11वीं-13वीं JPSC और FSO भर्ती पर सरकार के फैसले पर HC की रोक का क्या है मतलब?
झारखंड में 22 भर्ती परीक्षाओं और प्रक्रियाओं को रद्द करने के हेमंत सोरेन सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक के बाद नियुक्त कर्मचारियों को फिलहाल राहत मिली है. जानिए JPSC-JSSC भर्ती विवाद में आगे क्या होगा
झारखंड में सरकारी नौकरी की भर्ती को लेकर चल रहा विवाद अब हाईकोर्ट पहुंच गया है. सरकार ने कथित गड़बड़ियों के चलते कई भर्ती परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला लिया था. इनमें कुछ ऐसी भर्तियां भी शामिल थीं, जिनमें उम्मीदवारों की नियुक्ति हो चुकी थी और वे सरकारी नौकरी कर रहे थे.
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अब 20 अगस्त को झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा और इन परीक्षाओं के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है. इससे नौकरी कर रहे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है. लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि उनकी नौकरी हमेशा के लिए सुरक्षित हो गई है. मामला अभी अदालत में है और अंतिम फैसला बाद में आएगा.
पहले समझिए सरकार ने क्या फैसला लिया था
- 18 अगस्त को झारखंड सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला लिया था.
- इसके अलावा सरकार ने 6 भर्ती प्रक्रियाओं को जांच पूरी होने तक रोक दिया और 17 पुरानी JPSC भर्तियों की जांच CID को सौंप दी गई.
- इस तरह कुल 45 भर्ती प्रक्रिया सरकार के इस फैसले से प्रभावित हुईं.
- सरकार ने यह कदम भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच उठाया.
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जिनकी नौकरी लग चुकी है, उनका क्या होगा?
सरकार के फैसले की सबसे बड़ी पेचीदगी यह थी कि कुछ परीक्षाएं सिर्फ परीक्षा या परिणाम के स्तर पर नहीं थीं, बल्कि उनके जरिए नियुक्तियां भी हो चुकी थीं.
- आसान भाषा में कहें तो कई परीक्षाओं का रिजल्ट आ गया था तो कई परीक्षा के रिजल्ट के आधार पर उम्मीदवारों की नौकरी भी लग चुकी थी.
- उदाहरण के लिए 11वीं से 13वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के जरिए 342 पदों पर नियुक्तियां हुई थीं.
- इसी तरह JSSC-CGL के जरिए करीब 1,932 उम्मीदवारों की नियुक्ति हो चुकी थी.
- इसके अलावा बाल विकास परियोजना पदाधिकारी और खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी जैसी कुछ दूसरी भर्ती में नियुक्ति अपने अंतिम चरण तक पहुंच चुकी थीं.
- ऐसे में अगर पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द होती, तो इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ता जिन्होंने परीक्षा पास की, चयन पाया और नौकरी जॉइन कर ली.
अब समझिए 20 अगस्त को हाईकोर्ट ने क्या कहा?
- 20 अगस्त को झारखंड हाईकोर्ट ने अपने फैसले में 11वीं-13वीं JPSC परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSO) भर्ती को रद्द करने के सरकार के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी.
- इसके साथ ही इन परीक्षाओं के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने वाली अधिसूचनाओं के अमल पर भी रोक लगा दी गई.
- मामले में अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है. इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी.
- आसान भाषा में इसका मतलब है कि अभी सरकार सिर्फ अपने रद्दीकरण आदेश के आधार पर इन कर्मचारियों की नौकरी खत्म नहीं कर सकती.
यहां एक जरूरी बात ये है कि हाईकोर्ट ने अभी यह अंतिम फैसला नहीं दिया है कि सरकार का रद्दीकरण पूरी तरह गलत है या भर्ती प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी हुई ही नहीं थी.
तो अब किसी की नौकरी नहीं जाएगी ?
नहीं, अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा. हाईकोर्ट का आदेश फिलहाल एक अंतरिम राहत है.
- यानी जिन कर्मचारियों की नौकरी पर सरकार के फैसले से खतरा पैदा हुआ था, उनमें फिलहाल सिर्फ JPSC 11वीं-13वीं और FSO भर्ती से जुड़े कर्मचारियों पर ही यह कार्रवाई रुकी है. वे तत्काल तौर पर राहत में हैं. बाकी भर्तियों (जैसे JSSC-CGL, CDPO) से जुड़े कर्मचारियों की याचिकाओं पर अभी सुनवाई होनी बाकी है.
