रेंज ऑफिसर केसी बोयपाई बरखास्त

Updated at : 22 Apr 2015 12:07 PM (IST)
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रेंज ऑफिसर केसी बोयपाई बरखास्त

लातेहार : सरकारी सेवा में रहते हुए अपने उच्चधिकारियों के आदेशों की अवहेलना एवं नेताओं, मीडियाकर्मियों से विभागीय गोपनीय मामले साझा करनेवाले वनों के क्षेत्र पदाधिकारी कृष्णचंद्र बोयपाई को वन एवं पर्यावरण मंत्रलय के प्रस्ताव पर राज्य की रघुवर दास सरकार ने सरकारी सेवा से बरखास्त कर दिया है. श्री बोयपाई राजकीय वन व्यापार निगम […]

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लातेहार : सरकारी सेवा में रहते हुए अपने उच्चधिकारियों के आदेशों की अवहेलना एवं नेताओं, मीडियाकर्मियों से विभागीय गोपनीय मामले साझा करनेवाले वनों के क्षेत्र पदाधिकारी कृष्णचंद्र बोयपाई को वन एवं पर्यावरण मंत्रलय के प्रस्ताव पर राज्य की रघुवर दास सरकार ने सरकारी सेवा से बरखास्त कर दिया है.

श्री बोयपाई राजकीय वन व्यापार निगम लातेहार में पदस्थापित थे. यहां उन पर वन प्रमंडल पदाधिकारी नागेंद्र बैठा के साथ बदसलूकी करने का आरोप है. बाद में श्री बैठा द्वारा लातेहार थाना में कांड संख्या 125/12 व 126/12 दर्ज करा कर श्री बोयपाई को सरकारी राशि गबन करने का आरोपी ठहराया था. मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कुमार दिनेश की अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर लातेहार पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा था.

श्री बोयपाई अपने पदस्थापन काल से ही उच्चधिकारियों की आदेशों की अवहेलना करते रहे हैं तथा उनके ऊपर कई बार विभागीय गोपनीय बातें लीक करने, नेताओं-मीडियाकर्मियों से गोपनीय दस्तावेज साझा करने का आरोप लग चुके हैं. लगभग आधा दर्जन विभागीय कार्रवाई चलाने के बाद उनमें कोई सुधार नहीं होने पर सरकार द्वारा बरखास्तगी की कार्रवाई की गयी है.

लातेहार में दर्ज हुआ था दो मामला
श्री बोयपाई पर तत्कालीन वन प्रमंडल पदाधिकारी नागेंद्र बैठा ने दो मामला लातेहार थाना कांड सं 125/12 तथा 126/12 दर्ज कराया था. अनुसंधान के क्रम में कांड संख्या 126/12 को पुलिस ने समानांतर पाया था. कांड संख्या 125/12 जिसका मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कुमार दिनेश की अदालत में जीआर वाद संख्या 581/12 के तहत विचारण हो रहा है. उक्त मामले में सूचक श्री बैठा ने श्री बोयपाई पर कुल चार लाख 72 हजार 174 रुपये गबन करने का आरोप लगाया था. मामले के अनुसार श्री बोयपाई को तत्कालीन वन प्रमंडल पदाधिकारी राजकीय वन व्यापार निगम-दो एलके टूटी ने पत्रंक 271, दिनांक 25.03.2011 द्वारा कुल आठ लाख सन्तावन हजार छह सौ रुपये का आवंटन किया था. जिसमें श्री बोयपाई ने बगैर काम कराये चार लाख 72 हजार 174 रुपये की निकासी कर ली थी. डीएफओ श्री बैठा द्वारा उक्त कांड दर्ज कराने के प्रतिरोध में श्री बोयपाई ने भी उनके खिलाफ गबन की दो प्राथमिकी दर्ज करने का आवेदन थाना प्रभारी लातेहार को दिया था, हालांकि बाद में अनुसंधान में पुलिस ने उसे बदले की कार्रवाई बता कर प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर दिया था. श्री बोयपाई द्वारा उक्त हरकत को श्री बैठा ने आड़े हाथों लिया था तथा सरकार को अवगत कराया था.
पूर्व के इन मामलों में हुई कार्रवाई
सारंडा राजकीय वन व्यापार प्रमंडल अंतर्गत जराईकेला वनों के क्षेत्र पदाधिकारी पद पर रहते हुए श्री बोयपाई ने 93,956 रुपये 57 पैसे का गलत वाउचर लगा कर अवैध निकासी की थी. चतरा वन प्रमंडल में रहते हुए 1,15,166.98 रुपये के अस्थायी गबन तथा वन रोपण कार्य में बगैर निकौनी किये 2,27,984 रुपये की निकासी करने का आरोप साबित हुआ था. इन आरोपों की पुष्टि उपरांत वन एवं पर्यावरण मंत्रलय ने श्री बोयपाई के पद पर बने रहने का औचित्य नहीं बताया था.
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