जमशेदपुर से दारोगा गिरफ्तार

Updated at : 16 Jun 2014 7:06 AM (IST)
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जमशेदपुर से दारोगा गिरफ्तार

मुख्य अपहर्ता रंजीत सिंह का पिता पकड़ाया जमशेदपुर : जरात के बहुचर्चित सोहेल हिंगोरा अपहरणकांड में पटना की सीआइडी ने गोलमुरी पुलिस लाइन में छापामारी कर दारोगा नागमणि सिंह को गिरफ्तार किया है. नागमणि सिंह अपहरणकांड के मुख्य अभियुक्त रंजीत का पिता है. घटना के समय नागमणि सिंह झारखंड के गिरिडीह में पदस्थापित था और […]

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मुख्य अपहर्ता रंजीत सिंह का पिता पकड़ाया

जमशेदपुर : जरात के बहुचर्चित सोहेल हिंगोरा अपहरणकांड में पटना की सीआइडी ने गोलमुरी पुलिस लाइन में छापामारी कर दारोगा नागमणि सिंह को गिरफ्तार किया है. नागमणि सिंह अपहरणकांड के मुख्य अभियुक्त रंजीत का पिता है. घटना के समय नागमणि सिंह झारखंड के गिरिडीह में पदस्थापित था और उनके खिलाफ बिहार के सारण में अपहरण की आपराधिक साजिश रचने का मामला दर्ज किया गया था. लोक सभा चुनाव के समय उसका प्रोन्नति के साथ जमशेदपुर में ट्रांसफर हुआ था.

फिलहाल वह पुलिस लाइन में ही पदस्थापित था. पुलिस के अनुसार एक इंस्पेक्टर के नेतृत्व में पटना सीआइडी की तीन सदस्यीय टीम जमशेदपुर आयी. गोलमुरी पुलिस को जानकारी 28 वीं वरीयता प्राप्त कोस्टारिका ने उरु ग्वे के हाथों इससे पहले मिली लगातार आठ हारों के बाद उन पर पहली जीत हासिल कर साबित कर दिया है कि उसे हल्के में नहीं लिया जा सकता है.

कोस्टारिका के कोच लुइस पिंटो ने मैच से पहले ही एलान कर दिया था कि उनकी टीम स्टार खिलाड़ियों से लैस विपक्षी टीमों के सामने दब कर कतई नहीं खेलेगी, बल्किअपनी ताकत और तैयारी के बल पर मैदान पर उतरेगी. वाकई, उनके खिलाड़ियों ने कोच की बात को अक्षरश: सही साबित कर दिया. डिएगो फुर्लान, एडिसन कावानी और रोड्रिगेज जैसे धुरंधर खिलाड़ियों के साथ उतरी उरु ग्वे की टीम ने पहले हाफ में 1-0 की बढ़त लेते हुए आशा के अनुरूप अच्छी शुरु आत की. लेकिन दूसरे हाफ में कोस्टारिका के युवा जोल कैंपबेल, दुराते और यूरेना ने अद्भुत तालमेल के साथ एक के बाद एक तीन गोल ठोक कर उरु ग्वे की टीम को हताश कर दिया. उरु ग्वे की टीम कैंपबेल पर लगाम कसने में नाकाम रही जिसका खामियाजा उन्हें हार के रूप में ङोलना पड़ा.

कमोबेश इसी तरह की कहानी इटली ने भी इंग्लैंड के खिलाफ दोहरायी. वेन रूनी और जेरार्ड के अलावा इंग्लैंड ने ज्यादातर युवा खिलाड़ी मैदान में उतारे जो अपना स्टारडम साबित करने के प्रयास में इटली पर हमले तो कई बार बोले, लेकिन स्कोर नहीं कर सके. इंग्लैंड के ज्यादातर खिलाड़ी पहली बार विश्व कप में खेल रहे थे जिसका अनुभवी इटली की टीम ने भरपूर फायदा उठाया. मार्सिसियो ने बेहतरीन गोल कर इटली को बढ़त दिलायी, जबकि विश्व कप क्वालीफाइंग में इटली की ओर से सर्वाधिक गोल दागने वाले बालोटेली ने अपने अनुभव के बल पर बेहतरीन गोल कर इंग्लैंड को निराश कर दिया.

