Jharkhand News: कुड़मियों का आंदोलन जारी, अब तक 316 ट्रेनें रद्द, रेलवे को करोड़ों का नुकसान

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 Apr 2023 5:29 PM

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बहरागोड़ा के कुड़मी समाज के करीब 50 प्रमुख सदस्यों के नेतृत्व में झारखंड के कुड़मी समाज के लोग खेमासुली में आयोजित आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे हैं

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पूर्वी सिंहभूम, गौरब पाल :

पश्चिम बंगाल के खेमाशुली में कुड़मी जनजाति को एसटी में शामिल करने और कुड़मी भाषा को संविधान की आठवीं सूची में शामिल करने की मांग को लेकर शनिवार को भी रेल चक्का और हाईवा जाम है. बंगाल, ओडिशा और झारखंड के हजारों कुड़मियों का जुटान हुआ है. आंदोलनकारी पीछे हटने के मूड में नहीं हैं. मनोरंजन और भोजन पानी के साथ आंदोलन चल रहा है. डीजे पर झूमर गीत बज रहा है और पारंपरिक हथियारों से लैस हजारों लोग नाच रहे हैं. हर दिन शाम को हजारों लोगों का महाजुटान हो रहा है.

बहरागोड़ा से कुड़मी समाज के लोगों ने खेमाशूली आंदोलन स्थल पर किया गया सहयोग

बहरागोड़ा के कुड़मी समाज के करीब 50 प्रमुख सदस्यों के नेतृत्व में झारखंड के कुड़मी समाज के लोग खेमासुली में आयोजित आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे हैं. इसमें प्रमुख रूप से आंदोलन का नेतृत्व छात्र नेता कलन महतो, राजु महतो, अजित महतो, शिवशंकर महतो एवं अनुप महतो दे रहे थे. बताया गया कि आज शनिवार को कुड़मी आंदोलन का पांचवा दिन है. बंगाल सरकार ने अबतक किसी प्रकार की पहल नहीं की है.

बंगाल सरकार की उदासीनता समझ से परे है. धीरे- धीरे आंदोलन उग्र रूप लेती जा रही है और आंदोलनकारियों की भी संख्या बढ़ती जा रही है. सरकार जब तक आगे की कारवाई नहीं करती है, तबतक आंदोलन जारी रहेगा. इस बार कुड़मी समाज अपना हक लेकर रहेगी. बहरागोड़ा प्रखंड से अब तक दो क्विंटल चावल एवं सब्जी संग्रह कर सहयोग किया गया है. बहरागोड़ा प्रखंड से सैकड़ों समाज कर्मी आंदोलन को समर्थन करने खेमासुली पहुंचे हैं.

घाटशिला अनुमंडल के कुड़मी समाज के प्रमुख छात्र नेताओं के साथ सैकड़ों समाज के छात्र-छात्रा रोजाना खेमासुली में आयोजित रेल टेका और डहर छेका आंदोलन को समर्थन देने पहुंच रहे हैं. खेमासुली में चल रहे आंदोलन को लेकर छात्र नेताओं के द्वारा कुड़मी बहुल गांवों में डोर-टू-डोर जाकर खाद्यान्न सामग्री (चाल,दाल,हरि सब्जी) सग्रहन कर आंदोलन में सहयोग कर रहे हैं. साथ साथ समाज के युवा वर्ग को आंदोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने की अपिल‌ कर रहे हैं.

इस बार आर-पार की लड़ाई:-

रेल बंद होने के कारण इस मार्ग के सभी रेलवे स्टेशनों तथा बस स्टैंड पर सन्नाटा पसरा हुआ है. केंद्र या राज्य सरकार द्वारा रेल चक्का और हाईवे जाम हटाने के लिए अभी तक कोई पहल नहीं हुई है. कुड़मी समाज के मूल वक्ता अजीत प्रसाद महतो ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें मानी नहीं जाएंगी, तब तक आंदोलन करने के लिए कुड़मी समाज तैयार है. इस बार आर पार की लड़ाई है.

दक्षिण पूर्व रेलवे को करोड़ों रुपये का नुकसान:-

पटरियों पर बैठे कुड़मी समाज के प्रदर्शनकारियों के कारण दक्षिण पूर्व रेलवे को अब तक 316 ट्रेनों को रद्द करना पड़ा है. इतनी बड़ी संख्या में ट्रेनों के रद्द होन से दक्षिण पूर्व रेलवे को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है. अकेले खड़गपुर मंडल को 25 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात कही जा रही है. इस दौरान हजारों यात्री अपने गंतव्य स्टेशनों पर जा नहीं पा रहे हैं. लोग जहां- तहां स्टेशनों पर फंसे हैं. शुक्रवार को दक्षिण पूर्व रेलवे की 71 ट्रेनों को रद्द करना पड़ा था. जबकि 8 अप्रैल (शनिवार) को 72 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया. इनमें लंबी दूरी की ट्रेनों के साथ लोकल ट्रेनें भी हैं. कई ट्रेनों को परिवर्तित मार्ग से चलाया जा रहा है.

दक्षिण पूर्व रेलवे के अधिकारी बोले- स्थिति चिंतानजक :-

कुड़मी समाज के चक्का जाम के दूसरे दिन गुरुवार को दक्षिण पूर्व रेलवे की 88 मेल, एक्सप्रेस व लोकल ट्रेनों को रद्द किया गया था. अधिकारियों का कहना है कि लिंक ट्रेनों के विभिन्न स्टेशनों पर फंसे होने के कारण हावड़ा, खड़गपुर और सांतरागाछी स्टेशनों तक पहुंच नहीं पा रही है. स्थिति काफी चिंताजनक है. खड़गपुर मंडल की ट्रेनों का परिचालन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है.

आंदोलनकारियों से रेलवे ने की कई दौर की बैठक:-

दक्षिण पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी आदित्य कुमार चौधरी ने बताया कि खड़गपुर मंडल में खेमाशुली और आद्रा मंडल के पुरुलिया जिले में पुस्तौर स्टेशन पर कुड़मी समाज के लोग रेल लाइन पर बैठे हुए हैं. कई दौर की बैठकों में उनसे रेल लाइन खाली करने का आग्रह किया गया, लेकिन स्थित अभी तक नहीं सुधरी है. ट्रेन पटरियों पर से जब तक प्रदर्शनकारी नहीं हटते, ट्रेनों को चलाना मुश्किल है. राज्य प्रशासन के अधिकारियों के साथ हम लगातार संपर्क में हैं. अब तक दूपरे की 316 ट्रेनों को रद्द करना पड़ा है. इससे रेलवे को भारी नुकसान उठाना पड़ा है.

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