हजारीबाग के इंदिरा गांधी स्कूल के क्वार्टर पर अवैध कब्जा, SDO के पास पहुंची शिकायत

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Indira Gandhi School

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Indira Gandhi School : प्रभारी प्राचार्य ने बताया कि स्कूल के सरकारी क्वार्टर पर लंबे समय से कई लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है. वे क्वार्टर खाली नहीं कर रहे हैं. इसके अलावा विद्यालय के बाहरी परिसर में जहां-तहां बालू एवं गिट्टी का अवैध रूप से भंडारण किया गया है. पत्र के माध्यम से प्रभारी प्राचार्य ने सरकारी क्वार्टर पर अवैध कब्जा को खाली कराने की मांग की है.

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हजारीबाग, आरिफ : हजारीबाग के इंदिरा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के सरकारी क्वार्टर पर कुछ लोगों के द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया है. इस संबंध में प्रभारी प्राचार्य प्रवीण रंजन ने सदर एसडीओ बैद्यनाथ कामती को पत्र लिखा है. पत्र के माध्यम से प्रभारी प्राचार्य ने सरकारी क्वार्टर पर अवैध कब्जा को खाली कराने की मांग की है.

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बलपूर्वक खाली कराया जायेगा अवैध कब्जा- एसडीओ

प्रभारी प्राचार्य ने बताया कि स्कूल के सरकारी क्वार्टर पर लंबे समय से कई लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है. वे क्वार्टर खाली नहीं कर रहे हैं. इसके अलावा विद्यालय के बाहरी परिसर में जहां-तहां बालू एवं गिट्टी का अवैध रूप से भंडारण किया गया है. इससे स्कूल एवं इसके आस-पास की सुंदरता को खराब हो रही है. सदर के प्रभारी एसडीओ बैद्यनाथ कामती ने बतया कि प्रभारी प्राचार्य के पत्र जो एसडीओ ने गंभीरता से लिया है. सदर अंचल के सीईओ कुमार मयंक भूषण से जांच रिपोर्ट मांगी गई है. जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी. स्कूल के सरकारी क्वार्टर में अवैध कब्जा को बलपूर्वक खाली कराया जायेगा.

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बेहतरीन होता है इंदिरा गांधी स्कूल का रिजल्ट

हजारीबाग जिले में इंदिरा गांधी स्कूल शिक्षा विभाग का एक बड़ा एसेट है. स्कूल की स्थापना वर्ष 1984 में हुई है. बीते 41 वर्षों से यह स्कूल लड़कियों के लिए आवासीय विद्यालय है. राज्यभर से बड़ी संख्या में लड़कियां स्कूल में पढ़ने आती हैं. स्कूल द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा के बाद कक्षा 6 में बच्चियों का नामांकन लिया जाता है. नामांकित बच्चियों को पढ़ाई के साथ-साथ रहने, खाने एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं मिलती है. 4 साल पहले ही इंदिरा गांधी स्कूल को प्लस टू स्कूल का दर्जा मिला है. स्कूल के रिजल्ट की बात करें तो, जैक बोर्ड में इंदिरा गांधी स्कूल का रिजल्ट हमेशा बेहतर रहा है. वहीं, दूसरी ओर नियमित रूप से बहाली नहीं होने के कारण स्कूल में विषयवार शिक्षिकाओं की कमी है. लंबे समय से स्थायी प्राचार्या का पद खाली है. सेवानिवृत्ति के बाद शिक्षकेतर कर्मी ना के बराबर हैं.

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