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डायन-बिसाही मामला : गुमला में एक परिवार तीन साल से सामाजिक बहिष्कार का झेल रहा दंश

Updated at : 08 Jul 2023 6:09 AM (IST)
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डायन-बिसाही मामला : गुमला में एक परिवार तीन साल से सामाजिक बहिष्कार का झेल रहा दंश

गुमला के सिसई में पिछले तीन साल से विधवा रमिया देवी का परिवार सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल रहा है. परिजनों ने कई बार प्रशासन से मदद मांगी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई, लेकिन किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव पहुंच कर ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया.

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Jharkhand News: गुमला जिला अंतर्गत सिसई प्रखंड क्षेत्र का एक परिवार पिछले तीन साल से सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल रहा है. ग्रामीणों ने डायन बिसाही का आरोप लगा कर सामाजिक बहिष्कार किया है. परिजनों ने कई बार प्रशासन से मदद मांगी, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है. अचानक इस परिवार के साथ किसी अनहोनी की घटना होने की आशंका पर प्रशासन शुक्रवार को जागा. इसके बाद कार्यपालक दंडाधिकारी रश्मि खुशबू मिंज, समाज कल्याण पदाधिकारी सीता पुष्पा, शैलेंद्र जारीका, सीडीपीओ सुधा सिन्हा, थानेदार आदित्य कुमार चौधरी, मुखिया रवि उरांव, आंगनबाड़ी सुपरवाइजर समेत कई लोग गांव पहुंच ग्रामीणों को समझाया.

सीएम सचिवालय से लेकर डीसी-एसपी तक लगाये गुहार

इस संबंध में गंदूर मुंडा ने बताया कि इस मामले को लेकर 2020 से अब तक दो बार एसपी, दो बार उपायुक्त और एक बार मुख्यमंत्री सचिवालय को लिखित आवेदन देकर जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगा चुके हैं. इसके बावजूद प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की. ऐसे में हमारा पूरा परिवार दहशत में जी रहा है.

कई वर्षों से हमारे परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा

उन्होंने कहा कि गांव एवं पंचायत के कुछ दबंगों के साथ मिल कर मेरे ही परिवार के लोगों ने 56 वर्षीय मेरी मां और 32 वर्षीय बहन को डायन करार दे दिया है. इसलिए पिछले कई वर्षों से हमारे परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है.

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जान से मारने का किया प्रयास

वर्ष 2007 में ये लोग मेरी मां को डायन बताकर गया ले गये और वहां मुंडन करवाया था. गांव में बैठक कर लोगों ने मेरी मां और बहन के साथ मारपीट भी की थी. जब भी मेरी बहन की शादी की बात चलती या कोई उसे देखने आता, तो उन्हें भड़का दिया जाता, जिससे अब तक मेरी बहन की शादी नहीं हो पायी. मुझे भी जान से मारने का प्रयास किया गया था. गांव के लोग खेती-बारी में हमारा सहयोग नहीं करते हैं. पारिवारिक व सामाजिक समारोहों व पूजा पाठ में हमें न तो बुलाया जाता है और न ही किसी को हमारे घर आने दिया जाता है.

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