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Jamshedpur News : कोयला उत्पादक राज्य में बिजली उत्पादन लागत में आयी बढ़ोत्तरी, 12 कंपनियों ने दर बढ़ाने का दिया प्रस्ताव

कोयला उत्पादन के लिए देशभर में पहचान रखने वाले झारखंड में बिजली उपभोक्ताओं को एक और झटका लग सकता है. राज्य में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और सप्लाई से जुड़ी 12 कंपनियों ने बिजली दर बढ़ाने का प्रस्ताव दे दिया है.

12 बिजली कंपनियों ने जेएसइआरसी में दायर की दर बढ़ोतरी की याचिकाएं

जमशेदपुर और सरायकेला क्षेत्र में 90% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव

कोयले की बढ़ती कीमत और उत्पादन लागत को बताया मुख्य कारण

Jamshedpur (Brajesh Singh) :

कोयला उत्पादन के लिए देशभर में पहचान रखने वाले झारखंड में बिजली उपभोक्ताओं को एक और झटका लग सकता है. राज्य में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और सप्लाई से जुड़ी 12 कंपनियों ने बिजली दर बढ़ाने का प्रस्ताव दे दिया है. इन कंपनियों ने अलग-अलग तारीखों में झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (जेएसइआरसी) के पास टैरिफ बढ़ोतरी को लेकर याचिकाएं दाखिल की हैं, जिन पर आयोग द्वारा सुनवाई की जा रही है.

दर बढ़ाने का प्रस्ताव देने वाली कंपनियों में झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड, दामोदर वैली कॉरपोरेशन (डीवीसी), इनलैंड पावर लिमिटेड, झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड, आधुनिक पावर एंड नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड, टाटा पावर कंपनी लिमिटेड, टाटा स्टील लिमिटेड, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल), टाटा स्टील यूटिलिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज लिमिटेड (टाटा स्टील यूआईएसएल), झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड, तेनुघाट विद्युत निगम लिमिटेड और स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर शामिल हैं.

जमशेदपुर में बिजली सप्लाई करने वाली टाटा स्टील और सरायकेला-खरसावां जिले में बिजली देने वाली टाटा स्टील यूआईएसएल ने सभी उपभोक्ता श्रेणियों के लिए करीब 90 प्रतिशत तक बिजली दर बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है. वहीं टाटा स्टील को बिजली सप्लाई करने वाली टाटा पावर कंपनी लिमिटेड ने भी लगभग 50 प्रतिशत तक दर बढ़ाने की मांग की है. सरायकेला समेत अन्य जिलों में संचालित आधुनिक पावर एंड नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड ने भी बिजली उत्पादन और सप्लाई के रेट में 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है. इसी बीच झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) ने वित्तीय वर्ष 2030-31 तक के लिए अपना लंबी अवधि का बिजनेस प्लान तैयार कर जेएसइआरसी को सौंपा है. निगम के मुताबिक 2030-31 में उसे 18,363.19 करोड़ रुपये के राजस्व की जरूरत होगी, जबकि उसी अवधि में बिजली खरीद पर करीब 14,104.21 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. यह योजना सीधे तौर पर राज्य के लाखों घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्रभावित कर सकती है.

सभी टैरिफ याचिकाओं में कंपनियों की दलील लगभग एक जैसी है. कंपनियों का कहना है कि कोयले की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, आपूर्ति में दिक्कतें हैं और बिजली उत्पादन की लागत तेजी से बढ़ी है. इसके कारण मुनाफा घट रहा है और मौजूदा दरों पर बिजली उत्पादन करना मुश्किल होता जा रहा है. कंपनियों का दावा है कि अगर दरें नहीं बढ़ायी गयीं तो उत्पादन और सप्लाई पर असर पड़ सकता है. अब इन सभी टैरिफ प्रस्तावों और बिजनेस प्लान पर झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग अलग-अलग तारीखों में जनसुनवाई करेगा. इसकी तिथियों की घोषणा जल्द की जायेगी.

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