पहल: जिले में प्रस्तावित 2500 एकड़ भूमि का मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने लिया जायजा,कहा कोडरमा में उद्योग की काफी संभावना

Updated at : 05 Oct 2017 1:03 PM (IST)
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पहल: जिले में प्रस्तावित 2500 एकड़ भूमि का मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने लिया जायजा,कहा कोडरमा में उद्योग की काफी संभावना

कोडरमा: राज्य की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा बुधवार को दौरे पर कोडरमा पहुंची. यहां उन्होंने तिलैया के गझंडी-जरगा रोड के दोनों तरफ इंडस्ट्रियल प्वाइंट के लिए प्रस्तावित जमीन (करीब 2500 एकड़) का निरीक्षण किया. निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्य सचिव ने कहा कि कोडरमा में उद्योग की काफी संभावना है. उन्हीं संभावनाओं […]

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कोडरमा: राज्य की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा बुधवार को दौरे पर कोडरमा पहुंची. यहां उन्होंने तिलैया के गझंडी-जरगा रोड के दोनों तरफ इंडस्ट्रियल प्वाइंट के लिए प्रस्तावित जमीन (करीब 2500 एकड़) का निरीक्षण किया. निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्य सचिव ने कहा कि कोडरमा में उद्योग की काफी संभावना है. उन्हीं संभावनाओं की हम तलाश कर रहे हैं. कोडरमा से होकर ही रेलवे की महत्वपूर्ण परियोजना डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर गुजरेगी. ऐसे में यहां अच्छा इंडस्ट्रियल टाउनशिप विकसित होने की पूरी संभावना है. इसी के मद्देनजर जमीन का जायजा लिया गया है.
मुख्य सचिव ने कहा कि कोडरमा के विकास के लिए उद्योग व निवेश की क्या भूमिका हो सकती है, इस पर योजना बनायी जा रही है. निवेश व उद्योग के लिए भूमि की आवश्यकता होती है. सरकार की पहली प्राथमिकता सरकारी भूमि है. यह ध्यान रखा जा रहा है कि कोई भी वस्थिापित न हो, उसी दृष्टिकोण से भूमि का सर्वेक्षण किया गया है.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मोमेंटम झारखंड का रिजल्ट उत्साहित करनेवाला रहा है. 210 एमओयू में 100 से अधिक एमओयू का शिलान्यास किया जा चुका है. शीघ्र ही 70 से 80 उद्योगों का भूमिपूजन मुख्यमंत्री द्वारा किया जायेगा. मुख्य सचिव के साथ रांची से उद्योग निदेशक के रवि कुमार, राजस्व व भूमि सुधार विभाग के निदेशक के श्रीनिवासन भी पहुंचे थे. इनके अलावा उपायुक्त संजीव कुमार बेसरा, पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र कुमार झा, सीएफ सह डीएफओ एमके सिंह, उप विकास आयुक्त आदित्य कुमार आनंद, एसी प्रवीण कुमार गागराइ, एसडीओ प्रभात कुमार बरदियार, डीसीएलआर लियाकत अली, एसडीपीओ अनिल शंकर, सीओ अशोक राम, बीडीओ मिथिलेश कुमार चौधरी, थाना प्रभारी कामेश्वर ठाकुर, पीसीआर इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह व अन्य पदाधिकारी मौजूद थे.
हेलीकॉप्टर से सरायकेला के लिए हुई रवाना
मुख्य सचिव राजबाला वर्मा सुबह करीब 8:45 बजे हेलीकॉप्टर से कोडरमा स्थित बागीटांड स्टेडियम पहुंचीं. यहां डीसी संजीव कुमार बेसरा व अन्य अधिकारियों ने उनका स्वागत किया. परिसदन में गार्ड ऑफ ऑनर लेने के बाद मुख्य सचिव का काफिला जमीन निरीक्षण के लिए सड़क मार्ग से रवाना हुआ. मुख्य सचिव ने तिलैया मौजा में जमीन के अंतिम छोर पर करीब पांच मिनट रुकी और यहां से सीधे बागीटांड के लिए रवाना हो गयी. करीब 10:10 बजे वह हेलीकॉप्टर से ही सरायकेला के लिए रवाना हो गयी. बताया जाता है कि सरायकेला में भी मुख्य सचिव के द्वारा इंडस्ट्रियल क्षेत्र के विकास को लेकर जमीन का निरीक्षण किया जाना है. इससे पहले मुख्य सचिव के कोडरमा आगमन को लेकर पदाधिकारी व्यस्त दिखे. वहीं पूरे सड़क मार्ग में जगह-जगह पर पुलिस फोर्स की तैनाती सुरक्षा के दृष्टिकोण से की गयी थी.
मुख्य सचिव से मुखिया ने की सड़क निर्माण की मांग
जमीन का निरीक्षण करने पहुंची मुख्य सचिव के समक्ष जरगा की मुखिया शीला देवी ने सड़क निर्माण की मांग रखी. मुख्य सचिव ने मुखिया से गांव की समस्याओं को लेकर बातचीत की. मुख्य सचिव ने मुखिया को गांव के विकास के लिए काम करने को कहा. साथ ही शीघ्र सड़क निर्माण का आश्वासन दिया. डीसी के अनुसार रैयती जमीन पड़ने के कारण कुछ दूर तक सड़क का निर्माण नहीं हो पा रहा है.
पूर्व डीसी के रवि कुमार ने भेजा था प्रस्ताव
जिले के तिलैया व देवीपुर मौजा में इंडस्ट्रियल प्वाइंट की संभावना को देखते हुए पूर्व डीसी के रवि कुमार ने सरकार को प्रस्ताव भेजा था. वर्ष 2014 में उन्होंने इस संबंध में एक प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजते हुए यहां उद्योग के लिहाज से उपयुक्त जगह बतायी थी. इस प्रस्ताव में तिलैया मौजा की करीब 2500 एकड़ जमीन व देवीपुर मरकच्चो मौजा की करीब 1000 एकड़ जमीन शामिल है. इस प्रस्ताव को इस बात से और बल मिला है कि कोडरमा से रेलवे की महत्वपूर्ण परियोजना डेडिकेटेड फ्रेट काॅरिडोर गुजरेगी. रेलवे पश्चिम बंगाल के दानकुनी से पंजाब के लुधियाना तक मालवाहक ट्रेनों के परिचालन को लेकर अलग लाइन बना रहा है, जबकि दोनों जमीन एनएच के किनारे व नजदीक में स्थित है. ऐसे में यहां इंडस्ट्रियल प्वाइंट के लिहाज से सरकार को काफी संभावनाएं दिख रही है. हालांकि, पूरी परियोजना में सबसे बड़ी बाधा प्रस्तावित जमीन का नोटिफाइड फॉरेस्ट लैंड होने का है. जानकारी के अनुसार तिलैया मौजा में चिह्नित करीब 2500 एकड़ जमीन पूरी तरह से सुरक्षित वन भूमि है. माइनर सर्वे 1964-65 में इसे वन विभाग ने सुरक्षित वन भूमि माना है. ऐसे में भूमि का वन विभाग से हस्तांतरण करवाना एक बड़ा पेच हो सकता है.
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