टाटा जू के विस्तारीकरण का मास्टर प्लान तैयार, चार फेज में होगा कंस्ट्रक्शन, 2030 तक खर्च होंगे करीब 50 करोड़ रुपये
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Nov 2018 6:48 AM
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संदीप सावर्ण, जमशेदपुर : टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क को निजी क्षेत्र में देश का सबसे बड़ा व सुव्यवस्थित चिड़ियाघर बनाने की तैयारी की गयी है. इसे लेकर चिड़ियाघर प्रबंधन की अोर से पिछले कई वर्षों से मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा था, जिसे पूरा कर लिया गया है. जुस्को प्रबंधन की अोर से तैयार […]
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संदीप सावर्ण, जमशेदपुर : टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क को निजी क्षेत्र में देश का सबसे बड़ा व सुव्यवस्थित चिड़ियाघर बनाने की तैयारी की गयी है. इसे लेकर चिड़ियाघर प्रबंधन की अोर से पिछले कई वर्षों से मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा था, जिसे पूरा कर लिया गया है.
जुस्को प्रबंधन की अोर से तैयार किये गये मास्टर प्लान के अनुसार टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क का विस्तार चार चरणों में किया जायेगा.
अलग-अलग चरणों के लिए अलग-अलग लक्ष्य तय किये गये हैं. सेंट्रल जू अथॉरिटी की अोर से दिये गये गाइडलाइन को केंद्र में रख कर उक्त विस्तारीकरण के प्रोजेक्ट को अंतिम रूप दिया गया है. सभी चार चरणों को 2030 तक पूरा कर लिया जायेगा. जानकारी के मुताबिक मास्टर प्लान को पूरी करने के लिए 2030 तक करीब 50 करोड़ रुपये खर्च
किये जायेंगे. नेचर सेंटर को हटाया जायेगा, बनेगा नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम. टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क के विस्तारीकरण प्रोजेक्ट में इस बात पर भी ध्यान दिया गया है कि आखिर किस प्रकार से बच्चों को वन व वन्य जीवों से जुड़ी जानकारी दी जाये. इसके लिए तय किया गया है कि मौजूदा नेचर सेंटर की जगह पर एक म्यूजियम का निर्माण किया जायेगा. जहां पर्यटक पर्यावरण व वन्य जीवों से जुड़ी कई नवीन जानकारी हासिल कर सकें. नेचर सेंटर व लाइब्रेरी को दूसरी जगह पर शिफ्ट किया जायेगा. एक मीटिंग हॉल भी बनाया जायेगा.
टाटा जू के विस्तारीकरण का मास्टर प्लान तैयार, चार फेज में होगा कंस्ट्रक्शन, 2030 तक खर्च होंगे करीब 50 करोड़ रुपये
टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क प्रबंधन को सेंट्रल जू अथॉरिटी ने पिछले दौरे में कई गाइड लाइन दिया था. इसमें सबसे अहम था जानवरों के बाड़े के आकार को बड़ा करना, ताकि जानवर स्वछंद विचरण कर सकें. इस आदेश के आलोक में बाड़े के साइज को जहां बड़ा किया जायेगा, वहीं शहर के लोगों को कई नये जानवरों से भी रूबरू करवाने की योजना बनायी गयी है, जिसमें जंगली भैंसा, अॉस्ट्रिच व अजगर शामिल हैं. इसके लिए हैदराबाद के नेहरू जूलॉजिकल पार्क प्रबंधन के साथ पूर्व में पत्राचार भी किया जा चुका है, लेकिन जानवरों के लाने की प्रक्रिया को तभी अंतिम रूप दिया जायेगा जब बाड़े का निर्माण कर लिया जायेगा. फिलहाल इसमें कुछ समय लग सकता है.
पहला चरण
टाटा जू के बाउंड्रीवॉल की ऊंचाई बढ़ायी जायेगी. मरीन ड्राइव की अोर से बढ़ायी गयी है, लेकिन पुराना कोर्ट की अोर से भी करीब दो मीटर की ऊंचाई बढ़ेगी.
इंट्रेंस गेट, पार्किंग स्थल, टिकट बूथ का स्थान बदल जायेगा, अब यह डीसी अॉफिस के पीछे से एक रास्ता निकाल कर बनाया जायेगा.
टाटा जू सोसाइटी, पदाधिकारियों के लिए दो मंजिला अॉफिस बनेगा. पर्यटकों के लिए क्लॉक रूम बनेगा.
टाटा जू का वर्तमान अॉफिस तोड़ दिया जायेगा.
दूसरा चरण
लेपर्ड का बाड़ा तोड़ा जायेगा, उसके स्थान पर नये बाड़े का निर्माण होगा.
दरियाई घोड़ा के बाड़े को नये सिरे से बनाया जायेगा. इसका साइज छोटा है. दरियाई घोड़ा के एक अन्य साथी को लाया जायेगा.
राष्ट्रीय पक्षी मोर के बाड़े का आकार बढ़ाया जायेगा, ताकि वह आसानी से बाड़े में विचरण कर सके.
चिड़ियाघर में जिराफ को लाने की तैयारी की गयी है. यही कारण है कि उसके लिए नये बाड़े को तैयार किया जायेगा.
तीसरा चरण
पिकनिक स्पॉट व लेजर शो की तरफ के क्षेत्र को जू अपने कब्जे में ले लेगा. वहां कई छोटे-छोटे जानवरों के बाड़े बनाये जायेंगे.
शेर, बाघ, लंगूर, बंदर के लिए नये बाड़े का निर्माण होगा.
सभी प्रकार के हिरण के बाड़े का री मॉड्यूलिंग होगा.
पर्यटकों के लिए शेड, शौचालय व पेयजल की व्यवस्था होगी
चौथा चरण
टाटा जू परिसर में नये फूड कोर्ट का
निर्माण होगा.
घड़ियाल के नये बाड़े का निर्माण होगा.
अत्याधुनिक व बड़े एक्वेरियम का निर्माण होगा.
एक्वाटिक बर्ड के रखरखाव के इंतजाम होंगे.
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