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Jamshedpur News : अवैध निर्माणों पर हाइकोर्ट की सख्ती, एक महीने में ढहाये जायेंगे सभी अवैध ढांचे

Updated at : 16 Jan 2026 1:23 AM (IST)
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जमशेदपुर (फाइल फोटो)

Jamshedpur News : जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति एरिया में (जेएनएसी ) बिल्डिंग बायलॉज की अनदेखी कर किये गये अवैध निर्माणों पर अब बुलडोजर चलना तय हो गया है.

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हाइकोर्ट ने कहा- मिलीभगत के बिना संभव नहीं इतना बड़ा उल्लंघन

Jamshedpur News :

जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति एरिया में (जेएनएसी ) बिल्डिंग बायलॉज की अनदेखी कर किये गये अवैध निर्माणों पर अब बुलडोजर चलना तय हो गया है. हाइकोर्ट से 24 भवनों के अवैध हिस्से को तोड़ने का लिखित आदेश जारी कर दिया गया है. झारखंड हाइकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) को निर्देश दिया है कि शहर में निजी प्रतिवादियों द्वारा बनाये गये तमाम अवैध ढांचों को एक महीने के भीतर ध्वस्त किया जाये. मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जायेगी.

टीम गठित कर अवैध ढांचों को चिह्नित कर शुरू होगी तोड़ने की प्रक्रिया : डीएमसी

जेएनएसी के उपनगर आयुक्त कृष्ण कुमार ने कहा कि हाइकोर्ट के आदेश की कॉपी मिलते ही टीम गठित कर अवैध ढांचों को चिह्नित करने और उन्हें तोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी. जेएनएसी के उपनगर आयुक्त कृष्ण कुमार को 25 फरवरी 2026 तक कोर्ट में एक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी. जिसमें तोड़े गये निर्माणों का पूरा ब्यौरा देना होगा. मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च 2026 को होगी.

प्रशासनिक अधिकारियों की तय हुई व्यक्तिगत जवाबदेही

हाइकोर्ट ने इस मामले में प्रशासन को भी कड़े निर्देश दिये हैं. कोर्ट ने कहा कि नगर विकास विभाग के सचिव, पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त और एसएसपी व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करेंगे कि जेएनएसी को ध्वस्तीकरण के लिए पर्याप्त पुलिस बल और प्रशासनिक सहायता मिले. मदद में कमी पाये जाने पर इन अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई की जायेगी.

कोर्ट ने पिछले अंतरिम आदेशों (जून और नवंबर 2024) को रद्द कर दिया है. ताकि अवैध निर्माणों पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो सके.

कोर्ट में जेएनएसी का कबूलनामा- हां निर्माण अवैध हैं

सुनवाई के दौरान जेएनएसी के वकील ने कोर्ट के समक्ष यह स्वीकार किया कि संबंधित निर्माण पूरी तरह से अवैध हैं और उन्हें तय समय सीमा के भीतर गिरा दिया जायेगा. कोर्ट ने जेएनएसी के इस बयान को एक गंभीर वचन के रूप में दर्ज किया है. कोर्ट ने कहा कि यदि इस वचन का पालन नहीं हुआ. तो इसके लिए जेएनएसी के उपनगर आयुक्त व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे.

जांच रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा, बिना सर्टिफिकेट खड़ी कर दीं इमारतें

कोर्ट द्वारा नियुक्त तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं (राज नंदन सहाय, सुदर्शन श्रीवास्तव और पांडेय नीरज राय) की समिति ने अपनी रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य पेश किये. किसी भी इमारत के पास अनिवार्य कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं है. स्वीकृत नक्शे से भारी विचलन और बिल्डिंग बायलॉज का घोर उल्लंघन किया गया. पार्किंग की जगह को व्यावसायिक उपयोग (दुकान, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स) के लिए बेच दिया गया.

हाइकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण अधिकारियों की मिलीभगत या घोर निष्क्रियता के बिना संभव नहीं है. कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि अब समय आ गया है जब अवैध निर्माणों के प्रति कोई नरमी न दिखायी जाये.

क्या है पूरा मामला

साकची निवासी राकेश झा ने जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि बिल्डरों ने बिल्डिंग बायलॉज 2016 का उल्लंघन किया है. बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट के बिजली-पानी के कनेक्शन दे दिये गये और नक्शे के विपरीत जाकर पार्किंग एरिया में दुकानें बना दी गयीं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAJESH SINGH

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