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जतरा आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपरा का प्रतीक

Updated at : 16 Sep 2025 9:53 PM (IST)
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जतरा आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपरा का प्रतीक

जतरा आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपरा का प्रतीक

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बारियातू़ प्रखंड के टोंटी पंचायत अंतर्गत इटके और टुंडाहुटू गांव में मंगलवार को जिउतिया जतरा समिति की पहल पर जिउतिया जतरा-मेला का आयोजन किया गया. दोनों स्थानों पर काफी संख्या में ग्रामीण जुटे. पारंपरिक गीत-संगीत और मांदर की थाप पर हुए नृत्य ने पूरे वातावरण को उत्साहपूर्ण बना दिया. जतरा का उद्घाटन मुखिया शांति देवी, पंसस मोहम्मद होजैफा, जिला पड़हा राजा प्रभुदयाल उरांव, बिशेश्वर उरांव उर्फ भगना उरांव, श्यामलाल उरांव, जतरा समिति के अध्यक्ष पंकज उरांव, मोहन उरांव, बिशनु उरांव, करमा उरांव, गणेश राम तथा चंद्रगुप्त उरांव ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया. अतिथियों ने लोगों को जिउतिया पर्व और जतरा-मेले की बधाई दी. कहा कि जतरा आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपरा को जीवंत बनाये रखने का प्रतीक है. इस दौरान विभिन्न टोला के ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में टोली बनाकर मांदर की थाप पर नृत्य करते जतरा-मेले में पहुंचे. मांदर और नगाड़े की गूंज से पूरा वातावरण गूंज उठा. भीड़ नियंत्रण करने को लेकर पुलिस बल की तैनाती की गयी थी. कार्यक्रम का संचालन निरंजन खाखा और संतोष राम कर रहे थे. मौके पर महेंद्र उरांव, अमित उरांव, अपेल उरांव, अरविंद उरांव, अनिल उरांव, अमित भगत, अरुण कुमार समेत काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAILESH AMBASHTHA

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