जमशेदपुर : उम्रकैद की सजा काट 19 बंदी हुए रिहा

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जमशेदपुर : घाघीडीह सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 23 में से 19 बंदियों को गुरुवार को रिहा कर दिया गया. अर्थदंड की राशि जमा नहीं करा पाने के कारण चार बंदियों की रिहाई नहीं हो सकी. सभी 23 बंदी 14 साल सजा काट चुके हैं. गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग […]

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जमशेदपुर : घाघीडीह सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 23 में से 19 बंदियों को गुरुवार को रिहा कर दिया गया. अर्थदंड की राशि जमा नहीं करा पाने के कारण चार बंदियों की रिहाई नहीं हो सकी. सभी 23 बंदी 14 साल सजा काट चुके हैं.
गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की संयुक्त सचिव पूनम प्रभा पूर्ति के आदेश पर सभी को रिहा किया गया. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 9 अप्रैल को राज्य सजा पुनरीक्षण कमेटी की बैठक में घाघीडीह सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 23 बंदियों को रिहा करने का निर्णय लिया गया था.
नये जीवन की करें शुरुआत : जेल अधीक्षक. जेल अधीक्षक सत्येंद्र चौधरी ने बंदियों को भगवान गणेश की प्रतिमा सौंपकर नये जीवन की शुरुआत करने का कहा. बंदियों से समाज में अच्छे आचरण करने और दोबारा जेल नहीं आने का संकल्प लिया. जेल में कार्य के दौरान मिले पैसे और पासबुक भी बंदियों को सौंप दिये गये. इस मौके पर सहायक कारापाल लवकुश, राकेश कुमार झा आदि मौजूद थे.
जेल आये, तो दो साल की थी बेटी : विपिन सिंह. विपिन 19 साल पहले जेल आये थे. उस समय उनकी बेटी दो साल की थी. अब वह बड़ी हो गयी है. छोटा गोविंदपुर निवासी विपिन सिंह ने कहा कि वह अब आगे की जिंदगी नये सिरे से शुरू करेंगे. विपिन सिंह को सत्र न्यायाधीश श्री लक्ष्मण उरांव की कोर्ट से आजीवन कारावास की सजा हुई थी.
पति-पत्नी रिहा नहीं हो सके. आजीवन कारावास की सजा काट कर रहे पति-पत्नी रसाय गगराई और राईल गगराई अर्थदंड की राशि चुका नहीं पाने के कारण रिहा नहीं हो सके. ग्राम पाताहाटी, थाना सोनवां, जिला पश्चिम सिंहभूम, चाईबासा निवासी दोनों हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा हुई थी. जेल में सबसे ज्यादा उम्र के बंदियों में उनकी गिनती होती है. वे 73 साल के हैं.
गोगलो निवासी रामचंद्र हांसदा थे. साल 1999 से वह हत्या के मामले में सजा काट रहे थे. रामचंद्र को अपर सत्र न्यायाधीश एमसी वर्मा की अदालत से आजीवन कारावास की सजा मिली थी. 20 साल बाद जेल से निकले तो उनके हाथों में चलने के लिए लाठी सहारा था.
जेल अधीक्षक ने गणेश की प्रतिमा देकर सबके बेहतर जीवन की कामना की
विपिन कुमार सिंह, उम्र 58, छोटा गोविंदपुर, हरिओम प्रसाद, उम्र 45, गांधी रोड, सोनारी, राजू छत्तीसगड़िया, उम्र 50, सिदगोड़ा, टुडू मुंडा उर्फ तिया मुंडा, उम्र 46, सिदगोड़ा, पंचम भुईयां, उम्र 43,कानू भट्टा, सिदगोड़ा, गोरेलाल भुइंया, उम्र 43, कानू भट्टा, कंचन भुईयां उर्फ काजल भुईयां, उम्र 41, सिदगोड़ा, सुमन सिंह, उम्र 48, बागबेड़ा, रामचंद्र हांसदा, उम्र 77, धालभूमगढ़, कमल सिंह मुंडा, उम्र 47, ईचागढ़, सरायकेला- खरसावां, मोहित सिंह, उम्र 44, सईयादा, मनोहरपुर, चाईबासा, जुंबल दोराईबुरू, उम्र 37, बड़ा कुचाई, टोन्टो, चुम्बुरू दोराईबुरू, उम्र 35, टोन्टो, जीतू आचार्य, उम्र 45, टोन्टोपोसी, सरायकेला, रासो गोप, उम्र 51, ईचागढ़, सरायकेला-खरसावां, मुलिया बंदा उर्फ भोले, उम्र 48 गोइलकेरा, प. सिंहभूम, मंजूरा बंदा, उम्र 55, ग्राम धोबाडीहा, गोइलकेरा, पश्चिम सिंहभूम, विजय कुमार तिवारी, उम्र 50, गढ़वा, संतोष चौरसिया, उम्र 42, सुखदेवनगर, रांची.
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