चाकुलिया के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक नदारद, माता समिति सदस्य के भरोसे हुई बच्चों की परीक्षा

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बिना शिक्षक के ही परीक्षा देते बच्चे

बिना शिक्षक के ही परीक्षा देते बच्चे

चाकुलिया प्रखंड के एक सरकारी स्कूल में मासिक परीक्षा के दौरान एक भी शिक्षक मौजूद नहीं था. 12 बच्चे माता समिति सदस्य की निगरानी में परीक्षा देते रहे, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

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East Singhbhum News: सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था की हकीकत मंगलवार को चाकुलिया प्रखंड के तलपाल प्राथमिक विद्यालय में देखने को मिली. यहां मासिक परीक्षा के दौरान स्कूल में एक भी शिक्षक मौजूद नहीं था. शिक्षक प्रश्न पत्र देकर स्कूल से चले गए, जबकि 12 बच्चे माता समिति की सदस्य की निगरानी में परीक्षा देते रहे.

एक ही कमरे में पहली से पांचवीं तक के बच्चों की परीक्षा

विद्यालय में कुल 18 बच्चे नामांकित हैं, जिनमें से मंगलवार को 12 बच्चे स्कूल पहुंचे थे. पहली से पांचवीं कक्षा तक के सभी बच्चे एक ही कमरे में बैठकर मासिक परीक्षा दे रहे थे. स्कूल कार्यालय में ताला लटका हुआ था और पूरे परिसर में कोई शिक्षक मौजूद नहीं था.

माता समिति सदस्य संभाल रही थीं बच्चों की जिम्मेदारी

बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी माता समिति की सदस्य फुलमनी हेंब्रम निभा रही थीं. वह एक ओर मिड-डे मील का भोजन तैयार कर रही थीं और दूसरी ओर बच्चों पर नजर रख रही थीं. ऐसे में यदि किसी बच्चे के साथ कोई हादसा हो जाता, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं.

दो शिक्षक पदस्थापित, फिर भी स्कूल खाली

जानकारी के अनुसार विद्यालय में दो शिक्षक पदस्थापित हैं. इनमें से एक शिक्षक सोमवार से अवकाश पर हैं. इसके बावजूद दूसरे शिक्षक भी स्कूल छोड़कर चले गए. इतना ही नहीं, उनके अनुपस्थित रहने का कारण विद्यालय के सूचना बोर्ड पर भी दर्ज नहीं किया गया था, जो विभागीय नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है.

बीआरसी ने बताया- बैठक में गए थे शिक्षक

मामले की जानकारी लेने पर प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) कार्यालय ने बताया कि दूसरे शिक्षक प्रखंड कार्यालय में आयोजित 'एसआईआर' बैठक में शामिल होने गए थे. हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि जब विद्यालय में पहले से ही एक शिक्षक अवकाश पर थे, तब दूसरे शिक्षक का परीक्षा के दौरान स्कूल छोड़कर बैठक में जाना उचित नहीं था.

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है. उनका कहना है कि सरकारी शिक्षकों को निजी विद्यालयों की तुलना में कई गुना अधिक वेतन मिलता है, लेकिन बच्चों की पढ़ाई और जिम्मेदारी के प्रति गंभीरता नहीं दिखती. यही वजह है कि अभिभावक मजबूरी में अपने बच्चों का नामांकन निजी विद्यालयों में करा रहे हैं. ग्रामीणों ने मामले की जांच कर जिम्मेदार शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

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अमलेश नंदन सिन्हा

लेखक के बारे में

By अमलेश नंदन सिन्हा

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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