हर दिन कंधे पर बाइक ढोकर नदी पार करने को मजबूर हैं गुमला के ग्रामीण, पालकोट के जेना नदी पर नहीं बना पुल

गुमला के पालकोट में जेना नदी में पुल नहीं बनने से 1000 की आबादी प्रभावित हैं. बारिश के समय तो स्थिति और विकट हो जाती है. ग्रामीणों को कहीं आने-जाने के लिए बाइक को कंधे पर ढोकर नदी पार करना पड़ता है. इसके बावजूद इस समस्या के हल के लिए कोई सुध नहीं ले रहा है.
Jharkhand news (दुर्जय पासवान, गुमला) : गुमला जिला अंतर्गत पालकोट ब्लॉक के देवगांव मौजा में जेना गांव है. गांव की आबादी करीब 1000 है. यह गांव शिक्षित है. इसके बावजूद स्वतंत्र भारत में इस गांव की जिंदगी शहरी जीवन से कटा हुआ है. इसका मुख्य कारण जेना नदी में पुल नहीं होना है. पुल नहीं रहने के कारण यहां के लोग कई समस्याओं से जूझ रहे हैं. अगर गांव से बाहर निकल रहे हैं या गांव के अंदर घुस रहे हैं, तो नदी से पार करने के लिए बाइक को कंधे पर ढोकर पार करना पड़ता है.
ग्रामीण कहते हैं कि हमारी जिंदगी ऐसी है कि हर दिन बाइक को कंधे में ढोकर नदी को पार करना पड़ता है. तेज बहाव होने पर नदी पार नहीं करते हैं. कारण नदी में बहने का डर रहता है. स्वास्थ्य सबसे बड़ी समस्या है. बीमार व्यक्ति को खटिया में लादकर नदी से पार करते हैं. पढ़ाई पर भी असर पड़ता है. नदी में बाढ़ रहने पर छात्र स्कूल नहीं जा पाते हैं. देश की आजादी के 75 साल पूरे हो गये. लेकिन, जेना गांव की तस्वीर नहीं बदल रही है. गांव के लोगों ने सांसद, विधायक वा प्रशासन से जेना नदी में पुल बनवाने की मांग की है.
अगस्तुस एक्का ने कहा कि आजादी के 75 साल हो गये. देश में आजादी के अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है. लेकिन, जेना गांव सहित कई ऐसे गांव हैं जहां आज भी विकास की किरण नहीं पहुंची है. आज भी गांव के लोग विकास की आस लगाये बैठे हैं. डिजिटल इंडिया, बुलेट ट्रेन, स्मार्ट सिटी की बात हो रही है, लेकिन गांवों में एक पुल व चलने के लिए सड़क तक नहीं है. फिर हम विकास की कल्पना कैसे कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि जेना नदी में पुल नहीं रहने से करंजटोली, बड़काटोली, मचकोचा, चापाटोली, लोधमा, महुआटोली, पोजेंगा, लमदोन, दमकारा, बारडीह, झीकीरीमा, सुंदरपुर, सोलगा, रायकेरा, रेंगोला, पेटसेरा, तिलैडीह, मतरडेगा, रेवड़ा सहित कई गांव के लोग जेना गांव नहीं आ पाते हैं. ये सभी गांव प्रभावित हो रहे हैं.
जेना गांव के लोयोला एक्का, गेंदेरा उरांव, ब्लासियुस तिर्की, कलेस्तुस तिर्की, ओलिभ एक्का, दीपक उरांव, राजेश कुल्लू, कमिल खाखा, संतोष तिर्की, जुलियुस तिर्की, पैत्रुस तिर्की, मिखाइल किड़ो, महावीर सिंह, राजू सिंह, वेनेदिक्त तिर्की, अंजुलुस कुल्लू, लोदरो उरांव, ग्रेस तिर्की, विश्वासी एक्का, समीरा तिर्की, सुष्मिता, आरती, पात्रिक एक्का, सोनू एक्का, दानियल तिर्की व केरा बड़ाइक ने संयुक्त रूप से कहा कि बरसात में 1000 आबादी 3 महीने तक टापू में रहता है. पुल नहीं रहने के कारण गांव का विकास रुका हुआ है. शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि सहित कई काम पुल के नहीं रहने से प्रभावित है. यहां तक कि बच्चे भी स्कूल नहीं जा पाते हैं. सबसे संकट किसी बीमार व्यक्ति को नदी से पार करने में उत्पन्न होता है.
Posted By : Samir Ranjan.
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