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पारंपरिक स्वाद और उसकी गौरवपूर्ण विरासत लिये आ रहा है सनराइज मसाले

प्राचीन और मध्यकालीन युगों में भारतीय मसालों ने भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. यहां से चीन, प्राचीन मिश्र, यूरोप तक मसालों के व्यापार का एक लंबा इतिहास रहा है. यहां तक कि वास्को डी गामा जैसे कई विदेशी यात्रियों का भारत में आगमन भी मसालों के कारण ही हुआ, जिसके बाद दुनिया के कोने-कोने तक यहां सांस्कृतिक विरासत फैल गयी. देश में केरल, पंजाब, गुजरात, मणिपुर, मिजोरम आदि मसालों के प्रमुख केंद्र हैं.

भारत हमेशा से ही अपने मसालों के लिए विश्व भर में मशहूर रहा है. यूं कहें कि भारतीय मसालों का इतिहास मानव सभ्यता जितना ही पुराना है. चूंकि भारतीय जलवायु मसालों के लिए बेहद अनुकूल रही है, जिस कारण हल्दी, दालचीनी, काली मिर्च, लौंग, धनिया, लाल मिर्च आदि मसाले यहां बड़े पैमाने पर उत्पादित किये जाते हैं. भारतीय मसालों के निर्यात का इतिहास अत्यंत ही प्राचीन है. प्राचीन और मध्यकालीन युगों में भारतीय मसालों ने भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. यहां से चीन, प्राचीन मिश्र, यूरोप तक मसालों के व्यापार का एक लंबा इतिहास रहा है. यहां तक कि वास्को डी गामा जैसे कई विदेशी यात्रियों का भारत में आगमन भी मसालों के कारण ही हुआ, जिसके बाद दुनिया के कोने-कोने तक यहां सांस्कृतिक विरासत फैल गयी. देश में केरल, पंजाब, गुजरात, मणिपुर, मिजोरम आदि मसालों के प्रमुख केंद्र हैं.

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औषधीय गुण बढ़ाते हैं रोग प्रतिरोधक क्षमता :

हजारों वर्षों से भारतीय मसालों और जड़ी-बूटियों (जैसे- काली मिर्च, दालचीनी, हल्दी, इलायची) का इस्तेमाल पाक कला और बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता रहा है. स्वाद के साथ-साथ औषधीय गुणों के कारण भारतीय मसालों की विशिष्ट उपयोगिता रही है. उदाहरण के लिए, जीरे का उपयोग हमेशा से पाचन के लिए किया जाता रहा है. इसमें एंटीबैक्टिरियल गुण भी पाये गये हैं. इसी तरह ब्लड सर्कुलेशन को सुचारू रखने तथा कोलेस्ट्रॉल लेवल को संतुलित रखने में काली मिर्च बेहद उपयोगी मानी जाती है. कोरोना महामारी के कारण भारतीय मसालों की मांग करीब 34% तक बढ़ गयी है, जिसका सबसे बड़ा कारण है शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में ये अत्यंत उपयोगी साबित हुई हैं.

शुद्ध मसालों में 100 वर्षों का अनुभव :

जिस तरह भारतीय मसालों का एक गौरवमयी इतिहास रहा है, उसी तरह पैकेज्ड मसालों में सबसे भरोसेमंद ब्रांड है आईटीसी सनराइज, जो पिछले 100 वर्षों से शुद्ध मसालों पर काम कर रहा है. 1910 के दशक की शुरुआत में कोलकाता में एक छोटी-सी दुकान से शुरू हुआ मसालों का यह सफर अपनी गुणवत्ता एवं लाजवाब स्वाद के दम पर समय के हर पड़ाव से होता हुआ आज भी मजबूती से खड़ा है. शुद्ध मसालों के स्वाद और उसके खुशबू को आप तक पहुंचाने के लिए आईटीसी सनराइज अपने कुछ सबसे बेहतरीन उत्पादों को अब झारखंड लेकर आ रहा है.

एक परंपरा, जो चले जमाने के साथ
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उन्नत तकनीक और मिश्रित मसालों की इसकी नयी रेंज ने पूर्वोत्तर के लोगों के बीच आईटीसी सनराइज को एक पॉपुलर ब्रांड बना दिया है, फिर भी यह अपनी जड़ों को भूला नहीं है.

आईटीसी सनराइज लोगों को मसाले की उसी प्राचीन परंपरा के साथ फिर से जुड़ने का एक अवसर देता है और इसीलिए यह इस गर्व के साथ खड़ा है- ”एक परंपरा, जो चले जमाने के साथ”.
सेहत सनराइज
काली मिर्च औषधीय गुणों से भरपूर होती है. अगर आपको गले में दर्द या खरास हो गयी हो, तो 8-10 काली मिर्च के दाने को पानी में डालकर अच्छी तरह उबाल लें. उसके बाद पानी को छानकर उससे गरारे करें. इससे गले के दर्द और खराश में तुरंत आराम मिल सकता है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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