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सरकारी स्कूलों में घट रही बच्चों की संख्या

Updated at : 28 Apr 2025 10:32 PM (IST)
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सरकारी स्कूलों में घट रही बच्चों की संख्या

सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने और सभी बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए सरकार द्वारा स्कूल चले हम और रूआर जैसे कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं.

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पदमा़ सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने और सभी बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए सरकार द्वारा स्कूल चले हम और रूआर जैसे कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं. इसके बावजूद सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार घटती जा रही है. पदमा प्रखंड के मध्य विद्यालय चंपाडीह के उत्क्रमित उच्च विद्यालय बनने के साथ ही बच्चों की संख्या में गिरावट आयी है. दस साल पहले इस स्कूल में कक्षा एक से आठ तक बच्चों की संख्या लगभग 500 थी. पर पिछले कुछ वर्षों में इस स्कूल में 90 प्रतिशत बच्चों की संख्या घटकर अब मात्र 57 रह गयी है. उसमें भी उपस्थिति मात्र 20 बच्चों की ही होती है. 28 अप्रैल को कक्षा एक में नामांकित दो बच्चों में से एक भी नहीं आया. वहीं कक्षा दो में नामांकित चार में एक, कक्षा तीन में नामांकित तीन में एक, कक्षा चार में नामांकित पांच में एक, कक्षा पांच में नामांकित आठ में चार, कक्षा छह में नामांकित 14 में नौ, कक्षा सात में नामांकित 10 में दो और कक्षा आठ में नामांकित आठ में दो बच्चे उपस्थित थे. बच्चों की संख्या कम होने के कारण विद्यालय बंद होने के कगार पर पहुंच गया है. इन बच्चों को पढ़ाने के लिए तीन शिक्षक पदस्थापित हैं. मध्य विद्यालय चंपाडीह में 15 कमरे हैं, जिसमें मात्र तीन कमरे का उपयोग होता है. कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को एक ही कमरे में पढ़ाया जाता है. वहीं कक्षा छह के बच्चों को एक कमरे में और सात व आठ के बच्चों को एक साथ बैठाया जाता है.

दो कक्षा के लिए आठ शिक्षक

मध्य विद्यालय चंपाडीह को सरकार के आदेश के बाद कुछ साल पहले उत्क्रमित कर दिया गया. विद्यालय परिसर में कमरा रहने के बावजूद कक्षा नौ और दस के लिए पुराने विद्यालय से अलग लगभग एक किमी दूर नया विद्यालय भवन बनाया गया है, जहां आठ शिक्षक पदस्थापित हैं. यहां पर लगभग 400 बच्चे नामांकित हैं.

विद्यालय हुआ गुटबाजी का शिकार

एक ही नाम का विद्यालय दो अलग-अलग जगह संचालित हो रहा है, जिसके कारण कुछ वर्षों में आपसी गुटबाजी के कारण एक ही विद्यालय के दो प्रभारी अलग-अलग काम करते रहे. बाद में समझौता होने पर उच्च विद्यालय की शिक्षिका सुनीता कुमारी को प्रभारी नियुक्त किया गया. साथ ही पुराने विद्यालय के कक्षा एक से आठ तक के लिए शैक्षणिक व्यवस्था के लिए चेतलाल राणा को सह प्रभारी बनाया गया.

शिक्षकों की कमी से घट रही है बच्चों की संख्या

विद्यालय की प्रभारी सुनीता कुमारी ने बताया कि विद्यालय के उत्क्रमित होने के बाद दो भाग में बंटना बच्चों की संख्या घटने का मुख्य कारण है. साथ ही मध्य विद्यालय में शिक्षकों की संख्या कम होना भी एक बड़ी समस्या है. मध्य विद्यालय के लिए चार शिक्षक पदस्थापित हैं, जिसमें से एक शिक्षक नवीन कुमार को प्रतिनियुक्त पर भेज दिया गया है. एक शिक्षक सच्चिदानंद सिंह मास्टर ट्रेनर हैं, जिन्हें साल में छह महीने प्रशिक्षण के लिए बाहर ही रहना पड़ता है. बचे दो शिक्षकों में से एक शिक्षक को सरकारी काम में ही व्यस्त रहना पड़ता है. ऐसे में पढ़ाई कैसे होगी? उच्च विद्यालय के लिए आठ शिक्षक पदस्थापित हैं, लेकिन उनमें से कुछ शिक्षक मध्य विद्यालय के बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं, तो नये भवन जहां बना है वहां आने-जाने का रास्ता ही नहीं है. बहुत मुश्किल से शिक्षक उच्च विद्यालय परिसर पहुंच पाते हैं. साथ ही वहां एसएमसी भी पिछले चार माह से काम नहीं कर रहा है. दो बार चुनाव होने के बाद भी चयनित कमेटी काम नहीं कर रही. हमलोग कोशिश कर रहे हैं कि इस वर्ष बच्चों की संख्या में वृद्धि हो.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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