आंखें नहीं ठहरतीं चंदवा की प्राकृतिक सुषमा पर

– शशि शेखर/सुमित – चंदवा (चूल्हापानी) : देवनद-दामोदर का उदगम स्थल चूल्हापानी बोदा (चंदवा) तथा लोहरदगा जिला के कुड़ू व किस्को प्रखंड की सीमा पर स्थित है. यहां चंदवा स्थित एनएच-75 पर लुकू इया मोड़ से लुकूइया व बोदा गांव तक (पांच किमी) वाहन द्वारा इसके बाद दुर्गम पहाड़ी रास्ते से 3.5 किमी की दूरी […]
– शशि शेखर/सुमित –
चंदवा (चूल्हापानी) : देवनद-दामोदर का उदगम स्थल चूल्हापानी बोदा (चंदवा) तथा लोहरदगा जिला के कुड़ू व किस्को प्रखंड की सीमा पर स्थित है. यहां चंदवा स्थित एनएच-75 पर लुकू इया मोड़ से लुकूइया व बोदा गांव तक (पांच किमी) वाहन द्वारा इसके बाद दुर्गम पहाड़ी रास्ते से 3.5 किमी की दूरी पैदल तय कर पहुंचा जा सकता है. दूसरा रास्ता कुड़ू प्रखंड की ओर से खम्हार होते उदगम स्थल तक जाता है. चूल्हापानी में जामुन, कुसुम व पाकड़ के पेड़ एक-दूसरे से ऐसे सटे हैं, मानों एकता का पाठ पढ़ा रहे हों. संयुक्त वृक्ष की जड़ से निरंतर शुद्ध जल प्रवाहित होता रहता है. यहां दामोदर मंदिर का निर्माण प्रस्तावित है.
देवनद : चूल्हापानी से निकला देवनद आगे जाकर दामोदर के नाम से जाना जाता है. पश्चिम से पूरब की ओर प्रवाह के कारण यह नद के रूप में प्रख्यात है. इस पर बना मेहराब पुल देखने लायक है. देवनद तट पर नव वर्ष के दिन मेले सा माहौल रहता है.
अमझरिया विश्रमागार: अंगरेजी हुकूमत में टोरी इस्टेट द्वारा वन विहार के लिए अमझरिया में विश्रमागार का निर्माण कराया गया था. हालांकि यह बंगला रख-रखाव नहीं होने के कारण आज बदहाल है. यहां पहाड़ी पर से सूर्योदय व सूर्यास्त का नजारा देखा जा सकता है. एनएच-75 से 100 मीटर की दूरी पर यह बंगला स्थित है. यह बंगला कई फिल्मों की शूटिंग का भी गवाह रहा है.
हिंडालको उद्यान : एनएच-75 के किनारे हुटाप गांव स्थित हिंडाल्को के उद्यान में नववर्ष पर पिकनिक मनाने सैकड़ों लोग आते हैं. यहां लगे वृक्ष व पौधे मनोहरी छटा बिखेरते हैं. उद्यान हिंडालको जन सेवा ट्रस्ट के नियंत्रण में है. टोरी अनलोडिंग स्टेशन की देखरेख में उद्यान को सजाया-संवारा जाता है. समीप ही मुगलदाहा नदी है. नव वर्ष में लोग यहां मस्ती करते नजर आते हैं.
कांति फॉल : प्रखंड मुख्यालय से दक्षिण-पूर्व दिशा में 20 किमी की दूरी पर यह फॉल स्थित है. चंदवा से रांची की ओर (एनएच 75) सेन्हा तक 13 किमी की दूरी तय करने के बाद सेन्हा-हेसला शाखा पथ से सात किमी की दूरी तय कर झरना तक पहुंचा जा सकता है. यह झरना वन विभाग के अधीन है. यहां का दिलकश नजारा लोगों को खूब भाता है. ऊंचाई से गिरता पानी व चट्टान की बनावट देखते ही बनती है.
नववर्ष के दिन कूड़ू, लोहरदगा, चंदवा, बालूमाथ, लातेहार, बारियातू समेत आसपास के लोग सपरिवार पिकनिक मनाने आते हैं. यह झरना हाइडल पावर प्रोजेक्ट के लिए प्रस्तावित है.
मां उग्रतारा मंदिर : नगर ग्राम स्थित मां उग्रतारा के प्राचीन मंदिर में नव वर्ष के दिन श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ता है. मान्यता है कि यहां लोगों की मन्नत पूरी होती है. माता के दर्शन के लिए यहां दूर-दूर से लोग आते हैं. टोरी रेलवे स्टेशन से नेताजी सुभाष चौक या श्रीराम चौक से छोटे वाहन द्वारा करीब 10 किमी की दूर तय कर यहां पहुंचा जा सकता है.
एनएच-99 स्थित बालूमाथ-चतरा मार्ग से भी बस व छोटे वाहन नगर मोड़ होते मंदिर पहुंचते हैं. इंदिरा चौक से मंदिर तक के लिए छोटे वाहन हर समय उपलब्ध है. मंदिर के उत्तर में नगर पहाड़ी है. जहां मदार साहब का मजार है.
नगर डैम : मां उग्रतारा मंदिर के पीछे नगर डैम है, जो चारों तरफ से पहाड़ी से घिरा है. लोग यहां भी पिकनिक मनाने आते हैं.
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