हालांकि इंग्लैंड की टीम थोड़ी बदकिस्मत रही, जो उनकी ओर से लगे कई शॉट या तो गोल बार से टकरा गये या उनके शॉट निशाने पर नहीं लगे. कुल मिला कर इटली की सशक्त रक्षापंक्ति और बालोटेली व आंद्रिया पिरलो जैसे तेजतर्रार स्ट्राइकर की तारीफ करनी होगी, जिन्होंने पूरी लय के साथ अपने अभियान की शुरु आत की है.

इस बीच, मौजूदा चैंपियन स्पेन के खिलाफ हॉलैंड की जीत की बात न हो, तो वह अधूरी रह जायेगी. ये दो धुरंधर टीमों के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई थी. स्पेन ने पिछली बार फाइनल में हॉलैंड को हरा कर विश्व कप जीता था जिससे उनका मनोबल बढ़ा हुआ था. वल्र्ड की नंबर वन टीम ने मैच के 28 वें मिनट में पहला गोल दाग कर अच्छी शुरु आत भी की. लेकिन स्पेनिश टीम शायद भूल गयी कि हॉलैंड के खिलाड़ी पिछले फाइनल मैच में मिली हार का बदला लेने को उतारू थे.

इसके अलावा स्पेनिश टीम पर जैसे ही एक गोल हुआ, उनके रक्षक और गोलकीपर इकेर कैसिलास के चेहरे पर तनाव साफ दिखने लगे. इसके बाद हॉलैंड ने जब बढ़त हासिल कर ली तो कप्तान कैसिलास की हताशा बढ़ती चली गयी और स्पेन की टीम एक के बाद एक गोल खाती रही. विपक्षी टीम की ताकत को न पचा पाना उनकी हार का सबसे बड़ा कारण बना.

दूसरी ओर, कप्तान रोबिन वान पर्सी और अर्जेन रोबेन की जोड़ी ने जिस तालमेल के साथ स्पेन की रक्षापंक्ति को छिन्न-भिन्न किया, उसे देखते हुए हॉलैंड को एक सशक्त दावेदार माना जा सकता है. वैसे भी, हॉलैंड की टीम तीन बार विश्व कप के फाइनल में पहुंची है और तीनों बार खिताब उनसे दूर रहा. जाहिर है, हॉलैंड इस बार खिताब जीतने के लिए सर्वस्व झोंक देगा. उनके लिए यह संभव है, बशर्ते रोबेन और वान पर्सी जैसे धुरंधर खिलाड़ी अपने अहम को छोड़ जिस तरह एक यूनिट के तौर पर खेलते दिखे, उसे कायम रखें. हॉलैंड के साथ यह सबसे बड़ी समस्या है कि उसके खिलाड़ियों में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन अपने स्टारडम के आगे वे साथी खिलाड़ी को ज्यादा तवज्जो नहीं देते हैं और एकल प्रयास के चक्कर में जीत के करीब पहुंच कर भी उससे दूर रह जाते हैं. हॉलैंड के कोच वान गाल ने सबसे बड़ा काम यही किया है कि उन्होंने अपने खिलाड़ियों को एकजुट होकर खेलने को प्रेरित किया जिसका सुखद परिणाम पहले ही मैच में देखने को मिल गया.

हुआ राजधानी थिम्पू के लिए, जो पारो से करीब 55 किमी की दूरी पर है.

रास्ते का नजारा अद्भुत था. पारो से थिम्पू वाली सड़क के दोनों तरफ तैनात थे स्कूली छात्र और छात्राएं, साथ में भूटान के आम नागरिक और युवा भी.

शायद ही रास्ते का कोई हिस्सा ऐसा हो, जिसमें हर दो किलोमीटर पर हाथ में भारत और भूटान के झंडे लिये हुए स्कूली छात्र खड़े न हों. मोदी के स्वागत में न सिर्फये झंडे हिला रहे थे, बल्किवंदे मातरम भी गा रहे थे. बीच-बीच में बड़े-बड़े तोरणद्वार भी खड़े किये गये थे, जिसमें संदेश के तौर पर उम्मीद ये जाहिर की गयी थी कि मोदी की भूटान यात्र से भारत और भूटान के संबंध और मजबूत हों.

