जमशेदपुर में मलेरिया का कहर: स्वास्थ्य विभाग की उड़ी नींद, 58 MPW को दिया गया ये निर्देश

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जमशेदपुर में मलेरिया का कहर: स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

मलेरिया रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एमपीडब्ल्यू को उतारा

पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) जिले में डेंगू और चिकनगुनिया के साथ मलेरिया का प्रकोप बढ़ रहा है. स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है. मलेरिया की रफ्तार थामने के लिए 58 मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर (MPW) को सीधे फील्ड में उतारा गया है.

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जमशेदपुर से चंद्रेशखर की रिपोर्ट

Jamshedpur Malaria Cases, जमशेदपुर : डेंगू और चिकनगुनिया के खौफ के बीच अब पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) जिले में मलेरिया का डंक तेजी से हावी हो रहा है. शहरी बस्तियों से लेकर सुदूर ग्रामीण इलाकों तक इस बीमारी के तेजी से फैलते पैर देख स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है. मरीजों के बढ़ते ग्राफ पर ब्रेक लगाने और स्थिति को बेकाबू होने से रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है. मलेरिया की रफ्तार को थामने के लिए विभाग ने अब सहिया, एएनएम और रूटीन स्वास्थ्य कर्मियों के साथ-साथ जिले में तैनात सभी 58 एमपीडब्ल्यू (मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर) को सीधे मोर्चे पर उतारने का फैसला लिया है.

लापरवाही की तो नपेंगे अफसर

बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. मृत्युंजय धाउड़िया ने जिला सर्विलेंस पदाधिकारी, घाटशिला अनुमंडल अस्पताल के उपाधीक्षक और सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) के प्रभारियों को आपातकालीन पत्र जारी किया है. पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वर्तमान में मलेरिया रोधी कार्यक्रम के तहत एमपीडब्ल्यू से अनिवार्य रूप से मलेरिया की ऑन-स्पॉट जांच और रोकथाम के अन्य कार्य कराए जाएं. डॉ. धाउड़िया ने दो टूक कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मलेरिया से होने वाली मौतों को रोकना और मलेरिया मॉर्बिडीटी (बीमारी की दर) को शून्य स्तर पर लाना है. मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

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सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल का निर्देश

पूर्वी सिंहभूम जिले के सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने जमीनी स्तर पर काम को रफ्तार देने के लिए सभी मेडिकल प्रभारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं. उन्होंने कहा कि फील्ड में तैनात सभी एमपीडब्ल्यू, सहिया और एएनएम को ये टास्क तुरंत पूरे करने होंगे.

  • पहला काम ये है कि एमपीडब्ल्यू, सहिया और एएनएम को गांवों और मुहल्लों में बुखार से पीड़ित किसी भी मरीज की सूचना मिले तो उन्हें मौके पर ही टेस्ट किट से मलेरिया की जांच करना होगा.
  • जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही बिना एक मिनट की देरी किए मरीज को सरकारी गाइडलाइन के अनुसार एंटी-मलेरिया दवाओं (दवाओं की पूरी खुराक) की किट उपलब्ध कराना होगा.
  • जिन बस्तियों में जहां भी जलजमाव (पानी इकट्ठा) है, उन हॉटस्पॉट की पहचान कर वहां एंटी-लार्वा केमिकल और ब्लीचिंग पाउडर का सघन छिड़काव सुनिश्चित करना होगा.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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