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मंगलवार की सुबह जमशेदपुर से स्कूल के लिए निकली थी सुकरु

Updated at : 04 Jul 2018 5:22 AM (IST)
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मंगलवार की सुबह जमशेदपुर से स्कूल के लिए निकली थी सुकरु

जमशेदपुर : सारजामदा लुपुंग टोला की रहने वाली शिक्षिका सुकरु हेस्सा(सीमा हंस) सरायकेला खपरसाई में एक विक्षिप्त व्यक्ति ने तेज धारदार हथियार से गर्दन काटकर हत्या कर दी. सुकरु हेस्सा कुछ दिनों से सारजामदा लुपुंग टोला स्थित आवास से ही स्कूल आना-जाना कर रही थी. मंगलवार की सुबह भी वह सुबह करीब 7 बजे स्कूल […]

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जमशेदपुर : सारजामदा लुपुंग टोला की रहने वाली शिक्षिका सुकरु हेस्सा(सीमा हंस) सरायकेला खपरसाई में एक विक्षिप्त व्यक्ति ने तेज धारदार हथियार से गर्दन काटकर हत्या कर दी. सुकरु हेस्सा कुछ दिनों से सारजामदा लुपुंग टोला स्थित आवास से ही स्कूल आना-जाना कर रही थी. मंगलवार की सुबह भी वह सुबह करीब 7 बजे स्कूल के लिए निकली थी. शिक्षिका के पति सिलास हंस टिस्को जेनरल ऑफिस में काम करते हैं. सुकरु हेस्सा की बहन का बेटा कुछ दिनों से लगातार बीमार था. उनकी तबीयत ठीक नहीं होने की वजह से उसने ही बहन के बेटा को खासमहल स्थित सदर अस्पताल में भरती कर दिया था. उनकी देखभाल का जिम्मा भी उनके ऊपर था. इस वजह से भी वह कुछ दिनों से सारजामदा वाले घर से स्कूल आना-जाना कर रही थी.

25 जून को बेटे का मनाया था जन्म दिन : सुकरु हेस्सा का परिवार ने 25 जून को बेटा अंशुल हंस का 13वां जन्म दिन काफी धूमधाम से मनाया था. व्यस्तता के बावजूद इकलौते बेटे के लिए समय निकाल कर परसुडीह सारजामदा स्थित आवास पर आयी थी. जन्म दिन को मनाने के लिए बेटा भी सरायकेला स्थित हॉस्टल से घर आया था. बेटा का जन्म दिन को मनाने बाद सुबह में स्कूल लौट गयी थी.
खूंटी बुड़ाडीह की रहने वाली थी शिक्षिका : सुकरु हेस्सा के पति सिलास हंस का मूल रूप से खूंटी क्षेत्र के बुड़ाडीह के रहने वाले हैं. वहां परिवार के अन्य लोग रहते हैं. शिक्षिका सुकरु हेस्सा का मायके भी खूंटी क्षेत्र के ही जानुमपीड़ी गांव में है.
रेजा का काम करते हुए पायी शिक्षक की नौकरी
परसुडीह सारजामदा पुराना बस्ती के रहने वाले सुकरु हेस्सा का भगीना प्रेम करुवा ने बताया कि उनकी मामी काफी मेहनती थी. उसने पारिवारिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए रेजा का भी काम किया है. उम्र 40 से अधिक होने के बाद भी पढ़ाई-लिखाई ने नाता नहीं तोड़ा था. घर व बाहर काम करते हुए टीचर की वैकेंसी निकलने पर भरती रहती थी. उसने आदित्यपुर गम्हरिया के एक संस्थान से टीचर ट्रेनिंग का प्रशिक्षण लिया था. वर्ष 2016 में ही ट्रेनिंग पूरी की थी. ट्रेनिंग के कुछ दिन बाद ही उनकी नौकरी लग गयी. करीब डेढ़ सालों से वह शिक्षिका थीं.
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