राजधानी थिम्पू के करीब पहुंचते-पहुंचते सड़क किनारे खड़े लोगों की तादाद बढ़ती चली गयी. थिम्पू शहर में तो युवाओं के अलावा शहरी लोग भी सड़क के किनारे खड़े हाथ हिलाते नजर आये. सरकारी अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक पारो से थिम्पू के रास्ते पर करीब सात हजार स्कूली छात्र खड़े थे.यानी भूटान की करीब सात लाख की आबादी का एक फीसदी 55 किमी लंबे मार्ग पर खड़ा था मोदी के स्वागत के लिए. युवाओं और छात्रों के अलावा सड़क पर हजारों की तादाद में सुरक्षाकर्मी भी मौजूद थे.

प्रधानमंत्री से चर्चा

महाराजा से मिलने के बाद मोदी ने भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे के साथ उनके कार्यालय जाकर औपचारिक बातचीत की. टोबगे ने मोदी की यात्र से पहले ही कह दिया था कि उनकी सरकार इस बात से काफी खुश है कि मोदी ने बतौर प्रधानमंत्री अपनी पहली विदेश यात्र के लिए भूटान को चुना.

शेरिंग टोबगे से मुलाकात के दौरान मोदी ने भारत-भूटान संबंधों को बी 2 बी करार दिया, मतलब भारत से भूटान. मोदी ने भूटान की सरकार और जनता को भी भव्य स्वागत के लिए धन्यवाद दिया. मोदी ने इस मौके पर भूटान के उन छात्रों के लिए कुल मिला कर दो करोड़ रु पये की छात्रवृत्ति देने की घोषणा की, जो भारत में पढ़ते हैं. यही नहीं, मोदी ने भूटान में डिजिटल लाइब्रेरी बनाने में भारत सरकार की मदद का वादा भी किया, जिसके जरिये करीब बीस लाख किताबें और पत्रिकाएं भूटान के युवाओं और छात्रों को ऑनलाइन हासिल होंगी.

देकर सादे लिबास में पुलिस लाइन पहुंची. उस समय पुलिस लाइन में पदाधिकारियों की विभागीय कार्यशाला चल रही थी. पटना सीआइडी की टीम ने कार्यशाला के बाहर घूमते हुए दारोगा नागमणि सिंह को गिरफ्तार किया और अपने साथ लेकर पटना के लिए रवाना हो गयी. अपहरणकांड में नागमणि सिंह पर एफआइआर दर्ज किया गया था.

परिवार में कई हैं पुलिस ऑफिसर: मुख्य अपहरणकर्ता रणजीत का पिता नागमणि सिंह जमशेदपुर में दारोगा है, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है. रणजीत के चाचा भी बिहार पुलिस में इंस्पेक्टर हैं. रणजीत के दादा भी पुलिस अधिकारी थे और डीएसपी के पद पर सेवानिवृत्त हुए थे. परिवार में पुलिस पदाधिकारियों के रहने तथा शादी में पुलिस पदाधिकारियों का जमावड़ा लगने के कारण इस अपहरणकांड में पुलिस अधिकारियों की भी संलिप्ता बतायी गयी थी.

सोहेल को कैद में रख कर रणजीत ने की शादी: सोहेल को अपहरण कर अपने घर में रखने के बाद रणजीत सिंह ने शादी की थी. पुलिस ने शादी की वीडियो कैसेट जब्त की थी. वीडियो फुटेज में यह बात सामने आयी थी कि कैद में रखने के दौरान रंजीत ने अरबपति सोहेल से घर में पोछा लगाया था और चूना-पेंट भी कराया था.

रणजीत के गिरोह में 50 सदस्य हैं: पुलिस की जांच में यह बात सामने आयी थी कि दमन से अरबपति सोहेल हिंगोरा (22) का अपहरण करने वाला रणजीत के गिरोह में 50 से ज्यादा सदस्य हैं.

कैद में रखने के दौरान कई दिनों तक सोहेल को खुला भी रखा गया था, लेकिन पिस्टल एवं अन्य हथियार लिए हुए गिरोह के सदस्य उसके इर्दगिर्द रहते थे.

