पांच पापों से उत्पन्न इच्छाओं पर नियंत्रण रखना ही उत्तम संयम धर्म
Published by : SUNIL PRASAD Updated At : 02 Sep 2025 10:55 PM
प्रवचन में बहन संपदा ने कहा
हजारीबाग. पर्यूषण पर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म पर कार्यक्रम हुआ. इस पर्व की शुरुआत सुबह जिनेंद्र देव के कलशाभिषेक व शांतिधारा के साथ हुई. ब्रह्मचारिणी बहन संपदा दीदी ने उत्तम संयम धर्म पर प्रवचन दिया. कहा कि पांच पापों से उत्पन्न होनेवाली इच्छाओं और अशक्तियों पर नियंत्रण रखें, ताकि प्राणियों की रक्षा की जा सके और आत्मा का सुख प्राप्त हो सके. यह आत्म निर्माण नियंत्रण की एक प्रक्रिया है. वरिष्ठ अधिवक्ता स्वरूप चंद जैन ने जैन धर्म में उत्तम संयम को आत्मिक मुक्ति प्राप्त करने का आवश्यक मार्ग बताया. कहा कि संयम धारण करने से ही नर से नारायण बना जा सकता है. गुरुकुल के डायरेक्टर जेपी जैन ने कहा कि आज के भौतिक युग में जहां मनुष्य भौतिक सुखों में अंधा होकर जीवन जी रहा है, वही संयम हमें सही रास्ता दिखाता है. संध्या में 108 आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र का अनावरण, ब्रह्मचारिणी बहनों द्वारा प्रवचन व धार्मिक पाठशाला के बच्चों द्वारा कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया. उत्तम संयम धर्म के जयकारे के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया.
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