Jamshedpur News : गैस किल्लत : कोयला भट्ठी के दौर में लौटने को मजबूर हलवाई, छंटनी की भी नौबत

Updated at : 14 Mar 2026 1:26 AM (IST)
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जमशेदपुर (फाइल फोटो)

Jamshedpur News : गैस किल्लत : कोयला भट्ठी के दौर में लौटने को मजबूर हलवाई, छंटनी की भी नौबत

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एक-दो दिन का स्टॉक, फिर कोयला ही सहारा

Jamshedpur News :

कॉमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति ठप होने से शहर के बड़े मिठाई कारोबारी अब दशकों पीछे जाकर ”कोयला भट्ठियों” के युग में लौटने को मजबूर हो रहे हैं. शहर में ”छप्पन भोग” फ्रेंचाइजी के संचालक गुरदयाल सिंह भाटिया ने मौजूदा हालात पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि समस्या विकट होती जा रही है. उनके पास महज एक-दो दिनों का ही कॉमर्शियल सिलेंडर का स्टॉक बचा है. इसके समाप्त होते ही वे काम चालू रखने के लिए कोयले की भट्ठियों पर निर्भर हो जायेंगे. हालांकि, जिन इकाइयों में स्ट्रीम बॉयलर सिस्टम है, वहां कुछ राहत है. लेकिन, मिठाई और नमकीन के पूरे कॉम्बिनेशन के बिना व्यापार का पहिया घूमना मुश्किल है. कोयले की भट्ठियों पर काम करना न केवल धीमा है, बल्कि यह आधुनिक किचन के सेटअप के अनुकूल भी नहीं है.

इंडक्शन और बिजली लोड का संकट

विकल्प के तौर पर बड़े इंडक्शन चूल्हों के इस्तेमाल पर भाटिया ने कहा कि यह समाधान सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन व्यावहारिक रूप से तुरंत संभव नहीं है. फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होने वाले बड़े इंडक्शन की कीमत डेढ़ से दो लाख रुपये के बीच है. इन्हें चलाने के लिए भारी बिजली लोड की आवश्यकता होती है, जिसके लिए विभाग से तुरंत मंजूरी मिलना नामुमकिन है. फिलहाल काउंटरों पर छोटे-मोटे कार्यों के लिए इंडक्शन लगाये जा रहे हैं, लेकिन भारी उत्पादन के लिए यह नाकाफी है.

दुकान के बाहर लगने वाले स्टॉल हो सकते हैं बंद

आपूर्ति की कमी का सबसे बुरा असर दुकानों के बाहर लगने वाले चाट, चाउमिन और वेज हॉट आइटम्स पर पड़ेगा. संचालकों का कहना है कि अगर छोटी भट्ठियों से काम नहीं चला, तो इन गर्मागर्म आइटम्स को बंद करना होगा. सबसे बड़ी चिंता कर्मचारियों को लेकर है. गुरदयाल सिंह भाटिया ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो कर्मचारियों को हटाने की भी नौबत आ जायेगी. एक बार अच्छे कारीगर काम छोड़कर चले जायें, तो उन्हें दोबारा जोड़ना और व्यवसाय को पटरी पर लाना बेहद कठिन होता है. वहीं, ”गणगौर” के संचालक दविंदर सिंह के अनुसार, दुकानों के बाहर लगने वाले फूड स्टॉलों को कुछ दिनों के लिए ”स्लो डाउन” या बंद करना पड़ सकता है.

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