चिकित्सक की कमी का दंश झेल रहा जामताड़ा जिला योजनाएं हो रही प्रभावित
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :23 Dec 2016 4:45 AM (IST)
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14 वर्ष हो गये, लेकिन लोगों को आज भी स्वास्थ्य सुविधा मयस्सर नहीं जामताड़ा : स्वास्थ्य- सेवा बुनियादी सेवाओं में से एक है. मानव जीवन में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली तथा सड़क की बहुत ही आवश्यकता होती है. इनमें से सबसे जरुरी स्वास्थ्य सुविधा होती है. स्वास्थ्य सुविधा के बीना जीवन का कोई एहमियत नहीं होता. […]
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14 वर्ष हो गये, लेकिन लोगों को आज भी स्वास्थ्य सुविधा मयस्सर नहीं
जामताड़ा : स्वास्थ्य- सेवा बुनियादी सेवाओं में से एक है. मानव जीवन में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली तथा सड़क की बहुत ही आवश्यकता होती है. इनमें से सबसे जरुरी स्वास्थ्य सुविधा होती है. स्वास्थ्य सुविधा के बीना जीवन का कोई एहमियत नहीं होता. बिडंबना है कि जामताड़ा जिला बने 14 वर्ष हो गये, लेकिन लोगों को आज भी स्वास्थ्य सुविधा मयस्सर नहीं हो पायी है. जिला के लोग आज भी दूसरे राज्य में स्वास्थ्य-सुविधा का लाभ लेने के लिए पलायण कर रहे हैं. कई वर्षों के बाद राज्य में एक स्थिर सरकार बनी है, फिर भी परिणाम ढाक के तीन पात ही नजर आ रहा है.
जिला में 89 स्वीकृत पद के विरुद्ध 30 हैं कार्यरत
बता दें कि जामताड़ा जिला में चिकित्सकों का कुल स्वीकृत पद 89 है, जिसमें से मात्र 30 ही चिकित्सक कार्यरत हंै. 30 चिकित्सकों में चार से पांच चिकित्सक प्रशासनिक कार्य में रहते हैं. जिला में कुल चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 15 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा 130 स्वास्थ्य उपकेंद्र है. जानकारी के अनुसार एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 10 से 12 चिकित्सकों का पद होता है. लेकिन बिडंबना ही कहा जा सकता है कि एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कहीं- कहीं एक या दो ही चिकित्सक पदस्थापित है.जब प्रखंड स्तर में स्वास्थ्य का ये आलम है तो ग्रामीण स्तर में पीएचसी और स्वास्थ्य उपकेंद्र के लोगों को क्या हाल होता होगा.
टीकाकरण भी हो रहा प्रभावित
बच्चों को समय पर टीकारण हो रहा है या नहीं इस कार्य में भी चिकित्सक के अभाव में मॉनिटारिंग का कार्य नहीं हो पा रहा है. गर्भवती को प्रसव पूर्व एवं प्रसव के बाद भी जांच नहीं हो पाती है. प्रसव पूर्व जांच के लक्ष्य पर भी असर देखा जा रहा है.
दस चिकित्सकों में दो ने किया योगदान: वर्तमान में जामताड़ा सदर अस्पताल में दस चिकित्सक पदस्थापना की गयी, लेकिन दो ही चिकित्सक ने योगदान दिया. योगदान के बाद से एक चिकित्सक तो आजतक नहीं आये.
क्या कहते हैं सीएस
सिविल सर्जन डॉ मार्शल आइंद ने कहा कि चिकित्सक की घोर कमी है, जिसके कारण विभाग की योजनाओं पर भी प्रभाव पड़ रहा है.
परिवार नियोजन शिथिल
चिकित्सक के अभाव में परिवार नियोजन के जो लक्ष्य है, उन लक्ष्य से विभाग काफी दूर नजर आ रही है. जिला में अभीतक परिवार नियोजन के लक्ष्य के विरुद्ध मात्र दस फीसदी तक ही पहुंच पाया है.
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