- लेकिन भर्ती प्रक्रिया की वैधता को लेकर विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है. आगे अदालत में सरकार की दलील, जांच में सामने आए तथ्य और प्रभावित कर्मचारियों की बात सुनेगी. इसके बाद ही इस मामले पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.
- इसलिए इसे नौकरी हमेशा के लिए बच गई कहना सही नहीं होगा. इससे ज्यादा सही बात यह है कि फिलहाल नौकरी खत्म करने की कार्रवाई पर रोक लग गई है.
सरकार के फैसले का क्यों विरोध कर रहे नियुक्त कर्मचारी ?
नियुक्त कर्मचारियों का कहना है अगर भर्ती प्रक्रिया में किसी अधिकारी, एजेंसी या किसी दूसरे व्यक्ति ने गड़बड़ी की है, तो उसकी सजा उन उम्मीदवारों को क्यों मिले जिन्होंने नियम के मुताबिक परीक्षा दी और मेहनत से नौकरी हासिल किया?
- यानी अगर कोई उम्मीदवार खुद किसी गड़बड़ी में शामिल नहीं है, तो सिर्फ भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितता की वजह से उसकी नौकरी छीनना कितना सही है. यह बड़ा कानूनी सवाल है.
- इसी मुद्दे को लेकर कोर्ट में सरकार के फैसले को चुनौती दी गई थी. याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि संबंधित कर्मचारियों को पर्याप्त मौका दिए बिना उनकी नियुक्ति रद्द करना उचित नहीं है.
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से फिलहाल इसी तरह की दलीलों को राहत मिली है.
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यह पूरा विवाद शुरू कैसे हुआ?
- इस विवाद की शुरुआत 14वीं झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट को लेकर उठे सवालों से तेज हुई.
- कुछ अभ्यर्थियों ने रिजल्ट, श्रेणीवार कटऑफ और मूल्यांकन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए. इसके बाद सोशल मीडिया पर एक कथित ओएमआर शीट सामने आई. हालांकि, उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई थी.
- मामला बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने इसकी जांच सीआईडी को सौंप दी. इसके बाद एक विशेष जांच दल(SIT) बनाया गया और जांच का दायरा परीक्षा कराने वाली एजेंसी तक भी पहुंचा.
- धीरे-धीरे विवाद सिर्फ 14 वीं जेपीएससी परीक्षा तक सीमित नहीं रहा. दूसरी भर्ती परीक्षाएं और प्रक्रियाएं भी जांच के दायरे में आने लगीं.
- इसके बाद छात्रों का आंदोलन करीब 26 दिनों तक चला. आंदोलन और जांच के बीच सरकार ने कई भर्ती परीक्षाओं और प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला लिया.
अब आगे क्या होगा?
अब इस मामले में तीन बातें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होंगी.
राज्य सरकार को अब अदालत के सामने यह बताना होगा कि उसने भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला किन तथ्यों और जांच के आधार पर लिया.
अदालत यह भी देख सकती है कि अगर भर्ती में अनियमितता हुई है तो वह कितनी गंभीर थी और उसका असर पूरी परीक्षा और चयन प्रक्रिया पर कितना पड़ा.
अगर कुछ गड़बड़ी साबित होती है, तो एक बड़ा सवाल यह भी होगा कि उन उम्मीदवारों के साथ क्या किया जाए जो किसी गड़बड़ी में शामिल नहीं थे.क्या पूरी भर्ती रद्द कर दी जाए या सिर्फ दोषी लोगों पर कार्रवाई करके ईमानदारी से चयनित उम्मीदवारों को राहत दी जाए.
नौकरी अभी बची है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ
कुल मिलाकर, 20 अगस्त के हाईकोर्ट के आदेश से फिलहाल उन कर्मचारियों को राहत मिली है, जिनकी नौकरी भर्ती रद्द होने से खतरे में थी. अभी उनकी नियुक्ति सिर्फ सरकार के रद्दीकरण आदेश के आधार पर खत्म नहीं की जा सकती.
हालांकि, यह अंतिम फैसला नहीं है. अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी. तब अदालत तय करेगी कि कथित गड़बड़ी के कारण पूरी भर्ती रद्द होनी चाहिए या निर्दोष उम्मीदवारों को नौकरी में रखा जा सकता है. फिलहाल इतना साफ है कि नौकरी पर तत्काल खतरा टल गया है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है.
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लेखक के बारे में
By गौतम कुमार
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