नौ करोड़ फिरौती लेकर छोड़ा था हिंगोरा को

गुजरात के सूरत के अरबपति टेक्सटाइल एवं रियल स्टेट व्यवसायी हनीफ हिंगोरा के बेटे सोहेल हिंगोरा का 29 अक्तूबर 2013 को दमन स्थित फैक्ट्री से अपहरण किया गया था. अपहरण के बाद उसे बिहार के छपरा जिले के नयागांव थाना क्षेत्र के चतुरपुर गांव स्थित दारोगा नागमणि सिंह के घर में रखा गया था. लगभग एक माह तक कैद में रखने के बाद पटना के एक होटल में 9 करोड़ रुपये फिरौती चुकाने के बाद सोहेल हिंगोरा को रिहा किया गया था, हालांकि गैर अधिकारिक तौर पर 25 करोड़ रुपये फिरौती चुकाने की बात सामने आयी थी. फिरौती चुकाने के लिए 28-29 नवंबर को पिता हनीफ हिंगोरा स्वयं पटना आये थे. फिरौती चुकाने के बाद 30 नवंबर को सोहेल हिंगोरा को पटना-छपरा रोड में पेट्रोल

28 वीं वरीयता प्राप्त कोस्टारिका ने उरु ग्वे के हाथों इससे पहले मिली लगातार आठ हारों के बाद उन पर पहली जीत हासिल कर साबित कर दिया है कि उसे हल्के में नहीं लिया जा सकता है. कोस्टारिका के कोच लुइस पिंटो ने मैच से पहले ही एलान कर दिया था कि उनकी टीम स्टार खिलाड़ियों से लैस विपक्षी टीमों के सामने दब कर कतई नहीं खेलेगी, बल्किअपनी ताकत और तैयारी के बल पर मैदान पर उतरेगी. वाकई, उनके खिलाड़ियों ने कोच की बात को अक्षरश: सही साबित कर दिया. डिएगो फुर्लान, एडिसन कावानी और रोड्रिगेज जैसे धुरंधर खिलाड़ियों के साथ उतरी उरु ग्वे की टीम ने पहले हाफ में 1-0 की बढ़त लेते हुए आशा के अनुरूप अच्छी शुरु आत की. लेकिन दूसरे हाफ में कोस्टारिका के युवा जोल कैंपबेल, दुराते और यूरेना ने अद्भुत तालमेल के साथ एक के बाद एक तीन गोल ठोक कर उरु ग्वे की टीम को हताश कर दिया. उरु ग्वे की टीम कैंपबेल पर लगाम कसने में नाकाम रही जिसका खामियाजा उन्हें हार के रूप में ङोलना पड़ा.

कमोबेश इसी तरह की कहानी इटली ने भी इंग्लैंड के खिलाफ दोहरायी. वेन रूनी और जेरार्ड के अलावा इंग्लैंड ने ज्यादातर युवा खिलाड़ी मैदान में उतारे जो अपना स्टारडम साबित करने के प्रयास में इटली पर हमले तो कई बार बोले, लेकिन स्कोर नहीं कर सके. इंग्लैंड के ज्यादातर खिलाड़ी पहली बार विश्व कप में खेल रहे थे जिसका अनुभवी इटली की टीम ने भरपूर फायदा उठाया. मार्सिसियो ने बेहतरीन गोल कर इटली को बढ़त दिलायी, जबकि विश्व कप क्वालीफाइंग में इटली की ओर से सर्वाधिक गोल दागने वाले बालोटेली ने अपने अनुभव के बल पर बेहतरीन गोल कर इंग्लैंड को निराश कर दिया. हालांकि इंग्लैंड की टीम थोड़ी बदकिस्मत रही, जो उनकी ओर से लगे कई शॉट या तो गोल बार से टकरा गये या उनके शॉट निशाने पर नहीं लगे. कुल मिला कर इटली की सशक्त रक्षापंक्ति और बालोटेली व आंद्रिया पिरलो जैसे तेजतर्रार स्ट्राइकर की तारीफ करनी होगी, जिन्होंने पूरी लय के साथ अपने अभियान की शुरु आत की है.

इस बीच, मौजूदा चैंपियन स्पेन के खिलाफ हॉलैंड की जीत की बात न हो, तो वह अधूरी रह जायेगी. ये दो धुरंधर टीमों के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई थी. स्पेन ने पिछली बार फाइनल में हॉलैंड को हरा कर विश्व कप जीता था जिससे उनका मनोबल बढ़ा हुआ था. वल्र्ड की नंबर वन टीम ने मैच के 28 वें मिनट में पहला गोल दाग कर अच्छी शुरु आत भी की. लेकिन स्पेनिश टीम शायद भूल गयी कि हॉलैंड के खिलाड़ी पिछले फाइनल मैच में मिली हार का बदला लेने को उतारू थे.

