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निरीक्षण: आयुक्त सह प्रशासक ने किया मुख्य बायीं नहर का निरीक्षण, कहा खरीफ और रबी में भी मिले पानी

गालूडीह/घाटशिला: कोल्हान आयुक्त सह सुवर्णरेखा परियोजना के प्रशासक अरुण ने सोमवार को गालूडीह बराज डैम से निकली मुख्य बायीं नहर का निरीक्षण किया. आयुक्त सुबह साढ़े नौ बजे बराज डैम पहुंचे थे. डैम देखने के बाद गालूडीह से बहरागोड़ा तक बनने वाली मुख्य बायीं नहर का निरीक्षण करने अभियंता की टीम के साथ निकल पड़े. […]

गालूडीह/घाटशिला: कोल्हान आयुक्त सह सुवर्णरेखा परियोजना के प्रशासक अरुण ने सोमवार को गालूडीह बराज डैम से निकली मुख्य बायीं नहर का निरीक्षण किया. आयुक्त सुबह साढ़े नौ बजे बराज डैम पहुंचे थे. डैम देखने के बाद गालूडीह से बहरागोड़ा तक बनने वाली मुख्य बायीं नहर का निरीक्षण करने अभियंता की टीम के साथ निकल पड़े. उनके साथ ईचा-गालूडीह और चांडिल कॉम्पलेक्स के मुख्य अभियंता विरेंद्र राम भी थे.
घाटशिला तक करीब 14 किमी नहर का निरीक्षण किया. इस क्रम में आयुक्त ने बताया कि वह पटवन पर विशेष ध्यान दे रहे हैं. किसानों को खरीफ और रबी में कैसे पानी मिले. खेत कैसे सिंचिंत हो इस पर हमारा ध्यान हैं. परियोजना को समय पर पूरी करने की जवाबदेही विभाग और ठेका कंपनी तय करे. परियोजना किसानों के खेत तक पहुंचाने के लिए वचनबद्ध है.

उन्होंने कहा कि नहर का पानी स्टोरेज करने के लिए तालाब की खुदाई जरूरी है. पानी स्टोरेज के लिए तालाब खुदाई के साथ खेत के किनारे इंटक बेल का निर्माण होगा. प्रशासक ने कहा कि 65 किलोमीटर तक निरीक्षण करना था. मगर समय अभाव के कारण 14 किलोमीटर तक का निरीक्षण कर पाये हैं. मौके पर बराज के अधीक्षण अभियंता आरएन प्रसाद, कार्यपालक अभियंता एसपी वर्णवाल, भू-अर्जन के इइ एससी नाथ, एसडीओ रवींद्र कुमार सिंह, प्रमोद सिन्हा, सुरेंद्र महतो आदि उपस्थित थे.

सात किमी नहर की लागत 42 करोड़, पांच जगह संरचना का काम बाकी. गालूडीह मुख्य लेफ्ट कैनल के सात किमी नहर निर्माण की लागत 42 करोड़ है. इस काम को द्विवेणी कंस्ट्रक्शन ने लिया है. आयुक्त सह प्रशासक के निरीक्षण के दौरान ठेका कंपनी के मालिक गोविंद अग्रवाल भी उपस्थित थे. सात किमी नहर में पांच जगह गेप है. पांच संरचना का काम अभी शुरू नहीं हुआ है. प्रशासक ने जल्द काम पूरा करने का निर्देश दिया और कहा कि जितनी नहर बनती उतने में पानी छोड़ा जाये. निरीक्षण के दौरान यह सामने आया है सात किमी नहर निर्माण में 800 मीटर भू-अर्जन की समस्या के कारण काम रुका है. किसान भुगतान नहीं ले रहे हैं. प्रशासक ने कहा कि ग्रामीणों की बैठक बुलाकर भुगतान किया जाये.
मुख्य बिंदु
समय पर काम पूरी करने की जवाबदेही विभाग और ठेका कंपनी तय करे
नहर का पानी स्टोरेज करने के लिए तालाब की खुदाई जरूरी है
पानी स्टोरेज के लिए तालाब खुदाई के साथ इंटक बेल का निर्माण होगा
गांवों के नालियों से बहकर नदी में जाने वाला पानी रोका जायेगा
मंगलवार से गांव के सभी नाला-नाली व ड्रनेंज का होगा सर्वे
पानी के स्टोरेज के लिए गांवों में छोटे-बड़े तालाब बनाये जायेंगे
नाला-नालियों के गंदे पानी की सफाई के लिए फिल्टर प्लांट बनेगा
साफ पानी को कैनाल में छोड़ने के लिए इंटेकबेल बनाया जायेगा
कैनाल से पानी सुदूर खेतों तक पहुचाने के लिए पाइप का होगा इस्तेमाल
गांव-गांव वाटर हार्वेस्टिंग अौर ग्राउंड वाटर रीचार्जिंग पर फोकस कर बनेंगी सिंचाई योजनाएं
पानी की एक-एक बूंद बचाने के लिए गांवों के लोगों के साथ मिलकर विभाग काम करेगा
Prabhat Khabar Digital Desk
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