मांझी परगना सरदार महासभा ने दिया धरना, बोले सुनील बास्की प्रतिनिधि, नारायणपुर. मांझी परगना सरदार महासभा की ओर से शुक्रवार को प्रखंड कार्यालय परिसर में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया. अध्यक्षता प्रखंड अध्यक्ष सज्जन कुमार मुर्मू ने की, संचालन प्रखंड सचिव संजीत हेम्ब्रम ने किया. बतौर मुख्य अतिथि महासभा के संरक्षक सुनील कुमार बास्की, विशिष्ट अतिथि जिलाध्यक्ष सुनील कुमार हांसदा, समाजसेवी सर्जन हांसदा , नाजिर सोरेन उपस्थित थे. संरक्षक सुनील कुमार बास्की ने कहा कि संताल हूल 1855 के बाद अंग्रेजों ने हूल का महत्व समझा और संताल परगना को एक देश के रूप में संताल और पहाड़िया के लिए अलग से नामकरण किया. इसके बाद संताल परगना के लिए कई कानून बने. उसमें से संताल सिविल रूल्स 1946 , संताल परगना जस्टिस रेग्युलेशन 1893 की व्यवहारिकता एवं प्रासंगिकता पर सरकार समीक्षा कर रही है. कहा, जिला से अपर समाहर्ता के द्वारा प्रमंडलीय आयुक्त को जो रिपोर्ट दी गयी है, बड़ा चिंतनीय है. अंदेशा है कि सरकार इन दोनों कानून से छेड़छाड़ कर रही है. वहीं, जिलाध्यक्ष ने कहा कि सरकार के पदाधिकारी राजस्व ग्राम प्रधान और मांझी का फर्क समझ नहीं पा रहे हैं, जो बड़ा दुर्भाग्य है. ग्राम प्रधान को ही मांझी समझ बैठा है. पेसा कानून से संबंधित मांझी को ही प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए. कहा आज मांझी के जगह अन्य लोगों को तरजीह दिया जा रहा है, जिसका हम कड़ा विरोध कर रहे हैं. सरकार जो स्वशासन के पदाधिरियों मांझी, जोगमांझी, नाईकी, कुडाम नाईकी, प्राणिक, गोडित के लिए सम्मान राशि देने के लिए पारित की है उसे भी 90 प्रतिशत लोगों को नहीं मिल रहा है. बाकी पद धारियों सुसारिया, जोगप्राणिक, भद्दो, लासेरसाल के लिए भी सम्मान राशि स्वीकृति दें. धरना को समाजसेवी सर्जन हांसदा, मांझी तारकेश्वर मुर्मु, नाजिर सोरेन एवं रायसेन मरांडी ने भी संबोधित किया. वहीं धरना के बाद राज्यपाल के नाम बीडीओ को ज्ञापन सौंपा. मौके पर जोगमांझी केशर टुडू, नाईकी आनंद हेम्ब्रम, मांझी कालीचरण हांसदा, मांझी कृष्णा मुर्मू, मांझी उपेन्द्र मुर्मू, मांझी सदानंद मुर्मु, हीरालाल मुर्मू आदि थे.
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