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झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 : जहां से लड़ते हैं रघुवर, वहां की विधायक थीं प्रियंका की नानी

Updated at : 18 Nov 2019 6:44 AM (IST)
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झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 : जहां से लड़ते हैं रघुवर, वहां की विधायक थीं प्रियंका की नानी

संजीव भारद्वाज पूर्वी जमशेदपुर सीट की पहली महिला विधायक थी मधु ज्योत्स्ना अखौरी जमशेदपुर : मुख्यमंत्री रघुवर दास की सीट जमशेदपुर पूर्वी से मिस वर्ल्ड और प्रसिद्ध अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा की नानी मधु ज्योत्स्ना अखौरी विधायक थीं. श्रीमती अखौरी ने सीपीएम के एन बनर्जी को हरा कर कांग्रेस के टिकट पर 1967 में जमशेदपुर पूर्वी […]

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संजीव भारद्वाज

पूर्वी जमशेदपुर सीट की पहली महिला विधायक थी मधु ज्योत्स्ना अखौरी

जमशेदपुर : मुख्यमंत्री रघुवर दास की सीट जमशेदपुर पूर्वी से मिस वर्ल्ड और प्रसिद्ध अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा की नानी मधु ज्योत्स्ना अखौरी विधायक थीं. श्रीमती अखौरी ने सीपीएम के एन बनर्जी को हरा कर कांग्रेस के टिकट पर 1967 में जमशेदपुर पूर्वी की पहली महिला विधायक बनी थीं. प्रियंका चाेपड़ा की माैसी डॉ लीना अखाैरी (मधु ज्याेत्स्ना अखाैरी की पुत्री) याद करते हुए बताती हैं : उन दिनाें चुनाव की बात ही निराली थी. जमशेदपुर पूर्वी विधान सभा से मम्मी चुनाव लड़ रही थीं.

कांग्रेस की तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष इंदिरा गांधी ने उनको प्रत्याशी बनाया था. जब मम्मी ने नामांकन कर दिया, ताे उनके चुनाव प्रचार के लिए घर के सभी सदस्य, जिसमें बच्चे भी शामिल थे, घर-घर जाकर प्रचार करते थे. डॉ लीना अखौरी ने बताया कि मम्मी के देर रात काे लाैटते ही दूसरे दिन सुबह का शिड्यूल जारी हाे जाता था. सुबह ही हम सभी लाेग मम्मी-पापा के साथ चुनाव प्रचार में निकल जाते थे.

मम्मी-पापा आैर उनके साथ के पार्टी कार्यकर्ता जनता से सीधा संबंध कर वाेट मांगते थे, समर्थन मांगते थे, लेकिन उनके साथ हम सभी के चुनाव प्रचार में जाने का साफ मकसद हाेता था खूब मस्ती करना. प्रचार को सभी बच्चे पिकनिक के रूप में याद करते थे आैर उसका पूरा लुत्फ उठाते थे. उन दिनाें प्रचार की काेई खास सुविधा नहीं थी. कोई अत्याधुनिक सुविधा नहीं हाेने के कारण अपनी एंबेसडर कार आैर जीप के ऊपर माइक सेट बांध कर प्रचार के लिए निकलना पड़ता था.

रात भर मतदाता सूची में नाम देख-देख कर उसे नाेट करते थे. इसके बाद उसी के आधार पर लोगों से मिलने उनके पास जाते थे. बड़े उत्साह के साथ घर पर कांग्रेस का झंडा बांधते थे. मतदान के एक-दो दिन पहले पूरा परिवार, दोस्त, सगे-संबंधी पूरी गंभीरता के साथ लग जाते थे. घर में मेले जैसा माहौल होता था.

डॉ लीना ने बताया : टीवी-इंटरनेट का उस वक्त जमाना नहीं था. वन टू वन या फिर लैंड लाइन की ही कम्यूनिकेशन का एकमात्र साधन था. बिष्टुपुर स्थित सेक्रेड हार्ट काॅन्वेंट स्कूल से जब लाैटी, ताे घर के बाहर काफी भीड़ लगी देख कर थाेड़ा घबरा गयी. यह नहीं मालूम था कि चुनाव परिणाम आनेवाला है. भीड़ के ही किसी सदस्य से पता चला कि मम्मी चुनाव जीत गयी हैं. भागती हुई अंदर गयी. घर पर मिठाइयां बंट रही थीं. साथियाें के साथ मिल कर लड्डू बांटना शुरू किया.

घर पर पहुंचे लाेग मम्मी का स्वागत कर रहे थे, जिसे देख कर काफी अच्छा लग रहा था. डॉ लीना अखाैरी ने बताया कि 1967 में चुनाव जीतने के बाद मम्मी मधु काे लेकर पिता एके अखाैरी दिल्ली गये थे. जहां उन्हाेंने आयरन लेडी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मुलाकात की. मम्मी के साथ प्रियंका की मम्मी आैर एक अन्य माैसी भी थी. उन्हाेंने वहां की काफी बातें बतायी थी, जाे आज भी याद आती हैं.

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