Jamshedpur News : जनजागरूकता और सख्ती का असर, दलमा में सेंदरा पर्व रहा शिकारमुक्त

Published by : SANAM KUMAR SINGH Updated At : 06 May 2025 12:57 AM

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जमशेदपुर (फाइल फोटो)

सेंदरा शिकार पर्व को लेकर इस बार दलमा और उसके आसपास के क्षेत्रों में पर्व सांकेतिक रूप से मनाया गया. वन विभाग की ओर से आधिकारिक जानकारी में कहा गया है कि इस वर्ष एक भी शिकार नहीं हुआ. दलमा के डीएफओ सबा आलम अंसारी ने बताया कि दलमा वन्यप्राणी आश्रयणी में इस बार भी जनजातीय वार्षिक ''विशु शिकार पर्व'' मनाया गया.

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चेकनाकों पर वनकर्मियों की तैनाती, सेंदरा वीरों ने की सिर्फ पूजा-अर्चना

जमशेदपुर. सेंदरा शिकार पर्व को लेकर इस बार दलमा और उसके आसपास के क्षेत्रों में पर्व सांकेतिक रूप से मनाया गया. वन विभाग की ओर से आधिकारिक जानकारी में कहा गया है कि इस वर्ष एक भी शिकार नहीं हुआ. दलमा के डीएफओ सबा आलम अंसारी ने बताया कि दलमा वन्यप्राणी आश्रयणी में इस बार भी जनजातीय वार्षिक ””विशु शिकार पर्व”” मनाया गया. पर्व से जुड़ी पारंपरिक भावनाओं का सम्मान करते हुए, वन्यजीवों के शिकार पर रोक के लिए विभाग ने संगठित रूप से प्रयास किया.

उन्होंने बताया कि विभाग की अपील पर लोगों ने शांतिपूर्वक पर्व मनाया और किसी ने शिकार नहीं किया. मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) द्वारा आरक्षी महानिरीक्षक एवं प्रमंडलीय आयुक्त से संपर्क स्थापित किया गया. वन संरक्षक, वन प्रमंडल पदाधिकारी एवं क्षेत्रीय वन अधिकारियों के नेतृत्व में गठित गश्ती दलों ने अपने कार्यों का समन्वय और अनुश्रवण किया. जिला स्तर पर उपवन संरक्षक एवं गज परियोजना के क्षेत्र निदेशक ने निगरानी की.

संवेदनशील क्षेत्रों में सघन गश्ती और सुरक्षा इंतजाम

शिकार से पूर्व 3 मई को संभावित संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर सघन गश्ती की गई. सोमवार को दलमा के दोनों प्रक्षेत्रों में वनरक्षियों ने जलस्रोतों, नालों और अन्य मार्गों पर गश्ती की और जाल-फांस जब्त करने की कार्रवाई की. बोड़ाम अंचल के हलुदबनी और आसनबनी जैसे क्षेत्रों को विशेष निगरानी में रखा गया. यहां सशस्त्र बल की तैनाती के लिए जिला प्रशासन से अनुरोध किया गया.

गोविंदपुर, गदड़ा, बोड़ाम, पटमदा और पोटका थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सेंदरा मार्गों पर वाहनों और लोगों की आवाजाही पर विशेष नजर रखी गई. 11 चेकनाका स्थापित किए गए और 17 अलग-अलग गश्ती पथ बनाए गए. इन मार्गों पर जमशेदपुर वन प्रमंडल सहित आस-पास के वन प्रमंडलों से आए अधिकारियों व वनकर्मियों को गश्ती दल में शामिल किया गया.

सेंदरा समिति ने भी दिया सहयोग, पूजा-पाठ के बाद लौटे लोग

पर्व से एक दिन पूर्व दलमा बुरू सेंदरा समिति के सदस्य फदलोगोड़ा पहुंचे जहां पारंपरिक रीति से वनदेवी की पूजा की गई. इसके बाद समिति ने घर लौटने का निर्णय लिया. चेकनाकों पर तैनात वनकर्मियों ने सेंदरा में शामिल होने आए लोगों को समझा-बुझाकर वापस भेजा. अवैध शिकार की रोकथाम के लिए मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एसआर नटेश और क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, सिंहभूम स्मिता पंकज ने विधि-व्यवस्था की समीक्षा की.

जनजागरूकता का असर, सेंदरा में लोगों की भागीदारी घटी

वन विभाग ने कहा कि जनजागरूकता के कारण इस वर्ष पूर्व वर्षों की तुलना में सेंदरा पर्व में भाग लेने वालों की संख्या काफी कम रही, जो संतोषजनक है. विभाग ने इस सहयोग के लिए सेंदरा समिति और स्थानीय लोगों को धन्यवाद दिया. डीएफओ ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इसी तरह सभी का सहयोग प्राप्त होगा, जिससे दलमा वन्यजीव आश्रयणी में जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी. वन विभाग ने पुष्टि की कि इस वर्ष दलमा में किसी भी वन्यप्राणी का शिकार नहीं हुआ.

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