आज नहाय-खाय के साथ शुरू होगा छठ
Updated at : 11 Nov 2018 7:44 AM (IST)
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जमशेदपुर : चार दिवसीय सूर्य षष्ठी महाव्रत की शुरुआत कार्तिक शुल्क पक्ष की चतुर्दशी तिथि रविवार, 11 नवंबर को नहाय-खाय से हो रही है. इस दिन व्रती प्रात:काल स्नानादि से निवृत्त होकर,घर, द्वारा की सफाई करते हैं. घर में सात्विक भोजन जैसे अरवा चावल, चना दाल, कद्दू आदि सेंधा नमक से तैयार किये जाते हैं. […]
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जमशेदपुर : चार दिवसीय सूर्य षष्ठी महाव्रत की शुरुआत कार्तिक शुल्क पक्ष की चतुर्दशी तिथि रविवार, 11 नवंबर को नहाय-खाय से हो रही है. इस दिन व्रती प्रात:काल स्नानादि से निवृत्त होकर,घर, द्वारा की सफाई करते हैं. घर में सात्विक भोजन जैसे अरवा चावल, चना दाल, कद्दू आदि सेंधा नमक से तैयार किये जाते हैं. इस भोजन को सबसे पहले आराध्य देव को अर्पित किया जाता है. इसके बाद इसे व्रती ग्रहण करती हैं. अंत में परिजन व मित्रजनों के बीच इसे बांटा जाता है.
पहला अर्घ्य 13 को
मंगलवार, 13 नंवबर को अस्ताचलगामी सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया जायेगा. व्रती ब्रह्म मुहूर्त से पूर्व स्नानादि कर परिजनों के साथ विभिन्न प्रकार के पकवान जैसे ठेकुआ, लड़ुआ आदि बनाने में जुट जाती हैं. दिन के तीसरे प्रहर में सूप अथवा डाला में पकवान सजाया जाता है. छठी मैया के गीत गाते हुए नदी घाट पहुंचती हैं. वहां विधिवत सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा की जाती है. अस्त होते सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करती हैं.
अस्ताचलगामी सूर्य देव को अर्घ्य के लिए शुभ मुहूर्त : 3:29 से 5:00 बजे, सर्वोत्तम मुहूर्त 4:24 से 5:00 बजे
उदीयमान सूर्यदेव को अर्घ्य : सुबह 5:59 से 7:35 बजे के बीच दें अर्घ्य
खरना कल
सोमवार, 12 नवंबर को खरना (लौहंडा) है. इस दिन व्रती प्रात:काल स्नानादि कर व्रत के निमित्त उपयोग में आने वाले पात्रों की सफाई करती हैं. जिस स्थान पर खरना किया जायेगा उसकी सफाई भी की जाती है. दिनभर निर्जला रहते हुए नवीन व स्वच्छ वस्त्र धारण कर श्रद्धा के साथ आम लकड़ी से विभिन्न प्रकार के महाप्रसाद (अरवा चावल, गुड़, गाय दूध से खीर, गेहूं की रोटी) बनाते हैं. उपयुक्त मुहूर्त पर सूर्य देव व छठी मैया का आह्वान किया जाता है. एकांत में बनाये व्यंजन अर्पित किया जाता है. कुल देवी-देवता को भी अर्पण किया जाता है. परिजनों, मित्रजनों के मध्य बांटा जाता है. खरना के दिन व्रती जल व प्रसाद ग्रहण करती हैं. इसके बाद पारन के दिन ही जल-अन्न ग्रहण करती हैं.
उदीयमान सूर्य को अर्घ 14 को
उदीयमान सूर्यदेव को बुधवार, 14 नवंबर को अर्घ्य अर्पण किया जायेगा. ब्रह्म बेला में अर्घ्य के निमित्त डाली सजाकर सभी नदी घाट पहुंचते हैं. व्रती जल में उतरकर सूर्यदेव के उदित होने की प्रतीक्षा करती हैं. उदय होने के बाद अर्घ्य अर्पण किया जाता है. सुबह 5:59 से 7:35 बजे तक अर्घ्य अर्पित कर लेना चाहिए. साथ ही सुबह 8:43 बजे से पहले पारन कर लेना चाहिए.
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