देश में सूखे और बाढ़ की दोहरी मार, केंद्र करे आपदा की घोषणा : भुवनेश्वर प्रसाद मेहता

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पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता (फाइल फोट)

देश भर में सूखे और बाढ़ का कहर जारी है, जिससे धान की रोपाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। करीब 450 जिलों में 70% तक रोपाई रुकी है, जिससे किसानों और खेत मजदूरों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने तत्काल आपदा घोषित करने और राहत राशि की मांग की है।

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परवेज आलम की रिपोर्ट

Hazaribagh News : देश के विभिन्न हिस्सों में मानसून के प्रतिकूल स्थिति ने किसानों और खेत मजदूरों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है. एक ओर जहां कई राज्यों में सूखे के कारण धान की रोपाई प्रभावित हुई है,तो दूसरी ओर कई प्रदेशों में अत्यधिक वर्षा बाढ़ के वजह से तबाही मचाई हुई हैं.इस स्थिति को देखते हुए झारखंड किसान सभा और झारखंड राज्य विस्थापित संघर्ष मोर्चा ने केंद्र एवं राज्य सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है.

देश के 450 जिलों में धान की रोपाई प्रभावित

संगठन के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि देश के लगभग 450 जिलों में धान की रोपाई 70 प्रतिशत तक प्रभावित हुई है. इससे किसान आर्थिक संकट में फंस गये हैं. खेतों में काम नहीं मिलने के कारण खेत मजदूरों के सामने भी रोजगार का संकट गहरा गया है और वे रोजी-रोटी की तलाश में पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं.

आपदा घोषित करने और राहत राशि की मांग

श्री मेहता ने केंद्र सरकार से देश में तत्काल आपदा की स्थिति घोषित करने की मांग की. उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक प्रभावित जिले को आपदा प्रबंधन के तहत कम से कम 10 करोड़ रुपये की सहायता दी जाये, ताकि किसानों, खेत मजदूरों और प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत मिल सके. साथ ही रबी फसल की तैयारी के लिए बीज, खाद, कृषि उपकरण और अन्य जरूरी संसाधनों की अग्रिम व्यवस्था करने की भी मांग की गयी.

झारखंड के 17 जिले भी प्रभावित

पूर्व सांसद ने दावा किया कि झारखंड के करीब 17 जिलों में धान की रोपाई 70 प्रतिशत तक प्रभावित हुई है. इससे खेती पर निर्भर आदिवासी, दलित, गरीब और खेत मजदूर परिवारों के सामने आजीविका का संकट बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि राज्य में पर्याप्त रोजगार के अवसर नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं. विशेष रूप से ग्रामीण युवतियों के पलायन पर चिंता जताते हुए उन्होंने उनकी सुरक्षा और शोषण की आशंका भी व्यक्त की.


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अकाल क्षेत्र घोषित करने की मांग

भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने झारखंड सरकार से प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वेक्षण कर उन्हें अकाल क्षेत्र घोषित करने की मांग की. उन्होंने किसानों को आर्थिक सहायता, खेत मजदूरों को रोजगार, पशुपालकों के लिए चारा तथा मनरेगा के तहत पर्याप्त काम उपलब्ध कराने पर जोर दिया. उनका कहना था कि प्राकृतिक आपदा के समय सरकार की प्राथमिकता किसानों और ग्रामीण गरीबों को राहत पहुंचाने तथा गांवों में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर पलायन रोकने की होनी चाहिए.


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शेखर सुमन

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