सरहुल को प्रकृति पूजा का महान संदेश बताया. नृत्य और संगीत का संगम : चेतग, मारंगलोइया, मुरपा, झाबर, शेरेगरा, गणेशपुर समेत विभिन्न गांवों से आये लोग पारंपरिक वेशभूषा में सजे थे. सरना स्थल पर पाहन ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की. सुरक्षा की कमान थाना प्रभारी अमरेंद्र कुमार और सब इंस्पेक्टर अनुभव सिन्हा के नेतृत्व में पुलिस बल ने संभाल रखी थी. मौके पर झामुमो प्रखंड अध्यक्ष प्रदीप गंझु, भाजपा प्रखंड अध्यक्ष अखिलेश भोक्ता, जिप उपाध्यक्ष अनीता देवी, पड़हा राजा प्रभु दयाल उरांव, पूजा समिति अध्यक्ष शुकरा भगत, रीना उरांव समेत कई लोग शामिल थे.

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SHAILESH AMBASHTHA

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