झुमरीतिलैया में कबाड़ के अवैध कारोबार का बढ़ा दायरा, बिना सत्यापन खरीदी जा रहीं चोरी की बाइक, साइकिल व सोलर प्लेट
बिना लाइसेंस धड़ल्ले से चल रहा कबाड़ का कारोबार | Prabhat Khabar Network
झुमरीतिलैया में कबाड़ का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है. करोड़ों के लेन-देन पर सवाल, चोरी की बाइक, सोलर प्लेट खपाने की आशंका.
झुमरीतिलैया से सुजल भदानी की रिपोर्ट
झुमरीतिलैया(कोडरमा). जिले में कबाड़ का कारोबार तेजी से फैल रहा है. अकेले तिलैया क्षेत्र में बड़ी संख्या में कबाड़ी की दुकानें संचालित हो रही हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि इनमें से कई दुकानें बिना स्पष्ट लाइसेंस और प्रशासनिक अनुमति के चल रही हैं.
कारोबार का दायरा इतना बड़ा है कि इससे सालाना करोड़ों रुपये के लेन-देन की बात कही जा रही है. इसके बावजूद इस व्यवसाय की नियमित निगरानी और कबाड़ की खरीद-बिक्री के सत्यापन को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
बिना पहचान और स्रोत सत्यापन के खरीदा जा रहा सामान
स्थानीय लोगों के अनुसार कबाड़ कारोबारियों द्वारा पुराने लोहे, घरेलू सामान, साइकिल, बाइक के पार्ट्स, बैटरी, सोलर प्लेट सहित अन्य सामान खरीदे जाते हैं. आरोप है कि कई मामलों में सामान बेचने वाले व्यक्ति की पहचान और सामान के स्रोत का पर्याप्त सत्यापन नहीं किया जाता.
इससे चोरी के सामान की खपत का रास्ता आसान होने की आशंका जतायी जा रही है. शहर और आसपास के इलाकों में लगातार नई कबाड़ी दुकानें खुल रही हैं. कारोबारियों की बढ़ती संख्या के बावजूद पुलिस और प्रशासन की ओर से नियमित जांच की व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह सवाल चर्चा का विषय है.
चोरी की बाइक व साइकिल के पुर्जे अलग कर कबाड़ियों के यहां खपाने की आशंका
क्षेत्र में समय-समय पर साइकिल, बाइक, बैटरी और सोलर प्लेट चोरी की घटनाएं सामने आती रहती हैं. सार्वजनिक स्थानों से साइकिल और बाइक चोरी होने की शिकायतें भी मिलती हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि चोरी की गयी बाइक या साइकिल को सीधे बेचने के बजाय उसके पुर्जे अलग कर विभिन्न कबाड़ियों के माध्यम से खपाये जाने की आशंका रहती है.
ऐसे में चोरी के मामलों की जांच के दौरान कबाड़ी दुकानों में खरीदे गये सामान का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकता है. हालांकि, पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है. पुलिस के स्तर से कबाड़ियों के खरीद रजिस्टर, सामान के स्रोत और विक्रेताओं की पहचान की नियमित जांच की जरूरत बतायी जा रही है.
ये भी पढ़ें: पारा शिक्षकों की तीसरी आकलन परीक्षा का रास्ता साफ, 25 सितंबर से ऑनलाइन आवेदन; पास होते ही मानदेय में 10% बढ़ोतरी
स्टॉक रजिस्टर की नियमित जांच और संदिग्ध सामान पर सवाल
स्थानीय कारोबारियों के अनुसार कबाड़ के कारोबार में खरीदे और बेचे गये सामान का हिसाब स्टॉक रजिस्टर में दर्ज किया जाता है. लेकिन सवाल यह है कि रजिस्टर में दर्ज जानकारी की नियमित जांच कौन करता है और चोरी के सामान की पहचान के लिए क्या व्यवस्था है. यदि किसी कबाड़ी के पास बिना पहचान या संदिग्ध स्रोत से सामान पहुंचता है, तो उसकी जांच की प्रक्रिया भी स्पष्ट होनी चाहिए.
लोगों का कहना है कि कबाड़ी कारोबार के लिए स्पष्ट नियमों के साथ नियमित निरीक्षण, खरीदे गये सामान का विवरण, विक्रेता की पहचान और संदिग्ध सामान की तत्काल सूचना पुलिस को देने की व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए.
बाल श्रम की शिकायत: जोखिम भरे काम में लगाए जा रहे बच्चे
कबाड़ के कारोबार में कम उम्र के बच्चों को काम पर लगाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि कबाड़ बीनने और छंटाई जैसे कामों में बच्चों को लगाया जाता है. इससे न केवल बाल श्रम कानून के उल्लंघन का सवाल उठता है, बल्कि जोखिम भरे माहौल में काम करने वाले बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंता है. प्रशासन और श्रम विभाग द्वारा ऐसे स्थानों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है.
ये भी पढ़ें: मिड-डे-मिल के लिए झारखंड को मिले 302.13 करोड़ रुपये, जानें किन जिलों को मिला सबसे ज्यादा आवंटन
पुलिस की ढुलमुल कार्रवाई और कबाड़ियों के नियमित निरीक्षण की मांग
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कबाड़ी दुकानों की नियमित जांच नहीं होने से कारोबारियों में कार्रवाई का भय कम है. कभी-कभार पुलिस की ओर से कार्रवाई की जाती है, लेकिन इसके बाद स्थिति फिर सामान्य हो जाती है. लोगों का कहना है कि चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सिर्फ चोरी की घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय कबाड़ खरीदने वाले प्रतिष्ठानों की नियमित जांच जरूरी है.
खासकर साइकिल, बाइक, बैटरी, सोलर प्लेट और लोहे के सामान की चोरी के मामलों में आसपास के कबाड़ियों से पूछताछ और उनके स्टॉक का मिलान किया जा सकता है. इससे चोरी के सामान की खरीद-बिक्री के नेटवर्क का पता लगाने में मदद मिल सकती है.
संयुक्त टीम बनाकर सत्यापन और रिकॉर्ड जांच की आवश्यकता
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कबाड़ कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाने की जरूरत नहीं है, लेकिन कारोबार को नियमों के दायरे में लाना जरूरी है. प्रत्येक दुकान का सत्यापन, संचालक की पहचान, दुकान और गोदाम का विवरण, खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड, सामान बेचने वाले व्यक्ति की पहचान तथा संदिग्ध सामान मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना देने की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होनी चाहिए.
इसके अलावा प्रशासन, पुलिस, नगर निकाय और श्रम विभाग की संयुक्त टीम बनाकर कबाड़ी दुकानों की जांच की जाये, तो स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है. इससे वैध कारोबार करने वाले कबाड़ियों और चोरी के सामान की खरीद-बिक्री में संलिप्त लोगों के बीच भी अंतर स्पष्ट किया जा सकेगा.
ये भी पढ़ें: कांके के खिजूरटोली उर्दू विद्यालय में CCL का जागरूकता अभियान, पौधारोपण के साथ बच्चों को दिलाई गई शपथ
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए