जरूरत 100 मेगावाट की, मिल रहा है 30

Updated at : 04 Jun 2014 5:41 AM (IST)
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जरूरत 100 मेगावाट की, मिल रहा है 30

– बीमारी तो पता है, पर उपचार नहीं हो रहा – कई दशक पूर्व डीवीसी व बिजली बोर्ड के बीच हुई बिजली आपूर्ति के कांट्रेक्ट का नहीं हुआ आकलन – पहले से कई गुणा बढ़ गयी है जिले की आबादी व उपभोक्ताओं की संख्या जयनारायण हजारीबाग : हजारीबाग में बिजली की मांग और आपूर्ति के […]

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– बीमारी तो पता है, पर उपचार नहीं हो रहा

– कई दशक पूर्व डीवीसी व बिजली बोर्ड के बीच हुई बिजली आपूर्ति के कांट्रेक्ट का नहीं हुआ आकलन

– पहले से कई गुणा बढ़ गयी है जिले की आबादी व उपभोक्ताओं की संख्या

जयनारायण

हजारीबाग : हजारीबाग में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच कई जटिलताएं है. दिनों दिन यह समस्या बढ़ती जा रही है. पिछले दो-तीन साल में हजारीबाग में करीब 1200 गांवों में बिजली पहुंची है. इससे बिजली की मांग कई गुणा बढ़ी है. पर आपूर्ति ज्यों का त्यों है. पिछले पांच साल में हजारीबाग में एक भी ट्रांसमिशन लाइन नहीं बना.

लेकिन गांवों में तार के जाल जरूर बिछ गये. जब तक इस गतिरोध को दूर करने का प्रयास सरकार की ओर से नहीं की जाती तब तक जनता को 20 घंटे तक बिजली मिलना मात्र एक सपना होगा. हमारे नेतृत्व कर रहे जनप्रतिनिधि व सरकार को कुछ बिंदुओं पर ध्यान देने की जरूरत है.

डीवीसी के साथ बिजली का कांट्रेक्ट डिमांड बढ़ाने की जरूरत : हजारीबाग में डीवीसी झारखंड राज्य बिजली बोर्ड को विद्युत आपूर्ति करता है. कई दशक से डीवीसी व बिजली बोर्ड के बीच 30 मेगावाट बिजली आपूर्ति का कांट्रेक्ट है. जबकि हजारीबाग को 100 मेगावाट बिजली की जरूरत है. डीवीसी में बिजली उत्पादन कम होने पर आपूर्ति कांट्रेक्ट डिमांड के आधार पर करने लगता है. लाजमी है कि क्षेत्र के लोगों को बिजली कम मिलेगी.

बिजली आपूर्ति पर असमान लोड का वितरण : हजारीबाग में डीवीसी के ग्रिड से दो सर्किट के माध्यम से बिजली आपूर्ति की जाती है. 50 एमवीए के दो पावर सब स्टेशन लगे हैं. सर्किट एक से शहर का और सर्किट दो से ग्रामीण क्षेत्र के बिजली की आपूर्ति की जाती है. सर्किट एक में तीन विद्युत सब स्टेशन जुड़े हैं. मिशन सब स्टेशन में 250 एंपियर, लोहसिंघना सब स्टेशन में 200 एंपियर व सिंदूर सब स्टेशन में 300 एंपियर बिजली का लोड पिक आवर में होता है. इस तरह कुल 750 एंपियर बिजली की जरूरत होती है.

जबकि सर्किट एक में डीवीसी मात्र 600 एंपियर बिजली दे सकता है. इसी तरह सर्किट दो में इचाक सब स्टेशन में 120 एंपियर, सिंदूर सब स्टेशन में 180 एंपियर, जबरा व कवालू सब स्टेशन में 190 एंपियर, डेमोटांड़ में 190 एंपियर, बड़कागांव में 140, केरेडारी में 100 एंपियर बिजली का लोड है. इस तरह कुल सर्किट टू पर 920 एंपियर का लोड पड़ता है. जबकि डीवीसी के सर्किट टू से 600 एंपियर ही बिजली मिल सकती है. ऐसी परिस्थिति में विभाग को लोड शेडिंग करना पड़ता है. इस जटिलता को दूर करने के लिए उच्च स्तरीय प्रयास की जरूरत है.

डीवीसी से सर्किट बढ़ाने की जरूरत : हजारीबाग को 100 मेगावाट बिजली की जरूरत है. डीवीसी के पावर ग्रिड में वर्तमान स्थिति में इतनी बिजली दे पाना मुश्किल है. जब तक ग्रिड में दो अतिरिक्त 50 मेगावाट के पावर ट्रांसफारमर नहीं लगेंगे तब तक यह असंभव दिखता है. इतनी बिजली को घरों तक पहुंचाने के लिए दो अतिरिक्त सर्किट बनाना होगा. यानी डीवीसी से चार सर्किट नहीं निकलेंगे तब तक 20 घंटा बिजली उपभोक्ताओं को नहीं मिलेगी. इसके लिए भी उच्च स्तरीय पहल की जरूरत है.

डीवीसी का थर्ड सर्किट बन कर तैयार, पर चालू नहीं : दो महीने से डीवीसी का थर्ड सर्किट बन कर तैयार है. लेकिन कुछ तकनीकी अड़चन के कारण इसे चालू नहीं किया गया. डीवीसी थर्ड सर्किट चालू करने के लिए झारखंड राज्य बिजली बोर्ड को एलसी एकाउंट खोलने को कहा है. यह एकाउंट सरकार के स्तर से खोला जा सकता है. लेकिन सरकार इस पर गंभीर नहीं है. ऐसे में लोगों को कैसे बिजली मिलेगी. गरीबों के घर कैसे रोशन होंगे इस पर विचार करने की जरूरत है. इन बीमारियों की पहचान तो हो गयी है अब उच्च नेतृत्व व सरकार को उपचार ढूंढने की आवश्यकता है.

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