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केंद्र की जनविरोधी नीतियों का विरोध करे जनता : सुरजीत सिन्हा

Updated at : 26 Nov 2025 7:44 PM (IST)
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केंद्र की जनविरोधी नीतियों का विरोध करे जनता : सुरजीत सिन्हा

जामताड़ा. संयुक्त किसान मोर्चा एवं केंद्रीय ट्रेड यूनियन की ओर से अनुमंडल कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया गया.

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संयुक्त किसान मोर्चा एवं केंद्रीय ट्रेड यूनियन ने दिया धरना संवाददाता, जामताड़ा. संयुक्त किसान मोर्चा एवं केंद्रीय ट्रेड यूनियन की ओर से अनुमंडल कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया गया. इस अवसर पर मुख्य वक्ता किसान सभा के महासचिव सुरजीत सिन्हा ने केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों की आलोचना की. कहा कि देश आज गुलामी के कगार पर है. हिंदुत्व-कॉर्पोरेट गठजोड़ के द्वारा जनता को भ्रमित कर हिंदु-मुस्लिम में बांट कर उन पर शोषण का फंदा कसा जा रहा है, जो कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. केंद्र सरकार देश की संपत्तियों को कॉर्पोरेट के हवाले करने के लिए नयी नीतियां बना रही है, जिससे आने वाले दिनों में मेहनत कश जनता का जीना मुश्किल होगा. उन्होंने कहा कि सरकार की दमनकारी नीतियों का विरोध करने के लिए जनता को गोलबंद होना ही पड़ेगा, अन्यथा देश बर्बाद हो जायेगा. कहा, दिल्ली की सीमाओं पर आज ही के दिन 2020 को किसान संघर्ष शुरू किया गया था, जिसे विभिन्न ट्रेड यूनियनों का पूरा समर्थन प्राप्त था. 26 नवंबर 2025 को इस संघर्ष का 5 वर्ष पूरे होने जा रहा है. 736 किसानों के बलिदान और 380 दिन तक लगातार चले लंबे संघर्ष में भाजपा नीत एनडीए सरकार को कॉर्पोरेट परस्त जन विरोधी तीनों कृषि कानून को वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था. सरकार के लिखित समझौते के साथ आंदोलन स्थगित किया गया था, लेकिन 5 साल बीत जाने के बाद भी सरकार अभी-अभी एक समिति गठित की है. वहीं सचिव सुजीत माजी, मजदूर नेता चंडी दास पुरी, सुशांत राय, मोहन मंडल, अशोक भंडारी, लखी सोरेन, लखीराम मुर्मू आदि ने धरना को संबोधित किया. धरना प्रदर्शन की अध्यक्षता सचिन राणा ने की. मौके पर मोहन, दुबराज भंडारी, अशोक भंडारी, परिमल टुडू, मैना सिंह, सोना मनी, रंजन किस्कू आदि थे. ये है मुख्य मांगें. गारंटी शुदा खरीद के साथ सी-2 (50%) पर एमएसपी के लिए तुरंत कानून बनाये, किसानों एवं खेत मजदूर के लिए व्यापक कृषि ऋण माफी योजना घोषित करे, माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं की ब्याज दर विनियमित कर कर्जदारों का उत्पीड़न समाप्त करने के लिए कानून बनाये. बिजली सहित सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण नहीं हो, स्मार्ट मीटर लगाना बंद करे. बिजली विधेयक 2025 निरस्त कर सभी घरों को प्रतिमाह 300 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाय, अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरीफ लगाने को भारत की संप्रभुता का उल्लंघन मानकर सख्त पारस्परिक कार्रवाई करे, डेयरी क्षेत्र में एफटीए न हो, कपास पर 11 % आयात शुल्क और खत्म करने वाली अधिसूचना निरस्त करे, बिजली विधेयक 2025 का मसौदा वापस लेने आदि मांगें शामिल है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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UMESH KUMAR

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