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दो दिन से अस्पताल और सिविल सर्जन कार्यालय का चक्कर लगाते परिजनों का सब्र टूटा, शव ले जाने को नहीं मिली एंबुलेंस, मचाया हंगामा

Updated at : 25 Aug 2018 6:35 AM (IST)
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दो दिन से अस्पताल और सिविल सर्जन कार्यालय का चक्कर लगाते परिजनों का सब्र टूटा, शव ले जाने को नहीं मिली एंबुलेंस, मचाया हंगामा

जमशेदपुर : बहरागोड़ा में बस दुर्घटना में मृत दो वृद्ध महिला व एक बच्ची का शव ले जाने के लिए 12 घंटे से एंबुलेंस की मांग कर रहे परिजनों के सब्र का बांध शुक्रवार को टूट गया. एमजीएम अस्पताल अधीक्षक के कक्ष के सामने बिहार के कांवरियों ने जमकर हंगामा मचाया. उन्हें रोकने आये सुरक्षा […]

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जमशेदपुर : बहरागोड़ा में बस दुर्घटना में मृत दो वृद्ध महिला व एक बच्ची का शव ले जाने के लिए 12 घंटे से एंबुलेंस की मांग कर रहे परिजनों के सब्र का बांध शुक्रवार को टूट गया. एमजीएम अस्पताल अधीक्षक के कक्ष के सामने बिहार के कांवरियों ने जमकर हंगामा मचाया. उन्हें रोकने आये सुरक्षा गार्ड व कर्मचारियों के साथ कांवरियों ने धक्का-मुक्की की.
बाद में साकची पुलिस ने आकर उन्हें शांत कराया. हंगामा के बाद अधीक्षक ने एसडीओ व डीसी से बात की. इसके बाद सिविल सर्जन ने निजी एंबुलेंस उपलब्ध कराया. दोपहर में परिजनों तीनों शव को लेकर मोतिहारी के लिए रवाना हो गये.
दरअसल, बिहार के कांवरियों से भरी बस कोलकाता गंगासागर से पुरी होते वापस राजगीर में आयोजित श्रावणी मेला जा रही थी. इस क्रम में बुधवार की रात बहरागोड़ा में बस पलट गयी. दुर्घटना में दो महिला व एक बच्ची की मौत हो गयी थी. बस में बिहार के पूर्वी चंपारण, अदापुर थाना अंतर्गत भवानीपुर, वीरगंज, कटगेनवा गांव के कुल 65 लोग सवार थे. एमजीएम अस्पताल में शुक्रवार को कांवरियों ने शव ले जाने के लिए एंबुलेंस की मांग की तो उन्हें सिविल सर्जन ऑफिस भेज दिया गया.
सिविल सर्जन ने उन्हें एमजीएम अस्पताल भेज दिया. 12 घंटे तक यहां से वहां दौड़ाने के बाद अस्पताल अधीक्षक ने एंबुलेंस देने में असमर्थता जतायी. इसके बाद कांवरियों ने हंगामा किया. बस दुर्घटना में घायल एमजीएम अस्पताल में इलाज करा रहे सभी लोग बस व मोतिहारी से आयी गाड़ियों से रवाना हो गये. दो लोगों को इलाज अभी टीएमएच में चल रहा है.
शव के लिए अस्पताल में नहीं है एंबुलेंस : मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ एसी अखौरी ने बताया कि एमजीएम अस्पताल से शव ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं है. इससे हमेशा हंगामा होता है. विभाग को कई बार पत्र लिखा गया है लेकिन अब तक कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है. फिर से इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को लिखा जायेगा. सांसद व मंत्री से भी शव के लिए एक एंबुलेंस की मांग की जायेगी.
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