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झारखंड : सुवर्णरेखा की तरह खरकई नदी पर भू-माफियाओं का कब्जा, संकट में नदियां, जिम्मेदार मौन

Updated at : 16 Apr 2023 6:15 PM (IST)
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झारखंड : सुवर्णरेखा की तरह खरकई नदी पर भू-माफियाओं का कब्जा, संकट में नदियां, जिम्मेदार मौन

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खरकई नदी के किनारे भू-माफिया की नजर है. बागबेड़ा से सोनारी दोमुहानी तक नदी तट की जमीन प्लॉटिंग कर बेच दी है, जिस पर मकान और संस्थान बनाकर नदी के बहाव को रोका जा रहा है. इससे नदियों का अस्तित्व खतरे में आ गया है.

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जमशेदपुर, ब्रजेश सिंह : सुवर्णरेखा की तरह खरकई नदी का भी दबंगों ने चीर हरण कर लिया है. रिवर बेड का तेजी से अतिक्रमण किया जा रहा है, जिससे यह नदी भी सिकुड़ कर नाला बन गयी है. नेता, पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत से दबंगों ने बागबेड़ा से सोनारी दोमुहानी तक नदी तट की जमीन प्लॉटिंग कर बेच दी है, जिस पर मकान और संस्थान बनाकर नदी के बहाव को रोका जा रहा है. अतिक्रमण रोकने के लिए न तो सुवर्णरेखा परियोजना और न ही नगर निकायों की टीम कोई ठोस कदम उठा रही है. हालात यह है कि नदी का बहाव थम चुका है.

सिकुड़ गया रिवर बेड

बागबेड़ा में जलापूर्ति योजना के लिए नदी तट पर पिलर लगाया गया है. लेकिन उसके नाम पर नदी के बहाव क्षेत्र को भर दिया गया है. जुगसलाई में भी यही हाल है. यहां नदी तट पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है. इसको रोकने के लिए कोई पहल नहीं की जा रही है. धार्मिक स्थल के नाम पर जमीन घेरा जा रहा है.

भरा जा रहा नदी तट

सोनारी में भी नदी तट को भरा जा रहा है. सोनारी में भी बस्तियों के लोग लगातार नदी तट पर कचरा डाल उसे भर रहे हैं. कुछ लोगों ने तो यहां झोपड़ी भी बना ली है. इसे रोका नहीं गया तो स्थायी निर्माण किया जाएगा.

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क्या कहते हैं जिम्मेदार लोग

गम्हरिया प्रखंड के अंचलाधिकारी मनोज कुमार ने कहा कि हमें जमीन बेचने की शिकायत नहीं मिली है. अगर मिलेगी, तो कार्रवाई करेंगे. वहीं, सुवर्णरेखा परियोजना के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर नीलम संजीव मिंज ने कहा कि नदी के बहाव क्षेत्र का अतिक्रमण अपराध है. अगर यह किया जा रहा है, तो इसको रोका जायेगा. इसको रोकने के लिए हर संभव कोशिश की जायेगी. इसके अलावा जमशेदपुर अक्षेस के विशेष पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि नदी तट अतिक्रमण की जब भी सूचना मिलती है, तो कार्रवाई की जाती है. अतिक्रमण हो रहा है, तो कार्रवाई होगी.

आदित्यपुर में तीन से चार लाख रुपये कट्ठा बिक रही जमीन

आदित्यपुर में मांझीटोला के आसपास करीब तीन से चार लाख रुपये प्रति कट्ठा खरकई नदी के बहाव क्षेत्र की जमीन बेची जा रही है. इसमें पुलिस की भी मिलीभगत है. जयप्रकाश उद्यान के पास भी नदी तट को भरकर जमीन बेचने की कोशिश की जा रही है. बंदोबस्ती होने की बात कहकर भूमि माफिया यहां जमीन बेच रहे हैं.

बिष्टुपुर से कदमा तक अतिक्रमण

बिष्टुपुर से कदमा तक नदी तट का अतिक्रमण किया गया है. बिष्टुपुर में बेली बोधनवाला गैरेज के पीछे धार्मिक स्थान बनाकर जमीन की घेराबंदी की गयी है. कदमा टोल ब्रिज के पास एक गार्डेन टाटा स्टील यूआइएसएल की ओर से बना दिया गया. पहले सुर्णरेखा परियोजना ने अतिक्रमण माना, लेकिन बाद में हरी झंडी दे दी.

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ऐसे हुआ अतिक्रमण

– बागबेड़ा से सोनारी दोमुहानी तक नदी तट पर बन गये मकान

– नेता, पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत से दबंगों ने नदी की जमीन बेच दी

– अतिक्रमण से सुवर्णरेखा परियोजना व नगर निकाय बेखबर

– नदी तट को भरकर खड़ी की जा रही बिल्डिंग

– बंदोबस्ती के नाम पर भू-माफिया प्लॉटिंग कर बेच दे रहे नदी तट की जमीन.

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