टाटा स्टील में मेडिकल एक्सटेंशन बंद, बदले में कर्मियों को पांच साल में Rs 7.20 लाख का पैकेज
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 29 Jun 2018 5:12 AM
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जमशेदपुर : टाटा स्टील के कर्मचारियों को अब तक मिल रहे मेडिकल एक्सटेंशन के लाभ को पूरी तरह बंद कर दिया गया है. गुरुवार को टाटा स्टील प्रबंधन और टाटा वर्कर्स यूनियन के बीच हुए समझौते के बाद इस पर मुहर लग गयी. समझौते के अनुसार, कर्मचारियों के मेडिकल एक्सटेंशन को 1 जुलाई 2018 से […]
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जमशेदपुर : टाटा स्टील के कर्मचारियों को अब तक मिल रहे मेडिकल एक्सटेंशन के लाभ को पूरी तरह बंद कर दिया गया है. गुरुवार को टाटा स्टील प्रबंधन और टाटा वर्कर्स यूनियन के बीच हुए समझौते के बाद इस पर मुहर लग गयी. समझौते के अनुसार, कर्मचारियों के मेडिकल एक्सटेंशन को 1 जुलाई 2018 से बंद कर दिया गया है.
इसके बदले में प्रबंधन अब कर्मचारियों को 7 लाख 20 हजार रुपये का पैकेज देगा. यह राशि पांच साल में अलग-अलग हिस्से में मिलेगी. साथ ही सेवानिवृत्त कर्मचारी रिटायरमेंट के करीब डेढ़ साल यानी 61 वर्ष तीन महीने की उम्र तक कंपनी की ओर से आवंटित क्वार्टर का उपयोग कर सकेंगे. रिटायर्ड कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति लाभ की राशि भी रिटायरमेंट के दिन ही मिल जायेगी. साथ ही यदि पांच साल के अंतराल में कर्मचारी की किसी कारणवश मौत हो जाती है, तो अवधि पूरी होने तक पैकेज की राशि ज्वाइंट एकाउंट होल्डर को मिलती रहेगी.
यूनियन और प्रबंधन के बीच हुआ समझौता फिलहाल 30 जून 2023 तक के लिए लागू रहेगा. समझौते में कहा गया है कि इसके बाद इस पर पुनर्समीक्षा की जायेगी. हालांकि समझौते में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पांच साल की अवधि के बाद इस पैकेज की व्यवस्था को जारी रखा जायेगा या नहीं, यूनियन जरूर दावा कर रही है कि पांच साल बाद इसके पैकेज की राशि को लेकर रिव्यू किया जाना है. समझौते के दौरान प्रबंधन की ओर से वीपी एचआरएम सुरेश दत्त त्रिपाठी, चीफ एचआरएम स्टील संदीप धीर, चीफ ग्रुप आइआर जुबिन पालिया तथा यूनियन की ओर से अध्यक्ष आर रवि प्रसाद, महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट अरविंद पांडेय मौजूद थे.
कमेटी मेंबरों ने निर्णय का किया विरोध, हंगामा
समझौते के बाद टाटा वर्कर्स यूनियन कार्यालय में अध्यक्ष आर रवि प्रसाद ने कमेटी मेंबरों की बैठक में प्रबंधन से हुई सहमति के बारे में जानकारी दी. समझौते में तय बिंदुओं का कमेटी मेंबरों ने विरोध किया. कमेटी मेंबरों का कहना था कि मेडिकल एक्सटेंशन बंद कर पैकेज के नाम पर कर्मचारियों को ठगा गया है. उन्होंने कहा कि आगामी पांच साल के बाद तय निर्णय जारी रहेगा कि नहीं, इस पर भी संशय है.
स्टैंडिंग ऑर्डर की धारा 56 को बनाया गया आधार
प्रबंधन और यूनियन दोनों इस समझौते के पीछे स्टैंडिंग ऑर्डर के क्लाउज 56 को आधार बना रही है. जिसके तहत ‘सभी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र 60 वर्ष निर्धारित की गयी है. इसमें प्रबंधन के अंतिम निर्णय पर एक समय में सिर्फ एक वर्ष का सेवा विस्तार दिया जा सकता है, और कुल तीन वर्ष का.’ प्रबंधन ने जहां समझौते में इसे अब कड़ाई से पालन होने की बात कही है, वहीं यूनियन ने इस क्लाउज के कारण अपनी मजबूरी बताते हुए समझौता करने की बात कही है.
प्रंबधन के अनुसार, वर्तमान औद्योगिक माहौल, दक्षता की उपलब्धता और कर्मचारी की उत्पादकता व लागत को देखते हुए संस्थान के दीर्घकालीन हितों को देखते हुए 60 वर्ष से अधिक के सेवा विस्तार के प्रावधान को तत्काल प्रभाव से बंद करना जरूरी हो गया था. समझौते में कहा गया है कि यूनियन का तर्क था कि मेडिकल एक्सटेंशन की प्रक्रिया के व्यवहार में आम होने के कारण कर्मचारी अपनी रिटायरमेंट 61 वर्ष तक मानते रहे हैं साथ ही क्वार्टर अवधि की प्लानिंग भी उसी अनुसार करते रहे हैं. यूनियन के इसी अनुरोध को देखते हुए जिन कर्मचारियों को मेडिकल एक्सटेंशन नहीं दिया जायेगा उन्हें प्रबंधन भरपाई करने का प्रावधान कर रही है.
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