टोरी से रोज सैकड़ों टन कोयले की अवैध ढुलाई

Published at :12 Sep 2014 9:56 AM (IST)
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टोरी से रोज सैकड़ों टन कोयले की अवैध ढुलाई

बिना परिवहन चालान और राजस्व दिये बाहर भेजा जा रहा है कोयलालातेहार- गलत तरीके से रेलवे साइडिंग में डंप हो रहा है सिकनी व तेतरियाखांड़ का कोयला- झारखंड राज्य समानुदान नियमावली 2005 का हो रहा है उल्लंघनअवैध ढंग से हो रहा है भंडारण व परिवहन : डीएमओ प्रावधान का उल्लंघनझारखंड राज्य खनिज समानुदान नियमावली 2005 […]

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बिना परिवहन चालान और राजस्व दिये बाहर भेजा जा रहा है कोयलालातेहार- गलत तरीके से रेलवे साइडिंग में डंप हो रहा है सिकनी व तेतरियाखांड़ का कोयला- झारखंड राज्य समानुदान नियमावली 2005 का हो रहा है उल्लंघनअवैध ढंग से हो रहा है भंडारण व परिवहन : डीएमओ प्रावधान का उल्लंघनझारखंड राज्य खनिज समानुदान नियमावली 2005 के प्रावधानों के मुताबिक खदानों से माइनिंग के उपरांत परिवहन हेतु खनन विभाग लाइसेंस निर्गत करता है और परिवहन चालान के माध्यम से गंतव्य तक जाता है. लेकिन टोरी, खलारी, बरकाकाना व हटिया कोल साइडिंग पर बगैर परिवहन चालान व राजस्व की अदायगी के ही अन्य राज्यों तक कोयला भेजा जा रहा है.एक सप्ताह में दो करोड़ के कोयले की बिक्रीसिर्फ टोरी साइडिंग पर सप्ताह में दो रैक कोयला बड़े औद्योगिक घरानों को संप्रेषित किया जा रहा है. एक रैक में लगभग 3500 टन कोयला होता है, जिसका मूल्य एक करोड़ रुपये बताया जाता है.कार्रवाई करेंगे : खनन अधिकारीटोरी साइडिंग पर कोयला डंपिंग की माइनिंग लीज के संबंध में जिला खनन पदाधिकारी विशेश्वर राम का कहना है कि साइडिंग पर कोयले का भंडारण व परिवहन पूरी तरह नाजायज है. टोरी कोल साइडिंग का कोई माइनिंग लाइसेंस निर्गत नहीं है. वहां माफियाओं के द्वारा बड़ा खेल खेला जा रहा है. प्रभात खबर से मिली जानकारी के आधार पर वह शीघ्र कार्रवाई करेंगे.तसवीर-11 लेट-1-होता कोयला डंप).सुनील कुमार, लातेहारजिले के टोरी रेलवे स्टेशन के पास कोयला साइडिंग में अवैध ढंग से प्रतिदिन सैकड़ों टन कोयले का भंडारण किया जा रहा है. सिकनी व तेतरियाखांड़ का कोयला यहां डंप किया जा रहा है. बिना परिवहन चालान और राजस्व दिये रेलवे के माध्यम से राज्य के बाहर कोयला भेजा जा रहा है. इससे सरकार को भारी राजस्व घाटा हो रहा है. यह धंधा पिछले छह माह से रेलवे, पुलिस, प्रशासन व खनन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है. सूचना के मुताबिक, टोरी साइडिंग के अलावा खलारी, बरकाकाना व हटिया में भी बड़े पैमाने पर झारखंड का कोयला देश के मशहूर औद्योगिक इकाइयों को रेलवे के माध्यम से भेजा जा रहा है. प्रभात खबर ने उक्त साइडिंग के संबंध में जो जानकारियां हासिल की है, वह चौंकानेवाली है. सिकनी का कोयला बाहर भेजना मना हैकोयला कारोबारी की मदद से टोरी रेलवे स्टेशन के पास साइडिंग मंे प्रतिदिन सैकड़ों टन कोयला डंप किया जा रहा है. सिकनी की माइनिंग लीज की शर्तों में कोयले की इंटर स्टेट बिक्री पर प्रतिबंध है. यहां से उत्पादित कोयले का उपयोग राज्य के भीतर ही करना है. झारखंड की छोटी औद्योगिक इकाइयों में सिकनी का कोयला उपलब्ध कराना माइनिंग लीज की शर्तों में शामिल है. लेकिन पिछले एक पखवारे से सिकनी से उत्पादित कोयला प्रतिदिन लगभग दो सौ ट्रक टोरी साइडिंग से बड़े औद्योगिक संस्थानों में भेजा जा रहा है. जांच करेंगे : डीआरएमधनबाद रेल मंडल के डीआरएम बीबी सिंह का इस संबंध मंे कहना है कि साइडिंग पर से परिवहन की जवाबदेही मुख्य वाणिज्य प्रबंधक का है. फिर भी उन्हें जानकारी मिली है, तो वे इसकी जांच करेंगे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी.

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