इटखोरी मोड़ के पास एनएच-33 फोरलेन सड़क लगातार दुर्घटनाओं का केंद्र बन चुकी है

इटखोरी मोड़ के पास एनएच-33 फोरलेन सड़क लगातार दुर्घटनाओं का केंद्र बन चुकी है
पदमा. इटखोरी मोड़ के पास एनएच-33 फोरलेन सड़क लगातार दुर्घटनाओं का केंद्र बन चुकी है. यहां तीन सड़कों का मिलन होता है हजारीबाग से पटना जाने वाली मुख्य फोरलेन सड़क, और चतरा-इटखोरी-पदमा से आने वाली सड़क. ढलान के कारण हजारीबाग से बरही की ओर आने वाले भारी वाहनों की गति अधिक रहती है. ऐसे में छोटी-बड़ी गाड़ियां जब फोरलेन पर चढ़ती हैं या सड़क पार करती हैं, तो तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आ जाती हैं. अब तक सैकड़ों हादसे हो चुके हैं, जिनमें दर्जनों लोगों की मौत हुई है. हाल ही में पदमा बीओआई शाखा प्रबंधक की भी इसी मोड़ पर टेलर की चपेट में आकर मौत हो गयी. इटखोरी मोड़ के पास तकनीकी सुरक्षा बहाल करें स्थानीय ग्रामीण और जनप्रतिनिधि लंबे समय से यहां ओवरब्रिज बनाने की मांग कर रहे हैं. हर दुर्घटना के बाद एनएचएआइ समाधान का आश्वासन देता है, लेकिन ठोस कदम नहीं उठाये गये. हाल की घटना के बाद पदमा सीओ मोतीलाल हेंब्रम ने एनएचएआई परियोजना पदाधिकारी से बात कर तकनीकी सुरक्षा उपायों पर जोर दिया. उन्होंने सड़क पर भारी वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए रंबल स्ट्रिप लगाने का सुझाव दिया और इसके लिए पत्र भी लिखा. परियोजना पदाधिकारी ने आश्वासन दिया कि जल्द ही टीम मौके का निरीक्षण कर समाधान निकालेगी.
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