हजारीबाग डीटीओ में फिर निकला जहरीला सांप, कर्मी भयभीत; अधिकारी मौन

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डीटीओ कार्यालय के कंप्यूटर रूम में दहशत में बैठे कर्मचारी. प्रतीकात्मक फोटो.

डीटीओ कार्यालय के कंप्यूटर रूम में दहशत में बैठे कर्मचारी. प्रतीकात्मक फोटो.

Hazaribagh News: हजारीबाग डीटीओ और आरटीए कार्यालय परिसर में लगातार जहरीले सांप निकलने से कर्मचारियों और आवेदकों में दहशत है. झाड़ियों और गंदगी को कारण बताया जा रहा है. अधिकारियों ने सफाई और सुरक्षा उपाय तेज करने की बात कही, जबकि नगर निगम की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं.

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हजारीबाग से आरिफ की रिपोर्ट

Hazaribagh News: झारखंड के हजारीबाग के डीटीओ और आरटीए दोनों कार्यालय परिसर में जहरीले सांपों के लगातार दिखने से कर्मियों में दहशत है. कार्यालय इसके आसपास गंदगी और झाड़ियों के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है. इससे कामकाज प्रभावित हो रहा है. डीटीओ कार्यालय से डीडीसी रिया सिंह का सरकारी आवास सटा हुआ है. रोज दिन निकल रहे सांपों की खबर नगर निगम प्रशासन तक पहुंची है और नगर निगम प्रशासन मौन है.

दो महीने पहले कंप्यूटर रूम में घुसा था जहरीला सांप

मंगलवार यानी सात जुलाई को फिर से सफाई कर्मी वाल्मीकि ने सांप देखा. इसके बाद हो हल्ला किया. उसने बताया वह अपने मोबाइल से सांप की तस्वीर और वीडियो बनाने के लिए जैसे ही तैयारी किया, सांप झाड़ी में जाकर छुप गया. इससे पहले दो महीने पहले कंप्यूटर रूम में जहरीला सांप घुस गया था. मौजूद कार्यालय कर्मी डर गए थे. पकड़ने वाले व्यक्ति को बुलाकर सांप को निकाला गया था.

डीटीओ में आए दिन निकल रहा है सांप

डीटीओ में आए दिन निकल रहे सांप इन दिनों शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है. वह इसलिए भी कि यहां समय-समय पर जहरीले सांप निकल रहे हैं. इससे कर्मचारी हर दिन डरे-सहमे कार्य कर रहे हैं. खासकर कंप्यूटर कक्ष पहुंचने के बाद कर्मी सबसे पहले इधर-उधर नजर दौड़ाते हैं कहीं कोई जहरीला सांप तो नहीं छुपा है. इसके बाद भगवान का नाम लेकर काम शुरू कर रहे हैं. काम के दौरान कर्मी बीच-बीच में अपने बैठने के स्थान के आसपास नजर दौड़ाते रहते हैं. आज से पहले 23 मई को भी कंप्यूटर कक्ष के पीछे सटे झाड़ी में कर्मियों ने जहरीला सांप देखा था.

डीटीओ में क्यों निकल रहा है सांप

डीटीओ कार्यालय परिसर में आगे के हिस्से की साफ-सफाई अच्छी है. वहीं, पीछे के हिस्से में गंदगी का ढेर है. कार्यालय के पीछे के हिस्से में मौजूद शिक्षा विभाग का डीएसई कार्यालय कुछ वर्ष पहले नए समाहरणालय भवन में शिफ्ट हुआ है. इससे लंबे समय से खाली पड़े पुराना डीएसई कार्यालय ने भूत बंगले का रूप ले लिया है. इसके आसपास झाड़ियां उगी हुई है. चारों ओर गंदगी का ढेर है. यह कहना गलत नहीं होगा कि उगी हुई झाड़ी उपर से गंदगी के ढेर से यहां जहरीले सांपों का बसेरा हो गया है. इसे देखने वाला कोई नहीं है. इधर, आरटीए कार्यालय से सटे पुराना डीटीओ कार्यालय भी वर्षों से बंद है. यहां वर्षों पुरानी कार्यालय के कामकाज से संबंधित पुराने और भारी-भरकम दस्तावेज पड़े हैं. यहां भी सांपों के बसेरा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है. कर्मियों ने यहां भी जहरीला सांप देखकर अधिकारियों को सूचना दी है.

कंप्यूटर रूम में लगी रहती है आवेदकों की भीड़

कंप्यूटर रूम में आधे दर्जन से अधिक कर्मी रोजाना कार्य करते हैं. बाहर आवेदकों की भीड़ रहती है. एक कमरे का पुरानी बिल्डिंग, ऊपर से कार्यालय में टेबल, कुर्सी और आलमिरा के अलावा, कार्यों से जुड़े दस्तावेज भरे पड़े हैं. जहां सांपों के छुपे होने की आशंका बनी रहती है.

सांप के डसने से पुलिसकर्मी की मौत

कुछ वर्ष पहले जहरीले सांप के डसने से एक पुलिसकर्मी की मौत हो चुकी है. पुलिसकर्मी पद्मा पुलिस पिकेट में कार्यरत थे. कहा जाता है कि कार्यालय परिसर में जहरीला सांप था. कार्य के दौरान उसकी नजर सांप पर नहीं पड़ा और अनजाने में सांप ने पुलिसकर्मी को डस लिया. इससे पुलिसकर्मी की मौके पर मौत हो गई थी.

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क्या कहते हैं डीटीओ

डीटीओ संतोष कुमार चौधरी ने कहा दो महीने पहले प्रभार लिया है. कर्मियों ने बताया कार्यालय और इसके आसपास लगातार जहरीले सांप देखे जा रहे हैं. कार्यालय परिसर की और अधिक साफ-सफाई पर ध्यान दिया गया है. सुरक्षा के इंतजाम को देखकर जरूरत अनुसार खिड़की-दरवाजे, वेंटिलेटर में जाली लगाई गई है. वहीं, कर्मियों को अलर्ट भी किया गया है.

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Kumarvishwat Sen

लेखक के बारे में

By Kumarvishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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