इसके अलावा स्पेनिश टीम पर जैसे ही एक गोल हुआ, उनके रक्षक और गोलकीपर इकेर कैसिलास के चेहरे पर तनाव साफ दिखने लगे. इसके बाद हॉलैंड ने जब बढ़त हासिल कर ली तो कप्तान कैसिलास की हताशा बढ़ती चली गयी और स्पेन की टीम एक के बाद एक गोल खाती रही. विपक्षी टीम की ताकत को न पचा पाना उनकी हार का सबसे बड़ा कारण बना.

दूसरी ओर, कप्तान रोबिन वान पर्सी और अर्जेन रोबेन की जोड़ी ने जिस तालमेल के साथ स्पेन की रक्षापंक्ति को छिन्न-भिन्न किया, उसे देखते हुए हॉलैंड को एक सशक्त दावेदार माना जा सकता है. वैसे भी, हॉलैंड की टीम तीन बार विश्व कप के फाइनल में पहुंची है और तीनों बार खिताब उनसे दूर रहा. जाहिर है, हॉलैंड इस बार खिताब जीतने के लिए सर्वस्व झोंक देगा. उनके लिए यह संभव है, बशर्ते रोबेन और वान पर्सी जैसे धुरंधर खिलाड़ी अपने अहम को छोड़ जिस तरह एक यूनिट के तौर पर खेलते दिखे, उसे कायम रखें.

हॉलैंड के साथ यह सबसे बड़ी समस्या है कि उसके खिलाड़ियों में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन अपने स्टारडम के आगे वे साथी खिलाड़ी को ज्यादा तवज्जो नहीं देते हैं और एकल प्रयास के चक्कर में जीत के करीब पहुंच कर भी उससे दूर रह जाते हैं. हॉलैंड के कोच वान गाल ने सबसे बड़ा काम यही किया है कि उन्होंने अपने खिलाड़ियों को एकजुट होकर खेलने को प्रेरित किया जिसका सुखद परिणाम पहले ही मैच में देखने को मिल गया.

हुआ राजधानी थिम्पू के लिए, जो पारो से करीब 55 किमी की दूरी पर है.

रास्ते का नजारा अद्भुत था. पारो से थिम्पू वाली सड़क के दोनों तरफ तैनात थे स्कूली छात्र और छात्राएं, साथ में भूटान के आम नागरिक और युवा भी.

शायद ही रास्ते का कोई हिस्सा ऐसा हो, जिसमें हर दो किलोमीटर पर हाथ में भारत और भूटान के झंडे लिये हुए स्कूली छात्र खड़े न हों. मोदी के स्वागत में न सिर्फये झंडे हिला रहे थे, बल्किवंदे मातरम भी गा रहे थे. बीच-बीच में बड़े-बड़े तोरणद्वार भी खड़े किये गये थे, जिसमें संदेश के तौर पर उम्मीद ये जाहिर की गयी थी कि मोदी की भूटान यात्र से भारत और भूटान के संबंध और मजबूत हों.

राजधानी थिम्पू के करीब पहुंचते-पहुंचते सड़क किनारे खड़े लोगों की तादाद बढ़ती चली गयी. थिम्पू शहर में तो युवाओं के अलावा शहरी लोग भी सड़क के किनारे खड़े हाथ हिलाते नजर आये. सरकारी अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक पारो से थिम्पू के रास्ते पर करीब सात हजार स्कूली छात्र खड़े थे.यानी भूटान की करीब सात लाख की आबादी का एक फीसदी 55 किमी लंबे मार्ग पर खड़ा था मोदी के स्वागत के लिए. युवाओं और छात्रों के अलावा सड़क पर हजारों की तादाद में सुरक्षाकर्मी भी मौजूद थे.

