सरना धर्म कोड आदिवासियों की पहचान, इसे लेकर रहेंगे : चमरा लिंडा

Updated at : 27 May 2025 11:25 PM (IST)
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सरना धर्म कोड आदिवासियों की पहचान, इसे लेकर रहेंगे : चमरा लिंडा

सरना धर्म कोड नहीं, तो झारखंड में जाति जनगणना नहीं नारे के साथ झामुमो जिला कमेटी ने दिया धरना

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गुमला. सरना धर्म कोड नहीं, तो झारखंड में जाति जनगणना नहीं के नारे के साथ झामुमो जिला कमेटी ने कचहरी परिसर में धरना-प्रदर्शन किया. इसमें पांच हजार से अधिक झामुमो कार्यकर्ता शामिल हुए. मुख्य अतिथि के रूप में आदिवासी कल्याण मंत्री चमरा लिंडा, गुमला विधायक भूषण तिर्की व सिसई विधायक जिग्गा सुसारन होरो थे. मौके पर मंत्री चमरा लिंडा ने कहा है कि सरना धर्म कोड आदिवासियों की पहचान है, इसे हम लेकर रहेंगे. केंद्र में बैठी सरकार को सरना धर्म कोड देना होगा. उन्होंने आदिवासी समाज के लोगों को एकजुट होकर अपनी मांगों को रखने व आंदोलन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया. विधायक जिग्गा सुसारन होरो ने कहा है कि झामुमो की हेमंत सोरेन सरकार लगातार सरना धर्म कोड की मांग कर रही है. यहां तक बिल पास कर केंद्र सरकार के पास भेजी गयी है. इसके बाद भी केंद्र सरकार सरना धर्म कोड नहीं दे रही है. नगर परिषद गुमला के पूर्व उपाध्यक्ष मो कलीम अख्तर ने कहा है कि सभी जाति व धर्म के लोगों का अपना धर्म कोड है. लेकिन आदिवासियों का धर्म कोड नहीं रहना. यह केंद्र में बैठी सरकार की चाल है. झामुमो नेता आरिफ अंसारी ने कहा है कि हमें इस प्रकार एकजुट होकर अपनी बातों को केंद्र सरकार तक पहुंचाना होगा. मंच संचालन रंजीत सिंह सरदार व मो लड्डन ने किया. कार्यक्रम में मोहरलाल उरांव, सुनील उरांव, अभिषेक लकड़ा, संजय सिंह, प्रदीप सिंह समेत अन्य लोग मौजूद थे.

सरना धर्म कोड नहीं मिला, तो जाति जनगणना कराने नहीं देंगे : भूषण

विधायक भूषण तिर्की ने कहा कि आदिवासी धर्म कोड भारत की आजादी के पहले कांग्रेस के जमाने में 1871 ईस्वी में आदिवासी धर्म कोड था. भारत की आजादी के बाद 1951 में आदिवासी धर्म कोड था. 1961 में किन्हीं कारणों से आदिवासी धर्म कोड हटा दिया गया, तब से लेकर अब तक सरना कोड की मांग को लेकर आदिवासी समाज के लोग लड़ाई लड़ रहे हैं. आदिवासी की पहचान इसलिए मिलना चाहिए, भारत देश की असली मूलनिवासी आदिवासी है. भारत देश में लगभग सात सौ से अधिक जनजातियों का समूह है. 1951 की जनगणना के मुताबिक आदिवासी 5.6 प्रतिशत थे. 2011 की जनगणना के मुताबिक भारत देश 8.6 प्रतिशत हो गये हैं. जब आदिवासी की जनसंख्या बढ़ रही है. लेकिन इनके लिए कोई धर्म कोड नहीं है. ऐसी सूरत आज भारत देश में 10 करोड़ से अधिक आदिवासी लोग निवास कर रहे हैं. झामुमो इन्हीं बातों को लेकर झारखंड में सरना कोड नहीं, तो जातीय जनगणना नहीं कराने का नारा दिया है. देश में सभी जाति व धर्म के लोगों को अपना अपना धर्म कोड मिला है. झारखंड व देश में रहने वाले आदिवासियों को अब तक धर्म कोड क्यों नहीं मिला. यह झामुमो जानना चाहती है और मांग करती है कि आदिवासियों को उनकी पहचान सरना धर्म कोड मिले. देश में 17 से 18 राज्य में आदिवासी निवास करते हैं. उनको भी आदिवासी धर्म कोड की पहचान मिलनी चाहिए. आज वर्तमान समय में केंद्र में बैठी भाजपा की सरकार से यह कहना चाहेंगे. सुने मोदी सरकार, हमारी पुकार है. सरना धर्म कोड नहीं देंगे, तो हम जाति जनगणना कराने नहीं देंगे. विधायक ने कहा है कि 2021-22 में जब झारखंड विधानसभा से सरना धर्म कोड का बिल पास कर केंद्र सरकार के पास भेजने का काम किया गया. पांच साल बीतने के बाद भी भाजपा आज आंख मूंद कर सोयी हुई है. जबतक सरना कोड नहीं मिलता है, तब तक राज्य में जाति जनगणना करने नहीं देंगे.

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