बाहरी हस्तक्षेप को रोकने के लिए ग्राम सभा का सशक्त होना जरूरी

बाहरी हस्तक्षेप को रोकने के लिए ग्राम सभा का सशक्त होना जरूरी
गारू़ प्रखंड के बेसनाखाड़ गांव में गुरुवार को ग्राम प्रधान नरेश सिंह की अध्यक्षता और जिला परिषद सदस्य जीरा देवी की उपस्थिति में ग्राम सभा का आयोजन किया गया. इस बैठक में मुख्य रूप से पेसा कानून और वन क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों व आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों पर विस्तार से चर्चा की गयी. निर्णायक भूमिका में है ग्राम सभा : मौके पर जिप सदस्य जीरा देवी ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि पेसा कानून ग्राम सभा को जल, जंगल और जमीन से जुड़े मामलों में निर्णायक शक्ति प्रदान करता है. उन्होंने बताया कि वनों की उपज, पारंपरिक संसाधनों का संरक्षण और स्थानीय विकास योजनाओं की स्वीकृति जैसे महत्वपूर्ण अधिकार अब सीधे ग्राम सभा के हाथों में है. बाहरी हस्तक्षेप को रोकने के लिए ग्राम सभा का सशक्त होना जरूरी है. स्वशासन को मजबूती देने का संकल्प : आदिवासी नेता विमल कुजूर ने पेसा कानून को आदिवासी स्वशासन की रीढ़ बताया. उन्होंने कहा कि यदि ग्रामीण जागरूक और संगठित रहें, तो कोई भी निर्णय उनकी सहमति के बिना गांव पर नहीं थोपा जा सकता. वहीं, सत्येंद्र उरांव ने ग्रामीणों से अपील की कि वे इस कानून की जानकारी हर घर तक पहुंचायें ताकि अधिकारों के साथ-साथ जिम्मेदारियों का भी निर्वह्न हो सके. बैठक के अंत में ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से वन संसाधनों के संरक्षण और ग्राम सभा को सशक्त बनाने का संकल्प लिया.
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