प्रधानमंत्री से चर्चा

महाराजा से मिलने के बाद मोदी ने भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे के साथ उनके कार्यालय जाकर औपचारिक बातचीत की. टोबगे ने मोदी की यात्र से पहले ही कह दिया था कि उनकी सरकार इस बात से काफी खुश है कि मोदी ने बतौर प्रधानमंत्री अपनी पहली विदेश यात्र के लिए भूटान को चुना.

शेरिंग टोबगे से मुलाकात के दौरान मोदी ने भारत-भूटान संबंधों को बी 2 बी करार दिया, मतलब भारत से भूटान. मोदी ने भूटान की सरकार और जनता को भी भव्य स्वागत के लिए धन्यवाद दिया. मोदी ने इस मौके पर भूटान के उन छात्रों के लिए कुल मिला कर दो करोड़ रु पये की छात्रवृत्ति देने की घोषणा की, जो भारत में पढ़ते हैं. यही नहीं, मोदी ने भूटान में डिजिटल लाइब्रेरी बनाने में भारत सरकार की मदद का वादा भी किया, जिसके जरिये करीब बीस लाख किताबें और पत्रिकाएं भूटान के युवाओं और छात्रों को ऑनलाइन हासिल होंगी.

पंप के पास छोड़ दिया गया था. रिहाई के बाद हनीफ हिंगोरा अपने बेटे को लेकर सूरत चले गये थे. सूरत में उन्होंने अपने बेटे के अपहरण और इसमें बिहार-झारखंड के पुलिसकर्मियों के साथ-साथ बिहार के सत्ताधारी दल के बड़े नेता के शामिल होने तथा पटना के एक होटल में फिरौती की डील में शामिल होने की बात कही थी. रिहाई के बाद हनीफ हिंगोरा के बयान के आधार पर सूरत व दमन पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी. कैद में रहने के दौरान सोहेल हिंगोरा ने नागमणि सिंह के घर में लगे एयरटेल के डिश एंटीना का नंबर दर्ज कर लिया था. उस आधार पर दमन व सूरत पुलिस खोज करते हुए छपरा पहुंची थी जिसके बाद सोहेल के अपहरण में रणजीत सिंह की संलिप्तता की बात सामने आयी थी. जिस समय सोहेल के अपहरण का खुलासा हुआ था उस समय बिहार में भाजपा-जदयू का गंठबंधन टूटा था और गुजरात में हनीफ हिंगोरा ने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की थी और बेटे के अपहरण में बिहार के सत्ताधारी दल के नेता के शामिल होने का आरोप लगाया था. इसको लेकर अपहरण का मामला हाइ प्रोफाइल हो गया था और उच्च स्तरीय जांच शुरू हुई थी.

सूरत पुलिस ने इस मामले के मुख्य अभियुक्त रंजीत सिंह, बिहार के गौतम एवं पंकज कुमार को गिरफ्तार की थी. साथ ही झारखंड के दो युवकों फैजान एवं तनवीर को भी हिरासत में लिया था. रंजीत के अपहरण के बाद पूरे अपहरणकांड का खुलासा हुआ था. दूसरी ओर हाई प्रोफाइल मामला होने सूरत के साथ-साथ बिहार पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू की थी और दारोगा नागमणि सिंह( उस समय झारखंड के गिरिडीह), उसके बेटे रणजीत सिंह, दीपक, सोनू, संतोष के खिलाफ फिरौती के लिए अपहरण करने तथा अपहरण की साजिश रचने का मामला दर्ज किया था. बिहार पुलिस की छानबीन में यह बात सामने आयी थी कि हाजीपुर से लेकर गाजीपुर तक फिरौती की राशि खाते में डाली गयी थी. बाद में मामले को बिहार सीआइडी को सौंप दिया गया था. इस बीच एएसआइ नागमणि सिंह का प्रमोशन होकर जमशेदपुर ट्रांसफर हो गया था. दूसरी ओर दमन पुलिस ने दारोगा नागमणि सिंह की गिरफ्तारी के लिए झारखंड पुलिस से सहयोग मांगा था तथा बिहार पुलिस ने भी दारोगा की गिरफ्तारी के लिए जमशेदपुर के एसएसपी से संपर्क किया था. जमशेदपुर एसएसपी द्वारा दी गयी रिपोर्ट के आधार पर पटना सीआइडी की टीम जमशेदपुर पहुंची और दारोगा नागमणि सिंह को गिरफ्तार कर ले गयी.

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